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भारत को ईरान में नये अवसर

परमाणु व्यापार की संभावना भारत को तलाशनी चाहिए
नित्य चक्रबर्ती - 2013-12-03 11:08 UTC
पिछले महीने जिनीवा में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। वह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रमों से संबंधित था। उस समझौते ने भारत को ईरान के साथ अपने आर्थिक संबंधों को नया आयाम प्रदान करने का एक सुनहरा मौका दिया है। भारत को ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए इस माके का लाभ उठाना चाहिए। सबसे पहले तो उसे इस बात की समीक्षा करनी चाहिए कि व्यपार के किन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना है और कौन से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत अपने संबंध बेहतर कर सकता है।

संसद को चलने दिया जाना चाहिए

बाधा डालने वाले सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो
हरिहर स्वरूप - 2013-12-02 10:36 UTC
संसद का आगामी शीत सत्र 5 दिसंबर से शुरू हो रहा है। संसद का कोई भी सत्र अबतक इतना छोटा नहीं रहा है, जितना छोटा इसे रखा गया है। यह महज दो सप्ताह तक ही चलेगा। आमतौर पर संसद का मानसून और शीत सत्र पूरे एक महीने का होता है। इस बार छोटा सत्र बुलाने का कोई साफ कारण नहीं बताया गया है। एक कारण शायद यह हो सकता है कि संसद के सत्र पिछले सालों से बार बार बर्बाद किए जा रहे हैं। उनमें काम ढंग से नहीं हो पाते और बार बार संसद स्थगन का शिकार हो जाती है। इसीलिए लगता है कि सरकार ने इस बार छोटा सत्र बुलाया है, ताकि पैसों की फालतू में बरबादी नहीं हो सके।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में 'आप‘ फैक्टर

केजरीवाल से क्यों डरे हुए हैं भाजपा नेता
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-11-30 10:18 UTC
जब अन्ना का आंदोलन चल रहा था और वे अनशन पर बैठे थे, जब उनके विरोधी खासकर राजनैतिक दलों से जुडे लोग कह रहे थे कि इस तरह का आंदोलन गलत है और यदि उन्हें लगता है कि किसी तरह का नया कानून बनना चाहिए और सरकार उसे नहीं बना रही है, तो उन्हें खुद पार्टी बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए और चुनाव जीतकर वे कानून बनाना चाहिए, जिसके लिए वह अनशन पर बैठे हैं। गांधी जी अनशन के हथियार का इस्तेमाल खूब किया करते थे। कहा गया कि गांधीजी के समय देश गुलाम था और लोकतंत्र व चुनाव का विकल्प उनके पास नहीं था, इसलिए उनका अनशन करना जायज है, पर आजादी के बाद गांधी के उस हथियार के इस्तेमाल की जरूरत नहीं रही।

केनेडी की 50वीं पुण्यतिथि: भारत से प्रेम और नेहरु से दोस्ती

कल्याणी शंकर - 2013-11-29 10:19 UTC
जब 22 नवंबर, 1963 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी की हत्या हुई तो पूरी दुनिया की तरह भारत भी स्तब्ध रहा गया था। कुछ दिन पहले उनकी 50वीं पुण्यतिथि मनाई गई है। ऐसे अनेक लोग हैं, जो यह मानते हैं कि यदि केनेडी जिंदा होते, तो भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते और भी अच्छे होते। इसकी दिशा भी कुछ अलग होती। केनेडी के छोटे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत ही फले और फुले। भारत को खाद्य सहायता मिली। अनेक अमेरिकी सहायता वाले प्रोजेक्ट भारत में शुरू हुए। उनमें तारापुर परमाणु संयत्र, आई आई टी कानपुर और आंध्र प्रदेश की नागार्जुन सागर परियोजना शामिल हैं।

सोलर पैनल घोटाले में नया मोड़, कांग्रेसी नेतागण सांसत में

पी श्रीकुमारन - 2013-11-28 10:34 UTC
तिरुअनंतपुरमः कुख्यात सोलर पैनल घोटाला एक बार फिर कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के नेताओं के दिन का चैन और रातों की नींद हराम कर रहा है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले होंगे

बढ़ते हमले के बीच आम आदमी पार्टी की मजबूती बढ़ रही है
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-11-27 11:32 UTC
नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 4 दिसंबर को होंगे। इस बीच चुनावी गर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस की ओर से आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल पर बढ़ता हमला दिल्ली के लिए एक नया अनुभव है। दिल्ली में अबतक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस का ही बोलबाला रहा है। प्रत्येक चुनाव में दोनों पार्टियां एक दूसरे से उलझती रही हैं और दोनों के बीच आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर चलता रहा है।

क्षेत्रीयतावाद से छुटकारा नहीं

दो राष्ट्रीय पार्टियों का विचार एक मिथ है
गर्गा चटर्जी - 2013-11-26 10:21 UTC
अगर आप उन लोगों में से एक हैं, जो समझते हैं कि दिल्ली और आसपास के शहरों में स्थित न्यूज चैनल भारतीय उपमहाद्वीप की सही तस्वीर पेश करते हैं, तो आप अपने इस विश्वास पर दुबारा विचार करें। इस तरह के चैनल आपको विश्वास दिला रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच हो रहे हैं। वे नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी के बीच चुनावी बाॅक्सिंग दिखाने में व्यस्त हैं। ये दोनों पार्टियां देश की अन्य पार्टियों से इसलिए अलग दिखाई पड़ रही हैं, क्योंकि उन चैनलों की नीतियां और उनके काम करने के तरीके वैसा प्रोजेक्ट करने की कोशिश करते हैं।

क्या कन्नूर देश का एकमात्र भूमिहीन विहीन जिला है?

चांडी सरकार का यह दावा उसके गले की बनी हड्डी
पी श्रीकुमारन - 2013-11-25 10:45 UTC
तिरुअनंतपुरमः ओमेन चांडी की यूडीएफ सरकार व्यावहारिक दृष्टि से विवादों के द्वारा विवादों के लिए और विवादों की सरकार बन कर रह गई है।

खाद्य सुरक्षा कानून का राग अलाप रही है कांग्रेस, कार्यकर्ताओं में नया उत्साह

प्रदीप कपूर - 2013-11-23 09:51 UTC
लखनऊः पिछले दिनों कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा कानून पर अमल न करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयाजित किया। इस विरोध प्रदर्शन में लोगांे की अच्छी भागीदारी थी। उस भागीदारी को देखकर कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश नेताओं में आशा का नव संचार हुआ है और वे नये उत्साह के साथ अब पार्टी के लिए सक्रिय हो गए हैं।

कोर्इ भी पार्टी स्वच्छ चुनाव नहीं चाहती

चुनावों में अपराधियों और धनपशुओं को बोलबाला
कल्याणी शंकर - 2013-11-22 11:08 UTC
चुनावी मौसम ने एक बार फिर इस प्रश्न को रेखांकित किया है कि क्या हमारा राजनैतिक वर्ग स्वच्छ चुनाव चाहता है? इसका जवाब नकारात्मक है। इसका कारण यह है कि अभी भी राजनैतिक पार्टियां इस तथ्य को मानने के लिए तैयार नहीं है कि जनता का विश्वास उनसे हट चुका है और वे व्यवस्था में भी अपना विश्वास खो चुके हैं।