जोशीमठ को बचाने में सर्वोच्च न्यायालय बड़ी भूमिका निभाये
मानव निर्मित आपदा को प्राकृतिक बताने की अनुमति न हो
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2023-01-13 12:18 UTC
जोशीमठ महीनों से धंस रहा है, लेकिन केंद्र और राज्य की सरकारों का ध्यान हाल ही में खींच सका, वह भी तब जब धंसना खतरनाक रूप से सामने आने लगा।वर्ष 1976, 2001 और 2013 में दी गयी चेतावनियों को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया था।मानव लालच ने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन जारी रखा जिसने न केवल जोशीमठ के पवित्र शहर बल्कि पूरे पर्वत श्रृंखला के अन्य शहरों और गांवों के धंसाव को गति दे दी।