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क्यों विफल हो गया लाॅकडाउन?

नोटबंदी की गलतियों से मोदीजी को सबक लेनी चाहिए थी
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-05-21 13:34
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित लाॅकडाउन विफल हो गया है और पूरा देश कोरोना की आग में जलने लगा है। उम्मीद की जा रही थी कि लाॅकडाउन कोरोना के चेन को तोड़ देगा और सिर्फ लोगों को घरों में बंद कर देने से ही इस महामारी का संकट टल जाएगा। लोग घरों में बंद भी हुए। देश की आर्थिक गतिविधियों पर लगभग विराम लग गया। करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए। लाखों मजदूरों को खून के आंसू पीनी पड़ा। बेघर मजदूर अपने घरों की ओर पैदल जाने के क्रम में ऐसी त्रासदी का शिकार हुए, जो आजाद भारत के इतिहास में पहले बार हो रहा था। आजाद भारत क्या, देश के ज्ञात इतिहास में कभी ऐसी घटना नहीं घटी होगी कि लाखों लोग पैदल चल रहे थे और उनमें से कई अपनी जान गंवा रहे थे, तो कई पुलिस अत्याचार का सामना कर रहे थे।

तीसरे राहत पैकेज में वास्तव में राहत मिली है

यह भारतीय किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है
अंजन रॉय - 2020-05-20 10:21
पिछले सप्ताह के दौरान वित्त मंत्री द्वारा घोषित किए गए सभी सुधारों में से एक सुधार जिसका स्थायी प्रभाव होने की संभावना है वह होगा कृषि उत्पादों के विपणन के बारे में उनकी घोषणाएं। यह एपीएमसी और कृषि उत्पादों के विपणन को दृष्टिगोचर करता है। यह किसानों को उनके स्थानीय बिचैलियों और मध्यवर्गीय राजनेताओं से मुक्त कर रहा है।

कोरोना संकट से मध्यप्रदेश का बुरा हाल

राज्य से होकर गुजर रहे अन्य राज्यों के मजदूर अलग से दे रहे हैं सिर दर्द
एल एस हरदेनिया - 2020-05-19 10:27
भोपालः मध्य प्रदेश में देश भर से प्रवासी मजदूरों को अपने घरों में वापस जाने का खामियाजा भुगतना पड़ता है। यह अतिरिक्त समस्या राज्य की भौगोलिक स्थिति के कारण हो रही है। प्रवासी मजदूरों को महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दक्षिणी राज्यों से और यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने के लिए मध्य प्रदेश से गुजरना पड़ता है।

केरल में कोरोना संक्रमितों में एकाएक इजाफा

विदेश से आने वालों के कारण हो रही यह वृद्धि
पी श्रीकुमारन - 2020-05-18 10:11
तिरुअनंतपुरमः सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के नेताओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें वापस आ गई हैं। उनकी चिंता का कारण विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी के मद्देनजर कोविद के संक्रमण मामलों में अचानक आई बढ़ोतरी है।

महामारी से आहत लोगों के साथ कर्ज के पैकेज का छल

लोकतंत्र के मंत्र के साथ अलोकतांत्रिक इरादों पर अमल करना सरकार का मूल मंत्र
अनिल जैन - 2020-05-16 10:06
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मान लिया है और बता भी दिया है कि कोरोना महामारी का स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर मुकाबला करने के लिए उनकी सरकार जितना कर सकती थी, वह कर चुकी है। अब इससे ज्यादा की अपेक्षा सरकार से न रखी जाए। आर्थिक पैकेज का एलान करने के लिए राष्ट्र से मुखातिब हुए प्रधानमंत्री का पूरा जोर ‘आत्मनिर्भरता’ पर रहा। यही वजह रही कि उनके पूरे भाषण में न तो ‘अस्पताल’ शब्द का जिक्र आया, न ‘इलाज’ शब्द का और न ही कोरोना वारियर्स अर्थात डॉक्टर, नर्स और अन्य लोगों का।

मोदी पैकेज जमीनी स्तर पर निरर्थक

दिवालिया हो चुके परिवारों को अभी और आत्मनिर्भर भारत का इंतजार करना होगा
ज्ञान पाठक - 2020-05-15 09:41
डर और असुरक्षा, निराशा और अनिश्चितता की भावना के साथ भारत धीरे-धीरे खुल रहा है। 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज मिला है, जो खाली है। जिन चीजों की हमें सबसे ज्यादा जरूरत है, वे पैकेज में नहीं हैं। यहां तक कि वर्तमान पैकेज का वास्तविक मूल्य केवल 13 लाख करोड़ रुपये है। इसकी कीमत को बड़ा दिखाने के लिए हमने पहले के पैकेजों को जोड़ दिया है जो पहले ही हमारे लोगों, हमारी अर्थव्यवस्था को विफल कर चुके हैं। लॉकडाउन के तीन चरण 17 मई 2020 को समाप्त हो जाएंगे। 18 मई से चौथा चरण शुरू हो जाएगा।

कोरोना वायरस ने ‘अन्य भारत’ के अस्तित्व को दिखाया

क्या मोदी का तोहफा वहां तक पहुंच पाएगा?
के रवीन्द्रन - 2020-05-14 09:37
कोविद -19 महामारी ने ‘अन्य भारत’ के अस्तित्व को प्रकट किया है, जो हमेशा अस्तित्व में रहा है, लेकिन अदृश्य बना रहा। ‘अन्य भारत’ में लाखों प्रवासी श्रमिक शामिल हैं, जो या तो उन शहरों या गांवों से संबंधित नहीं हैं, जहां से वे लंबे समय से उखड़े हुए थे। वे राजनेताओं, नीति नियोजकों और नौकरशाही के राडार पर नहीं दिखते हैं, ये सभी ज्यादातर अपने और अपने लोगों के वर्ग के साथ रहते हैं।

प्रधानमंत्री अब फिर पुरानी नीतियों की शरण में

विदेश नीति में भी बदलाव करना होगा
अंजन रॉय - 2020-05-13 09:46
राष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री के संबोधन ने कोरोना वायरस महामारी के अनुभव और संभवतः वैश्विक अर्थव्यवस्था के आकार के संदर्भ में भारत के आर्थिक मॉडल को पूरी तरह से पुराने रूप में ले जाने की योजना तैयार की है।

कोरोना संकट और प्रवासी मजदूर

सरकारों का क्रूर चेहरा सामने आ रहा है
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-05-12 11:15
प्रवासी मजदूरों के साथ कोरोना संकट के दौर में जो व्यवहार किया जा रहा है, वह अत्यंत ही शर्मनाक है। अभी भी जहां तहां वे सड़कों पर चलते दिखाई पड़ रहे हैं और पुलिस का निशाना बन रहे हैं। कुछ दिन पहले ही 16 प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र में एक मालगाड़ी से कटकर मर गए। सरकार के अनुसार वे पटरी पर सोए हुए थे और मालगाड़ी काटते हुए उनके ऊपर से गुजर गई। वह दृश्य बेहद ही भयानक था। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने दुखों से आजीज आकर आत्महत्या कर ली, क्योंकि कोई रेल की पटरी पर क्यो सोएगा?

अगर सरकार नहीं चेती तो छोटी-बडी गैस त्रासदियां होती रहेंगी

एक दिन में हुए चार औद्योगिक हादसों से हमें सबक लेनी चाहिए
अनिल जैन - 2020-05-11 09:35
आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम, तमिलनाडु में कुड्डालोर, महाराष्ट्र में नासिक और छत्तीसगढ में रायगढ़। ये उन जगहों के नाम हैं जहां 7 मई को हुए अलग-अलग भीषण औद्योगिक हादसों में कई लोग हताहत हुए हैं।