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22 जनवरी को एक ऐतिहासिक दिवस बनाया जा सकता है

परमाणु खतरों से ही नहीं, दुनिया परमाणु हथियारों से भी मुक्त की जा सकती है
डॉ अरुण मित्रा - 2021-01-20 09:41 UTC
22 जनवरी 2021 को परमाणु हथियार निषेध संधि (टीपीएनडब्ल्यू) लागू होगा। इसके साथ परमाणु हथियारों को अवैध घोषित कर दिया जाएगा और वे गैरकानूनी हो जाएंगे। उनका उपयोग, प्रक्षेपण, अनुसंधान, किसी भी रूप में प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण अवैध होगा। यह मानव इतिहास में एक महान कदम है और परमाणु हथियारों को खत्म करने और मानव जाति को विलुप्त होने से बचाने का एक वास्तविक अवसर है। यह इसलिए और भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया के कई हिस्से अब निम्न स्तर के संघर्षों में लिप्त हैं और दुनिया के कुछ हिस्सों में बड़ी शक्तियों के नरम हस्तक्षेप के साथ पूर्ण पैमाने पर युद्ध की संभावना बन रही है। संघर्ष में कोई भी वृद्धि परमाणु हथियारों के उपयोग की स्थिति पैदा कर सकती है।

26 जनवरी का ट्रैक्टर मार्च

सरकार को इस समस्या का हल निकालना है, सुप्रीम कोर्ट को नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-01-19 09:37 UTC
उधर किसान अड़े हुए हैं कि तीनों काले कानूनों को वापस करवाए बिना वे अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। इधर केन्द्र सरकार कह रही है कि वह उन कानूनों को समाप्त नहीं करेगी और किसान अपनी जिद छोड़ दें व समाधान को कोई रास्ता अपनाएं। लेकिन किसान टस से मस होने को तैयार नहीं। उनके आंदोलन को देश व्यापी समर्थन मिल रहा है और लगभग सभी राज्यों में उनके पक्ष में समर्थन में जुलूस और प्रदर्शन निकाले जा रहे हैं। अभी गनीमत है कि कोरोना संकट के कारण रेलें नियमित रूप से नहीं चल पा रही हैं, इसलिए देश के अन्य हिस्सों से किसान दिल्ली कूच नहीं कर पा रहे हैं। फिलहाल, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान ही दिल्ली की सीमा पर डटे हुए हैं, क्योंकि वे दिल्ली के काफी निकट हैं और उन्हें यहां आने के लिए ट्रेन की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

भारत का शेयर बाजार बूम

गुब्बारे को फटना ही है
नंतू बनर्जी - 2021-01-18 10:18 UTC
पिछले चार वर्षों में भारत के शेयर बाजार में तेजड़ियों की आंधी ने इस मिथक को तोड़़ दिया है कि शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का एक बैरोमीटर है। पिछले चार वर्षों में अपने स्टॉक सूचकांकों की गति के साथ भारत की आर्थिक विकास की प्रवृत्ति का लिंक यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि भारत की वास्तविक अर्थव्यवस्था का उसके शेयर बाजार के साथ बहुत कम संबंध है। 2017-18 में, जब देश की जीडीपी वृद्धि आधिकारिक तौर पर 7.2 प्रतिशत थी, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) संवेदनशील सूचकांक (सेंसेक्स) 36,443.98 के ऊच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद, एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 2018-19 में 38,989.65 के उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह 13 जनवरी 2021 को 49,795.19 था।

मोदी ने टीकाकरण अभियान में एक गलती कर दी

पहला टीका उन्हें ही लेना चाहिए था
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-01-16 08:54 UTC
भारत में भी कोराना वायरस के खिलाफ टीकाकरण का अभियान शुरू हो गया। अनेक देशों में यह पहले ही चल रहा था। सबसे पहले शुरुआत रूस में ही हो गई थी, जब पिछले साल अगस्त महीने में स्पुतनिक वी वैक्सिन को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों ने खुद वह टीका लगवाया था। चूंकि उस टीका का परीक्षण 60 साल से कम उम्र के लोगों पर ही किया गया था, इसलिए 60 साल से ऊपर की उम्र वाले प्रधानमंत्री पुतिन खुद यह टीका नहीं ले सकते थे, लेकिन रूस और दुनिया के लोगों का उस वैक्सिन में विश्वास पैदा करने के लिए पुतिन ने अपनी बेटी को वह टीका दिलवाया।

केरल में यूडीएफ के सामने पहचान का संकट

कांग्रेस की गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही
पी श्रीकुमारन - 2021-01-15 09:37 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में पूरी तरह से लोकतांत्रिक मोर्चा पहचान संकट का सामना कर रहा है। स्थानीय निकायों के चुनावों में उसे हाल ही में हार मिली और उस हार के बाद उसकी किस्मत त्रिशंकु की तरह आसमान में झूल रहा है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे।

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रियंका ने कसी कमर

वह अनेक मुद्दों पर योगी सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रही है
प्रदीप कपूर - 2021-01-14 09:37 UTC
लखनऊः श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी योगी आदित्यनाथ सरकार पर बेरोजगारी, कुपोषण और महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दों पर संघर्ष कर रही है।

कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

समस्या का समाधान सुप्रीम कोर्ट के पास शायद है ही नहीं
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-01-13 09:57 UTC
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी सक्रियता दिखाई है। उसने दो फैसले किए। पहले फैसले में उसने तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगा दी। दूसरा फैसला करते हुए उसे एक चार सदस्यीय समीति का गठन कर डाला, जिसे किसानों से बात करके दो महीने के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उसका पहला फैसला तो सही है, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। और जब तक मामला विचाराधीन हो, तबतक के लिए सुप्रीम कोर्ट कानून पर रोक लगा सकता है। पहले भी सरकारी निर्णयों और कानूनों पर इस तरह की रोक लगती रही है। लेकिन अपने दूसरे फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जो किया वह गलत है।

असम में भाजपा आरामदेह स्थिति में

गठबंधन में कांग्रेस को बेलने पड़ेंगे पापड़
सागरनील सिन्हा - 2021-01-12 09:35 UTC
असम, जनसंख्या के मामले में सभी पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे बड़ा है। राजनीतिक गतिविधियां लगभग अंतिम चरण में हैं - क्योंकि राज्य में चुनाव केवल तीन महीने दूर हैं।

केरल सरकार बहुत पहले से किसानों को संरक्षण दे रही है

बीजेपी, आरएसएस ने उनके हितों को कॉर्पोरेट घरानों को बेच दिया है
बिनॉय विश्वम - 2021-01-11 16:59 UTC
जैसा कि उम्मीद की जा रही थी, किसान यूनियनों और नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों के बीच आठवें दौर की वार्ता 8 जनवरी को विफल रही। घरेलू कॉरपोरेट्स और एफडीआई के अधीन कोई सरकार उसी तरह से काम कर सकती है जिस तरह से भाजपा सरकार ने की है। ‘सबका साथ’ के खोखले नारे के तहत, सरकार भारतीय कृषि में ‘अडानी-अंबानी राज’ के लिए जमीन तैयार करने का इरादा रखती है। ये स्वदेशीवादी हमारे कृषि क्षेत्र में मोनसेंटो और कारगिल के लिए लाल कालीन बिछाने के लिए उत्सुक हैं।

भागवत की नजर में हिन्दू देश विरोधी नहीं हो सकता

आखिर देश विरोध है क्या?
अनिल जैन - 2021-01-09 11:07 UTC
आरएसएस के मुखिया मोहन राव भागवत ने फरमाया है कि अगर कोई हिंदू है तो वह देशभक्त ही होगा, क्योंकि देशभक्ति उसके बुनियादी चरित्र और संस्कार का अभिन्न हिस्सा है। यह बात उन्होंने महात्मा गांधी को हिंदू राष्ट्रवादी बताने वाली एक किताब ‘मेकिंग ऑफ ए हिंदू पैट्रियटः बैक ग्राउंड ऑफ गांधीजी हिंद स्वराज’ का विमोचन करते हुए कही। किताब के नाम और मोहन भागवत के हाथों उसके विमोचन किए जाने से ही स्पष्ट है कि यह महात्मा गांधी को अपने हिसाब से परिभाषित करने की कोशिश है।