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क्या कांग्रेस तेलंगाना की गुत्थी को सुलझा पाएगी?

किरण रेड्डी को संभालना आसान नहीं
कल्याणी शंकर - 2013-11-15 10:58
केन्द्र की यूपीए सरकार आगामी 9 दिसंबर को सोनिया गांधी के जन्म दिन पर तेलंगाना राज्य के गठन का विधेयक संसद में पेश करना चाहती है। सोनिया के निदेश पर कांग्रेस के नेताओं ने राज्य के गठन की प्रक्रिया की तिथियों को तय किया है। 18 नवंबर को तेलंगाना पर बने मंत्रियों का समूह विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप से स्वीकार कर लेगा। उसके बाद उसे मंत्रिमंडल में भेजा जाएगा। उसके बाद 21 नवंबर तक उसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाएगा। उसके बाद राष्ट्रपति उसे आंध्र प्रदेश विधानसभा में भेज सकते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को कहा गया है कि वह अपने प्रदेश की विधानसभा के सत्र को 25 नवंबर को आहूत करें और उसमें इस विधेयक पर विचार विमर्श किया जाय।

घोटालों की खबरों की गिरफ्त में मध्यप्रदेश

मतदान के पहले पार्टियों में छिड़ी है जंग
एल एस हरदेनिया - 2013-11-14 12:05
भोपालः मध्यप्रदेश में उम्मीदवारों के नाम लेने का वक्त समाप्त हो चुका है। अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच असली टक्कर की शुरुआत हो चुकी है। उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी टिकट नहीं मिलने से नाराज लोग कांग्रेस और भाजपा के लिए समस्याएं खड़ी करेंगे, पर वैसा कुछ हो नहीं रहा है। मतदान आगामी 25 नवंबर को होने हैं।

सोनिया एक बार फिर डीएमके के सामने झुकी

चुनाव की चिता पर राजनय की बलि
अमूल्य गांगुली - 2013-11-13 10:36
राष्ट्रमंडल के कोलंबो शिखर सम्मेलन से अलग रहने का मनमोहन सिंह का निर्णय उनका अपना नहीं हो सकता। उन्होंने यह निर्णय सोनिया गांधी के कहने पर ही किया होगा। अन्य अनेक मौके पर भी मनमोहन सिंह ने वही किया है, जो उन्होंने सोनिया गांधी द्वारा करने के लिए कहा गया होगा।

क्या अपराधी सांसदों का टिकट काट पाएंगे मोदी?

सुब्रत मजुमदार - 2013-11-12 10:12
वर्तमान चुनावी माहौल में विकास को गरीबी हटाओ के नारे के ऊपर वरीयता दी जा रही है। नरेन्द्र मोदी को विकास पुरुष के रूप में ही पेश किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उनके नेतृत्व में गुजरात ने काफी विकास किया है। विकास तो मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने भी देश का तेजी से ही किया और अपने पहले कार्यकाल में 8 से 9 फीसदी तक विकास किया, लेकिन उनके विकास की कहानी भ्रष्टाचार में दबकर रह गई है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस को राहुल का भरोसा

प्रियंका गांधी की सभाओं की मांग बढ़ी
प्रदीप कपूर - 2013-11-11 10:58
लखनऊः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने संवाद को बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राहुल फैक्टर का लाभ मिलेगा। श्री सिंह विधायक हैं और वे पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता भी हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार राहुल फैक्टर के कारण उत्तर प्रदेश में लोकसभा की ज्यादा सीटें कांग्रेस को हासिल होंगी।

आपा क्यों खोते हैं बिहार के मुख्यमंत्री?

अपने ही बयान में फंसे नीतीश
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-11-09 11:24
जब जब नरेन्द्र मोदी का चेहरा सामने होता है, बिहार के मुख्यमंत्री अपना आपा खो देते हैं और कुछ ऐसा कर या कह देते हैं, जिससे उनके भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 27 अक्टूबर को पटना में हुई नरेन्द्र मोदी की हुंकार रैली की भारी सफलता के बाद नीतीश पर एक बार फिर नरेन्द्र मोदी का बुखार चढ़ा। रैली का बिहार पर असर होना ही था।

चुनाव पूर्व सर्वेक्षण पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं

कल्याणी शंकर - 2013-11-08 11:05
निर्वाचन आयोग के एक प्रस्ताव पर आजकल गर्मागर्म बहस चल रही है। वह प्रस्ताव चुनाव पूर्व मत सर्वेक्षणों से संबंधित है। निर्वाचन आयोग चाहता है कि चुनाव की तारीखें घोषित किए जाने के बाद चुनाव पूर्व मतदाता सर्वेक्षणों पर रोक लगा दी जानी चाहिए। यह रोक अंतिम मत पड़ जाने तक बरकरार रखी जानी चाहिए। इस समय इस तरह के सर्वेक्षणों के नतीजों के प्रकाशन और प्रसारण पर मतदान के 48 घंटे पहले से रोक लग जाती है।

टिकट वितरण के बाद भाजपा में घमसान

आदिवासी मंत्री देवी सिंह सैयाम ने अपना पद छोड़ा
एल एस हरदेनिया - 2013-11-07 10:40
भोपालः आदिवासी नेता देवी सिंह सैयाम ने मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। इसका कारण उन्हें टिकट से वंचित कर दिया जाना है। टिकट काटे जाने की स्थिति में वे सरकार से ही इस्तीफा दे देंगे, इसकी उम्मीद भाजपा नेताओं को नहीं थी। जाहिर है, उनके इस्तीफे से प्रदेश भाजपा इकाई स्तबध है। भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने का सपना देख रही है। इस सपने के बीच आदिवासी नेता का मंत्री पद से इस्तीफा पार्टी के लिए एक झटका है।

क्या मतदान पूर्व चुनावी सर्वे पर रोक उचित होगा

पर यह मामला गलत समय पर उठाया जा रहा है
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-11-06 11:07
चुनावों के दौरान होने वाले मतदान पूर्व सर्वेक्षण एक बार फिर बहस का विषय बन गया है। पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से इस पर चर्चा होती रही है और इस पर रोक लगाने की मांग भी होती रही है। इस मांग का प्रबल विरोध भी होता रहा है, पर इस बहस को समाप्त करने की कभी कोशिश नहीं की गई। इस पर न तो रोक लगाई गई और न ही इस पर रोक लगाने की मांग को अंतिम रूप से हमारे शासको द्वारा मना कर दिया गया। एक बार फिर इसकी मांग हो रही है और सत्तारूढ़ कांग्रेस इस बार इस पर रोक लगाने की पैरवी कर रही है।

चल नहीं सकती तीसरे मोर्चे की राजनीति

कांग्रेस के बिना धर्मनिरपेक्ष गठबंधन संभव ही नहीं है
हरिहर स्वरूप - 2013-11-05 11:38
क्या कांग्रेस के बिना कोई धर्मनिरपेक्ष गठबंधन हो भी सकता है? हरगिज नहीं। उसी तरह कांग्रेस विरोधी ताकतों का बिना भाजपा को साथ लिया एक होना कोई मायने नहीं रखता। यही कारण है कि पिछले दिनों साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ने के लिए गैर कांग्रेस गैर भाजपा दलों द्वारा मोर्चाबंदी करने की कोशिश एक व्यर्थ की कसरत थी।