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केरला कांग्रेस (एम) का बढ़ता संकट

कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
पी श्रीकुमारन - 2020-06-17 09:42 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के एक महत्वपूर्ण घटक केरल कांग्रेस (एम) का संकट दोनों गुटों द्वारा परस्पर समझौता करने से इनकार करने के साथ गहरा गया है।

सुशांत राजपूत की मौत

क्या प्रतिभाओं की कब्रगाह बनी हुई है बॉलीवुड?
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-06-16 09:40 UTC
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से देश उद्वेलित है। 34 वर्ष के सुशांत को एक सफल कलाकार माना जा रहा है, जिन्होंने 10 साल के संघर्ष से अपना मुकाम हासिल कर लिया था। धोनी की भूमिका करके उन्होंने बहुत सराहना पाई थी और छिछोरे फिल्म में भी अपने अभिनय की धाक जमाई थी। उनके पास पैसा था, शोहरत थी और भी बहुत चीजें थीं, जो एक सफल व्यक्ति के पास होता है। इन सबके बावजूद उन्होंने आत्महत्या कर ली। यह आत्महत्या भी उन्हांने एकाएक आवेश में आकर नहीं की, बल्कि 6 महीने के मानसिक अवसाद के बाद यह किया।

मोदी को निर्णय लेने में सावधानी बरतनी चाहिए

कोविड संक्रमण पर सफलता की शुरुआती उत्तेजना गलत साबित हुई
के रवीन्द्रन - 2020-06-15 12:19 UTC
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र की नियति को प्रभावित करने वाले फैसले लेने में अपना मनमानापन दिखाया। यह सच है कि उन्होंने इस तरह की विचारहीन कार्रवाई से अपने प्रधानमंत्रित्व को दांव पर लगा दिया है, लेकिन यह उस कीमत की तुलना में नगण्य है जो देश को भुगतना पड़ रहा है।

चौहान के ऑडियो क्लिप ने कांग्रेस को एक बड़ा हथियार दिया

इसका इस्तेमाल विधानसभा के उपचुनावों में खूब होगा
एल एस हरदेनिया - 2020-06-13 10:18 UTC
भोपालः सीएम शिवराज सिंह चौहान की एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल होने के एक दिन बाद, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि ‘‘भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने फैसला किया था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार गिरनी ही चाहिए’’ मुख्यमंत्री ने गुरुवार को ट्वीट किया कि यह एक महान काम है। पापियों को नष्ट करने का कार्य। मध्य प्रदेश में चौहान ने कांग्रेस को बहुत ही संवेदनशील प्रचार हथियार मुहैया कराया है। विधानसभा के 24 उपचुनावों में कांग्रेस प्रभावी रूप से इसका इस्तेमाल करेगी।

प्रवासी मजदूरों की दुर्गती की याद देश में लंबे समय तक बनी रहेगी

केन्द्र द्वारा उनके बारे में सोचे बिना लाॅकडाउन करना उनकी दुर्दशा का सबब बना
अंजन रॉय - 2020-06-12 08:46 UTC
जब तक वायरस के प्रसार से लड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी तालाबंदी नहीं की गई, तब तक भारत ने प्रवासी श्रमिकों और अर्थव्यवस्था के इंजन को चलाने में उनकी भूमिका पर कोई ध्यान नहीं दिया। इन असहाय लोगों का संकट अर्थव्यवस्था के कामकाज में गहरी अंतर्दृष्टि देता है।

मंदिर खोले जाने पर विवाद

सबरीमाला जैसी गलती सरकार नहीं दुहराए
पी श्रीकुमारन - 2020-06-11 09:49 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल सरकार द्वारा राज्य में मंदिरों को खोलने के निर्णय ने एक विवाद को जन्म दिया है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार का कदम केंद्र के निर्देश के मद्देनजर आया है कि पूजा स्थल 8 जून से खोले जा सकते हैं।

वियतनाम ने कोरोना को कैसे हराया

वहां एक व्यक्ति भी कोरोना से नहीं मरा
एल एस हरदेनिया - 2020-06-10 08:50 UTC
वैसे तो कोरोना की महामारी से लगभग सारी दुनिया पीड़ित है और सभी देश अपने-अपने तरीके से इसका मुकाबला कर रहे हैं। परंतु जिस बहादुरी से और रणनीति बनाकर वियतनाम ने इसका मुकाबला किया है वह अद्भुत है। सच पूछा जाए तो वियतनाम बहादुरों का देश है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि वियतनाम ने अमरीका जैसे शक्तिशाली राष्ट्र के घुटने टिकवा दिए थे। उस दरम्यान वियतनाम को लगभग सारी दुनिया का समर्थन प्राप्त था। दुनिया के सभी लोकतंत्र समर्थक जनता ने वियतनाम का साथ दिया था। उस समय सारी दुनिया में एक नारा गूंजता था ‘मेरा नाम तेरा नाम, वियतनाम वियतनाम'।

शिवराज सिंह चौहान के चौंकाने वाले फैसले

राज्य सभा चुनाव का मामला अदालत में जाएगा
एल एस हरदेनिया - 2020-06-09 10:19 UTC
भोपालः शिवराज सिंह चौहान सरकार के दो फैसले चौंकाने वाले हैं। एक निर्णय उस समय के आईएएस अधिकारियों के स्थानान्तरण से संबंधित है जब राज्य को कोरोना संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिन आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है, उनमें कमिश्नर, इंदौर संभाग और भोपाल नगर निगम के आयुक्त भी शामिल हैं। इनमें कुछ जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं।

बिहार की दिलचस्प होती राजनीति

भाजपा नीतीश का साथ छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकती
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-06-08 10:23 UTC
बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और आगामी नवंबर में नई विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है। हम इसे संभावना इसलिए कह रहे हैं कि उस चुनाव पर मौजूदा कोरोना संकट ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। कोरोना संकट बद से बदतर होता जा रहा है और कुछ कहा नहीं जा सकता कि अगले दो से तीन महीने में इसकी क्या स्थिति होगी। केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के पास इस संकट से जूझने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, इसलिए उन्होंने लंबे समय तक देश को लाॅकडाउन की स्थिति में रखा, हालांकि उसके कारण लाखों करोड़ रूपये की आर्थिक क्षति हुई। क्षति के बावजूद कोरोना का चेन तोड़ने में हम सफल नहीं हो पाए हैं। अब लाॅकडाउन में भी बहुत ढील दी जा चुकी है, जिसके कारण कोरोना के मरीजों की संख्या और भी तेजी से बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

धरती के थरथराने का तेज होता सिलसिला और हम

मौत से डरने का कोई मतलब नहीं
अनिल जैन - 2020-06-06 09:11 UTC
पिछले करीब दो महीने से भूकंप के झटकों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के साथ ही हरियाणा और पंजाब के एक बडे हिस्से भी को भयाक्रांत कर रखा है। इस दौरान कुल 11 बार लोगों ने भूकंप के झटकों को महसूस किया है। हालांकि भूकंप के इन झटकों की वजह से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन भूकंप महसूस होना ही एक बार में पूरे जीवन के कम्पन का महसूस होने जैसा होता है। फिर यह झटके तो कोढ में खाज की तरह रहे, क्योंकि इस समय लोग पहले से ही कोरोना महामारी के संकट से जूझते हुए अपने-अपने घरों में कैद हैं। जिस पैमाने से भूकंप को मापा जाता है, उस पैमाने पर भूकम्प के इन सभी झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.0 से 4.5 तक थी।