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अगर सरकार नहीं चेती तो छोटी-बडी गैस त्रासदियां होती रहेंगी

एक दिन में हुए चार औद्योगिक हादसों से हमें सबक लेनी चाहिए
अनिल जैन - 2020-05-11 09:35
आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम, तमिलनाडु में कुड्डालोर, महाराष्ट्र में नासिक और छत्तीसगढ में रायगढ़। ये उन जगहों के नाम हैं जहां 7 मई को हुए अलग-अलग भीषण औद्योगिक हादसों में कई लोग हताहत हुए हैं।

घातक साबित होगा मजदूरों के साथ किया जा रहा अनुचित व्यवहार

मजदूर हमारे राष्ट्रनिर्माता हैं इसका ध्यान रखें
सी श्रीकुमार - 2020-05-09 09:57
विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी श्रमिक अब अपने गृह शहरों में जाने लगे हैं। घर लौटते समय ऐसे एक प्रवासी श्रमिक ने बताया कि वह खाली हाथ है। मुझे अपनी पांच साल की बेटी के लिए एक गुड़िया खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं, मेरे बेटे और पत्नी के लिए भी और मेरे माता-पिता के लिए भी जो उत्सुकता से मेरा इंतजार कर रहे हैं। यह सभी प्रवासी श्रमिकों की कहानी है।

महाराष्ट्र में संकट टला लेकिन सवाल अब भी शेष हैं

आखिर मंत्रिमंडल की सिफारिश क्यों ठुकराई गई?
अनिल जैन - 2020-05-08 07:30
महाराष्ट्र में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के रवैये से जो राजनीतिक संकट खडा होता दिख रहा था, वह अब टल गया है। अब वहां मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान मंडल का सदस्य बनने के लिए मनोनयन के जरिए विधान परिषद में जाने की जरुरत नहीं पडेगी। चुनाव आयोग ने अब वहां राज्य विधान परिषद की नौ रिक्त सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 21 मई को कराने का एलान कर दिया है। इन चुनावों के जरिए मुख्यमंत्री ठाकरे के विधान परिषद का सदस्य बनने का रास्ता साफ हो गया है। अब वे इस उच्च सदन के लिए निर्वाचित होकर छह महीने की निर्धारित समय सीमा में विधान मंडल का सदस्य बनने की संवैधानिक शर्त पूरी कर सकेंगे।

लाॅकडाउन की विफलता और उसके बाद

मोदी के पास अब सीमित विकल्प
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-05-06 13:19
भारत में लाॅकडाउन का यह तीसरा दौर चल रहा है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 मार्च को पहले दौर की घोषणा की थी, तो देश ने उसका भारी स्वागत किया था। स्वागत इस तथ्य के बावजूद किया था कि लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर जहां तहां अटक गए थे और लाॅकडाउन के दौरान उनका क्या होगा, इस पर कोई विचार मोदी सरकार ने नहीं किया था। उन्हें मोदीजी ने राम भरोसे छोड़ दिया था। उनका क्या हुआ, यह तो अलग बात है, लेकिन लाॅकडाउन से जो उम्मीद मोदीजी और पूरे देश ने की थी, वह पूरी नहीं हुई। उम्मीद थी कि लाॅकडाउन की समाप्ति के दिन आते आते स्थितियां बेहतर होती जाएंगी। कोरोना वायरस का प्रसार रुक जाएगा और इस बीच उस वायरस से इलाज का ढांचा भी तैयार हो जाएगा। यदि ऐसा हो पाता, तो फिर लाॅकडाउन समाप्त कर दिया जाता।

मोदी के भारत में मीडिया पर पड़ रहा है भारी दबाव

पत्रकारों के खिलाफ हिंसा भी बढ़ रही है
विधि ठाकर और प्रस्तुत दालवी - 2020-05-05 09:43
3 मई, 2020, 27 वें विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के उत्सव का दिन था। यह यूनेस्को के आम सम्मेलन की सिफारिश के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित किया गया था।

भारत विदेशी निवेश आकर्षित करने को तत्पर

पर विदेशी निवेश तभी आएगा, जब देशी मांग बढ़े
अंजन रॉय - 2020-05-04 09:31
मार्च 2020 में कुल औद्योगिक उत्पादन में 40 प्रतिशत की कमी आई है, जो घटकर 6.5 प्रतिशत रह गई है। यह गिरावट देशव्यापी तालाबंदी लागू होने से पहले की है और बड़ी है, लेकिन इन आंकड़ों से पता चलता है कि वास्तव में क्या उम्मीद की जानी चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र की एकमात्र सिल्वर लाइनिंग यह थी कि मार्च में कोयला उत्पादन में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालांकि चालू वर्ष के दौरान संचयी उत्पादन में मामूली गिरावट आई थी। कच्चे तेल के उत्पादन में 5.5 प्रतिशत की कमी आई, जबकि प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 15 प्रतिशत की गिरावट आई।

मिलकर करना होगा कोरोना का मुकाबला

हमें अतीत से सीखना होगा
एल. एस. हरदेनिया - 2020-05-02 09:51
जब दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देश मिलकर हिटलर और मुसोलिनी का मुकाबला कर रहे थे उस दौरान इन सभी देशों ने जबरदस्त आंतरिक एकता दिखाई। न सिर्फ इन देशों वरन् उन्होंने दुनिया के पहले साम्यवादी देश सोवियत संघ से अपने तमाम मतभेदों को भुला दिया था और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टल चर्चिल, अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट और सोवियत संघ के सर्वोच्च शासक मार्शल स्टालिन ने मिलकर संयुक्त मोर्चा बनाया। इसके चलते हिटलर, मुसोलिनी और जापान को हार माननी पड़ी।

लाॅकडाउन ने कुछ हद तक हमें कोरोना से बचाया

पर वास्तविक चुनौती लाॅकडाउन समाप्ति के बाद आएगी
के रवीन्द्रन - 2020-05-01 11:21
मोदी के लिए तालाबंदी की घोषणा करना आसान था। यह लगभग एक पल के फैसले के रूप में आया, मोदी ने बार-बार इस बात को दुहराया कि जब 130 करोड़ भारतीयों को लॉकडाउन की सफलता सुनिश्चित करनी चाहिए, क्योंकि कोरोना महामारी से बचाव के लिए इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उन्होंने जनता को बताया कि खतरा बहुत ही भयावह है और हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते। महामारी से बचने का एकमात्र उपाय उन्होंने तालाबन्दी को ही बताया और कहा कि लोग अपने घरों से नहीं निकलें। इस तरह देश लाॅकडाउन की दुनिया में प्रवेश कर गया।

कोविद संकट के दौर में पंचायत की भूमिका

पंचायत स्तर पर संस्थागत निर्माण आवश्यक
डॉ मही पाल - 2020-04-30 09:40
कोविद-19 ने महामारी का रूप ले लिया है। इसे युद्ध की तरह लड़ा जा रहा है। संपूर्ण भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था को इसने गंभीर दबाव में डाल दिया है। इसे लेकर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समस्या है। मार्च 2020 के तीसरे सप्ताह में तालाबंदी के अचानक लागू होने से हजारों कैजुअल वर्करों को अपने गांवों की ओर मार्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई कामगारों की उनके गाँव जाने के रास्ते में मौत हो गई है। उन्होंने अपने घरों के लिए शहरों को छोड़ने का फैसला क्यों किया, इसके बावजूद कि कोई परिवहन नहीं है और गाँव अक्सर सैकड़ों, यहाँ तक कि हजार किलोमीटर दूर है?

प्रेस की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि आप सांप्रदायिकता फैलाएं

अर्नब गोस्वामी के प्रोग्राम संविधान के मूल्यों को चुनौती देने वाले हैं
बरुन दास गुप्ता - 2020-04-29 08:56
जब पूरे देश में कोरोना वायरस के कारण पूर्ण तालाबंदी थी, तो महाराष्ट्र के पालघर जिले के गडचिंचल गांव में कुछ ऐसा हुआ कि जल्द ही हिंदुत्ववादियों के लिए वह एक मुद्दा बन गया। इसने कांग्रेस और भाजपा के बीच एक प्रथम श्रेणी की राजनीतिक लड़ाई का बिगुल फूंका। 16 अप्रैल को, उनके चालक के साथ दो हिंदू साधुओं को एक माॅब द्वारा मार दिया गया था। यह उस अफवाह के द्वारा बनाए गए माहौल की अगली कड़ी थी जो इलाके में चोर सक्रिय हैं। साधुओं और उनके ड्राइवर को चोर समझ कर मार दिया गया। जब पुलिस वाले घटनास्थल पर पहुंचे, तो गुस्साई भीड़ ने उन पर हमला किया और उनके साथ मारपीट की। चार पुलिसकर्मी और एक पुलिस अधिकारी घायल हो गए।