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आखिरकार बदल ही गई परोक्ष कर व्यवस्था

जीएसटी राज का एक साल
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-07-04 14:32 UTC
वस्तु सेवा कर (जीएसटी) का एक साल पूरा हो गया है और यह इसकी समीक्षा करने का सही वक्त है। यह भारत के इतिहास का सबसे व्यापक कर सुधार था और इसकी पूरी संभावना थी कि इसके कारण व्यापार और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है और उसके कारण उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो सकती है। नई कर व्यवस्था से महंगाई घटेगी या बढ़ेगी, इसे लेकर भी दो मत थे और इस पर भी विवाद था कि इसके राजनैतिक नतीजे क्या होंगे। चूंकि इसके कारण होने वाली शुरुआती परेशानियों से सरकार की लोकप्रियता ही घटती, इसलिए इसके राजनैतिक नतीजे का आकलन सत्तारूढ़ पार्टी की चुनावी हार-जीत से ही की जा सकती है।

कश्मीरः वही पुराना तरीका

इसे सिर्फ भूगोल का हिस्सा समझना गलत है
अनिल सिन्हा - 2018-07-03 09:28 UTC
मोदी सरकार के ताजा फैसले बताते हैं कि सरकार यह मान कर चल रही है कि कश्मीर की समस्या के हल का कोई रास्ता तुरंत खुलने वाला नहीं है। इसका मतलब यही है कि समस्या से जुड़े पक्षों-हुर्रियत, राजनीतिक दल और पाकिस्तान- से कोई बातचीत नहीं होगी, कम से कम 2019 के लोक सभा चुनावों तक। यह भी तय है कि सत्ताधारी पार्टी इसे एक चुनावी मुद्दा बनाएगी।

फिर जोर मार रही है पवार की महत्वाकांक्षा

अधूरी हसरतों को पूरा करने के लिए आखिरी मौका
अनिल जैन - 2018-07-02 09:15 UTC
आगामी लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी एकता के सवाल पर तमाम क्षेत्रीय दलों के बीच जारी पैंतरेबाजी के क्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सुपीमो शरद पवार ने नया पत्ता फेंका है। इसी महीने की शुरुआत में भाजपा के खिलाफ एक व्यापक विपक्षी गठबंधन बनाने की जरूरत पर जोर देने तथा उसके लिए सूत्रधार का किरदार निभाने के लिए खुद को प्रस्तुत करने वाले इस मराठा सरदार ने अब आश्यर्यजनक रूप से चुनाव से पहले विपक्षी एकता की व्यावहारिकता पर सवाल खडा कर दिया है। उन्होंने अपने इस रुख को शीर्षासन कराते हुए कहा है- "विपक्षी एकता को लेकर मीडिया में काफी अटकलें चल रही हैं। हमारे कुछ मित्र इस दिशा में कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि चुनाव से पहले यह संभव है।"

नीतीश कुमार मंझधार में

तेजस्वी ने इरादे पर फेरा पानी
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-06-30 09:41 UTC
लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारो को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से बातचीत होने वाली है। लेकिन उसके पहले नीतीश अपने आपको कमजोर पा रहे हैं। कुछ दिन पहले उनकी पार्टी के प्रवक्ता और वे खुद भी कुछ ऐसे तेवर दिखा रहे थे, मानो यदि भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी, तो पता नहीं वह क्या कर देंगे। वे भाजपा नेताओं पर दबाव बना रहे थे और कह रहे थे कि उनके बिना बिहार में भाजपा जीत हासिल कर ही नहीं सकती, जबकि सच यह है कि 2014 में भाजपा उनके बिना चुनाव लड़ रही थी और वे भाजपा के बिना चुनाव लड़ रहे थे। तब भाजपा को 22 सीटें मिली थीं और उनकी पार्टी को सिर्फ 2 सीटें और वे दोनों भी बहुत ही मामूली मतों के अंतर से।

सांस के जरिये मिलती असाध्य बीमारियों की सौगात

खतरे की घंटी है मौसम चक्र का बदलाव
योगेश कुमार गोयल - 2018-06-29 11:38 UTC
पिछले कुछ समय से देशभर में कुदरत जो कहर बरपा रही है, उसकी अनदेखी उचित नहीं और समय रहते अगर हम नहीं चेते तो आने वाले समय में इसके भयानक दुष्परिणामों के लिए हमें तैयार रहना होगा। पिछले कुछ महीनों के दौरान कहीं प्रचण्ड धूल भरी आंधियां, तो कहीं बेमौसम बर्फबारी, ओलावृष्टि, बादलों का फटना, भारी बारिश और आसमान से गिरती बिजली की वजह से भारी तबाही देखी गई और मौसम विभाग को बार-बार मौसम के बिगड़ते मिजाज को लेकर अलर्ट जारी करने पड़े।

अब नए वेश में आपातकाल

लोकतांत्रिक संस्थाओं, रवायतों और मान्यताओं का क्षरण तेजी से जारी
अनिल जैन - 2018-06-28 13:00 UTC
हर साल की तरह इस बार भी 25 जून को आपातकाल की बरसी मनाई गई। लोकतंत्र की रक्षा की कसमें खाते हुए इस मौके पर 43 बरस पुराने उस सर्वाधिक स्याह और शर्मनाक अध्याय, एक दुःस्वप्न यानी उस मनहूस कालखंड को याद किया गया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता की सलामती के लिए आपातकाल लागू कर समूचे देश को कैदखाने में तब्दील कर दिया था। विपक्षी दलों के तमाम नेता और कार्यकर्ता जेलों में ठूंस दिए गए थे।

आपातकाल और उसके बाद

जब संपूर्ण क्रांति का सपना गुटबंदी की बलि चढ़ गया
एल एस हरदेनिया - 2018-06-27 12:43 UTC
‘‘आप अपने मतभेदों को भुलाएं और मिल-बैठकर समस्याओं को सुलझाएं। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो देश का भारी नुकसान होगा क्योंकि देश रूपी जहाज का संचालन आपके हाथों में है।‘‘

संकट में कुमारस्वामी सरकार

दारोमदार मुख्यमंत्री पर
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-06-26 10:33 UTC
कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, क्योेकि मंत्री बनने से वंचित रह गए अनेक कांग्रेसी नाराज हैं। जिन लोगों को मंत्री बनाया गया है, उनमें से अनेक इसलिए नाखुश हैं क्योंकि उन्हें मनपसंद मंत्रालय नहीं मिले हैं। सच तो यह है कि कुमारस्वामी सरकार के गठन के बाद ही असंतोष की स्थिति पैदा हो गई थी और उसके कारण ही मंत्रिमंडल के विस्तार में जरूरत से ज्यादा अन्य मंत्री सरकार में शामिल हुए थे और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था।

भ्रष्टाचार मुक्त कैसे बने भारत

जो सत्ता में आते हैं, वही भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं
डाॅ. भरत मिश्र प्राची - 2018-06-25 08:54 UTC
देश जब से आजाद हुआ तब से लोकतंत्र की बागडोर सुविधाभोगी लोगों के हाथ आ गई, जहां राष्ट्रहित से स्वहित सर्वोपरि होता गया। दिन पर दिन चुनाव महंगे होते गये। सŸाा पाने के लिये हर तरह के अनैतिक हथकंडे प्रायः सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपनाये जाने लगे। जिससे लोकतंत्र पर माफियाओं का सम्राज्य घीरे - घीरे स्थापित होने लगा । अर्थबल एवं बाहुबल प्रभावित राजनीतिक प्रक्रिया ने भारतीय लोकतंत्र की दशा एवं दिशा ही बदल दी जहां लूटतंत्र का सम्राज्य स्थापित हो गया। पंचायती राज्य से लेकर विधायिका एवं कार्यपालिका तक शामिल सभी अपने - अपने तरीके से देश के माफियाओं के संग मिलकर देश को लुटने लगे, जिससे देश में अनेक प्रकार के घोटालें उजागर हुए ।

गठबंधन को लेकर मायावती की पैंतरेबाजी

नजर प्रधानमंत्री के पद पर
अनिल जैन - 2018-06-23 11:20 UTC
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए छोटी तथा क्षेत्रीय पार्टियों के साथ तालमेल को लेकर कांग्रेस के प्रादेशिक नेतृत्व के आश्वस्ति भरे दावों को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से तगडा झटका मिला है। बसपा ने कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन को लेकर आ रही खबरों को महज अफवाह करार देते हुए कहा है कि बसपा मध्य प्रदेश में अकेले चुनाव लडेगी और सभी सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।