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मायावती के लिए ’करो या मरो’ की लड़ाई

क्या दलित-मुस्लिम समीकरण काम कर पाएगा?
अमूल्य गांगुली - 2017-02-16 13:27 UTC
उत्तर प्रदेश चुनाव मायावती के लिए अपने अन्य सारे प्रतिस्पर्धियों से ज्यादा मायने रखता है। विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार हारना उनके भविष्य के लिए बहुत ही घातक हो सकता है। वैसे ही पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को एक भी सीट हासिल नहीं हो सकी थी।

अब मोदी की नजर 2019 के चुनाव पर

पूरे हो रहे हैं हजार दिन
कल्याणी शंकर - 2017-02-15 11:56 UTC
19 फरवरी को मोदी सरकार अपना 1000 दिन पूरा कर लेगी। इसलिए यह समय उसके लिए सिर्फ पीछे देखने का नहीं है, बल्कि आगे देखने का भी है। 1000 दिन की उसकी उपलब्धियां क्या हैं? क्या वह बहुत अको के साथ सफल रही है, जैसा की वह दावा कर रही है या वह पूरी तरह विफल हो गई है, जैसा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष कह रहा है?
उत्तर प्रदेश

दूसरे दौर में मुस्लिम मतदाता ज्यादा महत्वपूर्ण

पहले दौर के मतदान से भाजपा कार्यकत्र्ता मायूस
प्रदीप कपूर - 2017-02-14 16:47 UTC
लखनऊः 15 फरवरी को हो रहा मतदान मुस्लिम कार्ड के नजरिये से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह चुनाव 11 जिलों में हो रहा है, जहां 67 विधानसभा क्षेत्र हैं। यहां अखिलेश यादव और मायावती अपनी उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए हिन्दुओं के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर भरोसा कर रहे हैं।

अगले लोकसभा चुनाव के लिए मोदी का युद्धघोष

लोकसभा के बयान का यही मतलब है
हरिहर स्वरूप - 2017-02-13 17:00 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ले लोकसभा के अपने भाषण में मनमोहन सिंह पर जो हमला किया, वह उत्तर प्रदेश व अन्य पांच राज्यों के लिए चुनावों को ध्यान में रखते हुए नहीं था, बल्कि उसका उद्देश्य 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के अभी से भूमिका तैयार करना था। उसे आप उस चुनाव का युद्धघोष भी कह सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में करो या मरो की लड़ाई

मायावती और मोदी का भविष्य दांव पर
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-02-11 12:24 UTC
उत्तर प्रदेश में पहले चरण का मतदान हो चुका है। इसी के साथ साथ चुनावी नतीजे मतदान मशीनों में बंद होने शुरू हो गए हैं। यह चुनाव अनेक नेताओं के लिए करो या मरो का चुनाव हो गया है। एक नेता तो मुलायम सिंह यादव हैं, जो चुनाव के पहले ही इस संग्राम से बाहर हो गए दिखाई पड़ रहे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी ने उनके नेतृत्व में ही जीता था। लेकिन जीतकर उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया। इस बार चुनाव के पहले वे अपने बेटे से भिड़े दिखाई पड़े और उस संघर्ष में जीत उनके बेटे की हुई और फिर नेताजी मुलायम सिंह यादव की भूमिका अपने बेटे के पीछे पीछे चलने की हो गई है। शायद यह अंतिम विधानसभा है, जिसमें मुलायम कुछ सक्रियता के साथ हिस्सा ले रहे हैं। अब उनकी राजनैतिक सक्रियता अनिश्चय के दौर में पहुंच गई है। कुछ लोग तो उनकी राजनैतिक मौत की बात भी कहने लगे हैं।

उत्तराखंड में मोदी बनाम रावत

कांग्रेस और भाजपा को अंदर से भी मिल रही है चुनौतियां
मृगांक एम भौमिक - 2017-02-10 17:17 UTC
देहरादूनः उत्तराखंड के चुनावी नतीजे क्या होंगे, इसे लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों अभी अंधेरे में हैं। सोशल मीडिया पर भी सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं कि कौन पार्टी आगे रहेगी। या सच भी है, क्योंकि दोनों पार्टी मे से किसी को पता नहीं है कि वह चुनाव जीत ही लेगी। बस दोनों जीत की उम्मीद ही कर रही है।

केन्द्रीय बजट में केरल की एक बार फिर उपेक्षा

केरलवासी एक बार फिर ठगे से हैं
पी श्रीकुमारन - 2017-02-09 10:58 UTC
तिरुअनंतपुरमः अरुण जेटली द्वारा पेश किए गए केन्द्रीय बजट ने एक बार फिर केरल को निराश किया है। पहले भी ऐसा ही होता रहा है, लेकिन इस बार केरल को उम्मीद थी कि इतिहास नहीं दुहराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में हिन्दुत्व के भरोसे भाजपा

क्या यह रणनीति काम कर पाएगी?
उपेन्द्र प्रसाद - 2017-02-08 12:42 UTC
एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राम का आलाप करना शुरू कर दिया है। पिछले 27 वर्षों से जब कभी भी उत्तर प्रदेश में चुनाव होता है, भारतीय जनता पार्टी एकाएक रामभक्ति में डूब जाती है। 2014 का लोकसभा चुनाव एक अपवाद था। उसमें भी हल्के स्वर में राममंदिर की थोड़ी बहुत चर्चा हुई थी, लेकिन वह चुनाव का मुख्य स्वर नहीं बन पाया था। प्रदेश की जातिवादी और सांप्रदायिक अवस्था भाजपा के अनुकूल थी। दंगों के कारण माहौल में सांप्रदायिकता की हवा थी और मुलायम व माया से मोहभंग के कारण ओबीसी समुदाय के लोग अपने आपको नरेन्द्र मोदी को वोट देने के लिए तैयार बैठे थे। लिहाजा भारतीय जनता पार्टी को अभूतपूर्व सफलता मिली और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन के कारण उसे अपने बूते लोकसभा में बहुमत भी हासिल हो गया।

भाजपा ने लिया उग्र हिन्दुत्व का सहारा

ब्राह्मण और दलित वोटों को अपनी ओर खींचने पर जोर
प्रदीप कपूर - 2017-02-07 12:33 UTC
लखनऊः समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच हुए गठबंधन से भारतीय जनता पार्टी सदमे में है। वह मुलायम परिवार के झगड़े का फायदा उठाना चाह रही थी और उसे लग रहा था कि मुस्लिम मतों के विभाजन का भी उसे फायदा होगा। लेकिन उसकी दोनों उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

बजट से विकास और रोजगार नहीं बढ़ेगा

लोन और निवेश में फिर से वृद्धि अनिश्चित
एस सेतुरमन - 2017-02-06 12:31 UTC
नोटबंदी से तबाह देश की अर्थव्यवस्था की हकीकत को ढकने की भरसक कोशिश वित्तमंत्री ने अपने बजट में की है। लेकिन इसके कारण निजी निवेश में वृद्धि की शायद ही कोई गुंजायश है। इसके कारण रोजगार भी पैदा होने की संभावना नहीं है, जबकि मोदी की सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में प्रवेश कर रही है।