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ईरानी तेल का आयात: रुपये में भुगतान का मामला बिगड़ गया

विशेष संवाददाता - 2013-11-04 11:17
नई दिल्लीः भारत और ईरान के बीच राजनैतिक रिश्ते तेहरान में नये राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद बेहतर हुए हैं। इसके बावजूद भारत द्वारा ईरान से कच्चे तेल के आयात के भुगतान की समस्या का कोई अंतिम हल निकल नहीं पा रहा है।

विदेशी तेजडि़ए ने शेयर बाजार को चमकाया

आम निवेशकों को उत्साहित नहीं होना चाहिए
नन्तू बनर्जी - 2013-11-02 09:23
एकाएक शेयर बाजार में तूफान आ गया है। यह बाजार नहीं ऊंचाइयों को छू रहा है। 30 शेयरों को संवेदनशील सूचकांक अपने 5साल की पुरानी ऊंचाई को वापस पा चुका है। यह 21000 के अंक को पार कर गया है। देश के अन्य शेयर बाजारों का भी यही हाल है। क्या इसे दीवाली की आतिशबाजी मानी जाय या धनतेरस का शेयर बाजार में लक्ष्मी आगमन?

राष्ट्रमंडल का कोलंबो शिखर सम्मेलन

क्या बहिष्कार करेंगे मनमोहन सिंह?
कल्याणी शंकर - 2013-11-01 11:26
भारत और श्रीलंका की विदेश नीति के निर्धारण में दोनों देशों की घरेलू विवशताएं निर्णायक भूमिका अदा कर रही हैं। आगामी 15 से 17 नवंबर तक श्रीलंका में राष्ट्रमंडल देशों का शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। यह सम्मेलन भारत और श्रीलंका दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर तो दबाव पड़ रहा है कि वे इस सम्मेलन में जाएं ही नहीं। तमिलनाडु के नेता और दल चाहते हैं कि भारत श्रीलंका में हो रहे इस राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन का बहिष्कार कर दे।

समाजवादी पार्टी की आजमगढ़ रैली

नवंबर में भी होंगी बड़ी सभाएं
प्रदीप कपूर - 2013-10-31 12:25
लखनऊः समाजवादी पार्टी की आजमगढ़ रैली सफल रही। उसकी सफलता ने पार्टी के नेताओ और कार्यकर्ताओं के मनोबल को काफी बढ़ाया है और मुलायम सिंह यादव भी प्रधानमंत्री पद के लिए अपने आपको एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में पेश करने मे सफल हुए हैं।

नीतीश को भारी पड़ रही है मोदी की चुनौती

बगावती हो रहे हैं सिपहसालार
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-10-30 10:39
भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की पटना की हुंकार रैली के बाद बिहार के बदले राजनैतिक माहौल ने नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ तो रैली के दौरान हो हुए बम धमाकों ने उनकी सरकार की क्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए हमलों ने भी उन्हें आहत कर डाला है। मोदी के भाषण से तिलमिलाए नीतीश ने गुजरात के मुख्यमंत्री पर जिस तरह निजी हमले किए हैं, उससे उनकी प्रतिष्ठा नहीं बढ़ी है। मोदी ने उनके ऊपर विश्वासघाती, झूठा और पाखंडी होने का आरोप लगाया था। उन आरोपों को तो वे झुठला नहीं सके, उल्टे उन्होंने मोदी को ही झूठा साबित करने की कोशिश है।

इस्पात निर्माण और खनन में भारत-पोलैंड द्विपक्षीय सहयोग

इस्पात मंत्री की पोलैंड यात्रा
एस एन वर्मा - 2013-10-29 11:04
इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने इस्पात निर्माण एवं कोयला खनन के क्षेत्र में भारत और पोलैंड के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। श्री वर्मा पोलैंड गणराज्य के उप प्रधानमंत्री, अर्थव्यवस्था मंत्री, श्री यानूस पेहोचिंस्कि पेहोचिंस्कि के साथ को वारसाव में मुलाकात की।

केरल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी

क्या वह हिंदू नाराजगी का लाभ उठा पाएगी?
पी श्रीकुमारन - 2013-10-29 10:22
तिरुअनंतपुरमः जैसे जैसे लोकसभा का चुनाव नजदीक आ रहा है केरल भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा है। क्या भारतीय जनता पार्टी का यह आत्मविश्वास ठोस धरातल पर आधारित है? इसे समझने के लिए भारतीय जनता पार्टी की राजनीति पर एक नजर डालनी होगी।

आतंकवाद को बिहार का मुहतोड़ जवाब

धमाकों के बीच रैली का अनूठा कीर्तिमान
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-10-28 10:27
लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनने के सबसे प्रबल दावेदार नरेन्द्र मोदी की पटना रैली की बहुत दिनों से प्रतीक्षा की जा रही थी। इसका कारण है कि उनके प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने का सबसे ज्यादा विरोध और समर्थन बिहार में ही हो रहा था। उनका वह विरोध और समर्थन सियासी स्तर पर हो रहा था। जनता के स्तर पर उनकी क्या लोकप्रियता और किस तरह का विरोध उन्हें देखने को मिलता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई थी। कुछ लोग उम्मीद कर रहे थे कि गोधरा के बाद गुजरात में हुए दंगे का मुद्दा उठाकर कोई समूह उनका पटना में सांकेतिक विरोध बगैरह कर सकता है, लेकिन उनका विरोध हुआ बमों के धमाके से, जो सवा तीन घंटे तक रुक रुक कर होते रहे।

इन्दिरा ने राज्य स्तर पर कांग्रेस को नेतृत्वहीन कर दिया था

क्या राहुल गांधी नेतृत्व खड़ा कर पाएंगे?
हरिहर स्वरूप - 2013-10-28 10:23
काग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सामने राज्य और जिला स्तरों पर पार्टी के नेतृत्व के निर्माण की कठिन चुनाती है। सच तो यह है कि अभी इन स्तरों पर कांग्रेस के संगठन की जो समस्या है, वह इन्दिरा गांधी कीे राजनीति का परिणाम है। उन्होंने कांग्रेस पर अपनी पकड़ को बनाए रखने के लिए राज्य स्तर के कांग्रेसी नेताओं को कमजोर करना शुरू कर दिया था। स्थापित नेताओं को उन्होंने कमजोर तो किया ही था, नये नेताओं को उन्होंने उभरने भी नहीं दिया था। इन्दिरा गांधी ने अपने समय में जो किया था, वह सिलसिला उनके बाद भी जारी रहा। उसका असर यह हुआ कि कांग्रेस धीरे धीरे जमीनी नेताओं से विहीन होती गई। और आज इतना खराब हाल हो गया है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में उसका कोई नेता ही नहीं दिखाई पड़ रहा है। यही हाल बिहार, झारखंड और उड़ीसा में भी है। देश के अन्य अनेक राज्यों में भी स्थ्तिि कोई बेहतर नहीं हैं।

दिल्ली एक बार फिर बन गई है कुरुक्षेत्र

क्या शीला चैथी बार जीत पाएंगी?
कल्याणी शंकर - 2013-10-25 12:05
आगामी 4 दिसंबर को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान है। शीला दीक्षित खुद कांग्रेस की जीत के प्रति बहुत आश्वस्त नहीं है, क्योंकि वह तीन बार से लगातार चुनाव जीत रही हैं और रिकार्ड चैथी बार चुनाव जीतना आसान नहीं होता है।