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राष्ट्र के प्रति एक बड़ा अपराध कर रहे हैं भारतीय राजनयिक

चीन के प्रति कूटनीति में भारत विफल
अशोक बी शर्मा - 2014-02-04 09:06 UTC
चीन के प्रति अपनी कूटनीति में भारत लगातार विफल रहा है। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों द्वारा उत्तरी क्षेत्र में राजनायिक रेखा और पूर्वी क्षेत्र में मैकमोहन रेखा को भारत की सीमा रेखा के रूप में निर्धारित किया गया था और उस पर जोर न देकर भारतीय राजनायिक राष्ट्र के प्रति एक बड़ा अपराध कर रहे हैं। वास्तविकता यह है कि आजादी के बाद भारत के आधिकारिक मानचित्र में इन दोनों रेखाओं को मान्यता दी गई है।

भारतीय जनता पार्टी को नये साथी नहीं मिल रहे

अपने 182 सीट के रिकॉर्ड के पास पहुंचना भी उसे होगा कठिन
हरिहर स्वरूप - 2014-01-06 13:04 UTC
लोकसभा के आम चुनाव अब तीन महीने ही दूर हैं। उसके बाद क्या स्थिति होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस की सरकार बनने के कोई आसार नहीं दिख रहे। भाजपा की सरकार बनने पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए हैं। अब दोनों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला होना है कि उनमें से कौन लोकसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती है। यदि हम भारतीय जनता पार्टी को पिछले 4 लोकसभा चुनावों में मिली सफलता का आकलन करें, तो पाते हैं कि इस बार पार्टी को 1998 और 1999 में मिली 182 सीटों से ज्यादा सीटें मिल पाना आसान नहीं होगा।

जापानी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा

परमाणु ऊर्जा पर समझौता हो सकता है
नित्य चक्रबर्ती - 2014-01-04 10:57 UTC
इसी महीने जनवरी में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे की भारत यात्रा हो रही है। भारत इस यात्रा को खास महत्व दे रहा है। इसका खास महत्व भी है। सबसे पहली बात तो यह है कि परमाणु ऊर्जा सहयोग पर दोनों देशों के बीच सहमति की उम्मीद है। दूसरी बात यह है कि इस दौरे के कारण भारत में जापानी निवेश को जबर्दस्त बढ़ावा मिलेगा। खासकर इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर काफी लाभान्वित होंगे और उनमें भी सड़क और रेल परिवहन को खास फायदा होगा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है और भारतीय अधिकारियों को उम्मीद है कि भारत और जापान की जनवरी, 2014 की घोषणा ऐतिहासिक होगी।

तसलीमा नसरीन और ये काले दिन

दोनों ओर से धार्मिक सेंसरशिप
गर्गा चटर्जी - 2013-12-28 11:33 UTC
तसलीमा नसरीन ने एक टीवी सीरियल की कथा तैयार की। उस सीरियल का नाम रखा गया दुःसहबास। उसमें तीन बहनों की कहानी है। उनके साथ तरह तरह का व्यवहार समाज द्वारा किया जाता है। इस सीरियल में यह दिखाने की कोशिश की जानी थी कि भारतीय उपमहाद्वीप में महिलाओं की जिंदगी कैसी है और उन्हें किस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

बांग्लादेश में राजनैतिक गतिरोध

चुनाव तक सत्ता में रहना चाहती है शेख हसीना
सरवर जहां चौधरी - 2013-12-14 12:33 UTC
अब यह साफ दिखाई दे रहा है कि सत्तारूढ़ अवामी लीग ने बांग्लादेश में राजनैतिक गणित को गड़बड़ा रखा है। पिछला आम चुनाव 2008 में हुआ था और उसमें अवामी लीग को तीन चैथाई बहुमत मिला था। उस चुनाव के पहले उसने 1971 के युद्ध अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और उन्हें सजा दिलाने का वादा किया था। तीन चैथाई बहुमत पाने के मुख्य कारणों में एक अवामी लीग का यह वायदा भी था। लेकिन उन युद्ध अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और सजा दिलाने का काम समय पर नहीं किया गया।
विश्व व्यापार संगठन का बाली सम्मेलन

भारत के लिए खाद्य सब्सिडी का मसला अहम

एस सेतुरमन - 2013-12-05 06:47 UTC
बाली में चल रहे विश्व व्यापार संगठन के मंत्री स्तरीय बैठक में खाद्य सब्सिडी के मसले पर भी चर्चा हो रही है। भारत के लिए यह मसला अहम है, क्योंकि इसने एक खाद्य सुरक्षा कानून पास किया है, जिसके तहत किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य उपलब्ध कराना है और उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराना है।

भारत को ईरान में नये अवसर

परमाणु व्यापार की संभावना भारत को तलाशनी चाहिए
नित्य चक्रबर्ती - 2013-12-03 11:08 UTC
पिछले महीने जिनीवा में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। वह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रमों से संबंधित था। उस समझौते ने भारत को ईरान के साथ अपने आर्थिक संबंधों को नया आयाम प्रदान करने का एक सुनहरा मौका दिया है। भारत को ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए इस माके का लाभ उठाना चाहिए। सबसे पहले तो उसे इस बात की समीक्षा करनी चाहिए कि व्यपार के किन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना है और कौन से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपने संबंध बेहतर कर सकता है।

केनेडी की 50वीं पुण्यतिथि: भारत से प्रेम और नेहरु से दोस्ती

कल्याणी शंकर - 2013-11-29 10:19 UTC
जब 22 नवंबर, 1963 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी की हत्या हुई तो पूरी दुनिया की तरह भारत भी स्तब्ध रहा गया था। कुछ दिन पहले उनकी 50वीं पुण्यतिथि मनाई गई है। ऐसे अनेक लोग हैं, जो यह मानते हैं कि यदि केनेडी जिंदा होते, तो भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते और भी अच्छे होते। इसकी दिशा भी कुछ अलग होती। केनेडी के छोटे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत ही फले और फुले। भारत को खाद्य सहायता मिली। अनेक अमेरिकी सहायता वाले प्रोजेक्ट भारत में शुरू हुए। उनमें तारापुर परमाणु संयत्र, आई आई टी कानपुर और आंध्र प्रदेश की नागार्जुन सागर परियोजना शामिल हैं।

भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी उत्पात कयानी की अंतिम करतूत तो नहीं?

बी के चम - 2013-08-14 18:04 UTC
चंडीगढ़ः सीमा पर पाक सैनिको द्वारा भारतीय जवानों पर हमले, घुसपैठ की घटनाओं में वृद्धि और जम्मू और कश्मीर के अंदर सेना और पुलिस जवानों पर बढ़ हमले तीन सवाल खड़ कर रहे हैं। पहला सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की सेना ने जम्मू और कश्मीर के मसले पर एक बार फिर अपने आपको उन्मादी बना लिया है? दूसरा क्या पाकिस्तान स्थित भारत विरोधी आतंकी समूहों ने अपनी रणनीति बदल ली है? और तीसरा क्या पाकिस्तान की सेना के साथ नवाज शरीफ का समीकरण बदल गया है?

पाकिस्तानी मर्ज का आखिर इलाज क्या है?

इसका स्थाई हल ढूंढ़ना ही होगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-13 03:47 UTC
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। आने वाले समय में वह अपनी भारत नीति में कोई बदलाव लाएगा, इसकी भी कोई संभावना नहीं दिखाई पड़ रही है। वहां सरकार सेना की हो या लोकतांत्रिक, लोकतांत्रिक सरकार भी चाहे जिसकी हो, सबकी भारत नीति एक समान रही है। वह नीति नफरत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य है भारत के खिलाफ एक अघोषित युद्ध को जारी रखना। पाकिस्तान राष्ट्र को कुछ लोगों द्वारा अस्वीकार कर दिए जाने के कारण ही अस्तित्व में आया था। आज भी पाकिस्तान अपने अस्तित्व का अहसास भारत विरोध में ही करता है, मानों उसने भारत विरोध करना बंद किया नहीं कि उसका वजूद ही समाप्त हो जाएगा।
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