प्रणब की नागपुर यात्रा का राजनीतिक और सामाजिक महत्व
संघ की छवि बनाने की कोशिश
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2018-06-09 10:44 UTC
पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी का आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेना भारतीय राजनीति की एक बड़ी घटना है। इसमें दो बातें साफ दिखाई देती है। एक, आरएसएस आने वाले लोक सभा चुनावों में एक नए तरीके से मैदान में आएगा और दूसरा, राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी के कारपोरेट समर्थक लाबी का सामना करना पड़ेगा। इस घटना पर जानबूझ कर संवाद और सहमति का मुलम्मा चढाया जा रहा है। लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रणब दा कोई भोले राजनेता नहीं है और न ही उनका इतिहास किसी जुझारू नेता का है। वह आपातकाल में संजय गांधी के सहयोगी थे और बाद में कारपोरेट समर्थक आर्थिक नीतियों को लागू करने में आगे रहने वाले नेताओं में से रहे हैं। उनके नागपुर जाने को न तो आम सहमति बनाने के गांधीवादी कदम के रूप में लिया जाना चाहिए और न ही एक गैर-राजनीतिक कदम के रूप में।