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भारत: केरल

चांडी सरकार का भविष्य अनिश्चित

गुस्से में हैं के एम मणि
पी श्रीकुमारन - 2015-11-14 17:32 UTC
तिरुअनंतपुरमः कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के नेता अब इस बात को लेकर राहत की सांस ले रहे हैं कि के एक मणि ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन पर एक साल से इस्तीफे का दबाव पड़ रहा था। उन पर बार मालिकों के संगठन ने घूसखोरी का आरोप लगाया था और उससे संबंधित मुकदमे का सामना भी वे कर रहे हैं। इसके बावजूद मणि अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर रहे थे।

बिहार के चुनावी नतीजों ने कांग्रेस में जान फूंकी

राहुल को आगे आकर पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2015-11-13 17:48 UTC
बैठे बैठाए कांग्रेस को बिहार विधानसभा चुनाव में 27 सीटें मिल गईं। इसके बाद कांग्रेस के अंदर उन्हें अध्यक्ष का पद दिए जाने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। बिहार में कांग्रेस को भी उम्मीद नहीं थी कि उसे इतनी सारी सीटों पर जीत हासिल होगी। 1990 के चुनाव के बाद बिहार में कांग्रेस को उतनी सारी सीटें कभी नहीं मिली थीं। 1995 में उसे वहां 29 सीटें जरूर मिली थीं, लेकिन उनमें वर्तमान झारखंड में मिली सीटें भी शामिल थीं। यदि उन सीटों को निकाल दिया जाय, तो 1995 में उसे वर्तमान बिहार से 27 से भी कम सीटें मिली थीं।

जाम में फंसी मोदी सरकार

विकास का विजन पर कार्रवाई नहीं
नन्तू बनर्जी - 2015-11-12 15:56 UTC
उपेक्षित लोगों को विकास के दायरे में लाना अच्छी बात है। भारत को साफ रखना भी अच्छी बात है। गंगा की सफाई भी स्वागत योग्य है। बेटियों को बचाना और उन्हें पढ़ाना भी जरूरी है। मेक इन इंडिया का विचार भी अच्छा है। गरीबी मिटाने की मंशा भी अच्छी है। यह सब अच्छी बातें हैं। केन्द्र सरकार ने बिहार और अन्य राज्यों के लिए भारी पैमाने पर धन उपलब्ध करने की प्रतिबद्धता दिखाई है। यह भी अच्छा है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और जम्मू और कश्मीर को वास्तव में धन की जरूरत है। पश्चिम बंगाल को भी धन चाहिए। केन्द्र सरकार ने उसके लिए भी 16 हजार करोड़ रुपये की सहायता की प्रतिबद्धता जाहिर की है।

पूर्वोत्तर क्षेत्रीय रेल फंड के निर्माण में अडंगा

एम वाई सिद्दीकी - 2015-11-10 16:34 UTC
पूर्वोत्तर क्षेत्रीय लैप्स नहीं होने वाले रेल फंड के निर्माण में अड़ंगा लग गया है जबकि आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इसे पारित कर दिया है और रेल बजट 2014-15 में शामिल कर लिया गया है। वित्तीय साल का आधा समय बीत जाने के बाद इसका हाल वही है जहां पहले था आज भी वहीं का वहीं पड़ा हुआ है। पूर्वोत्तर क्षेत्रीय रेल फंड का 25 प्रतिशत हिस्सा रेलवे के बजट से जबकि 75 प्रतिशत हिस्सा वित्त मंत्रालय के सहयोग से संचालित किया जाएगा। यह बजट मुनाफा देय वाला नहीं होगा ।

केरल स्थानीय निकायों के चुनाव

वाम लोकतांत्रिक मोर्चा की सफलता के पीछे का सच
पी श्रीकुमारन - 2015-11-10 16:30 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल में बदलाव की बयार बहती दिखाई दे रही है। पिछले दिनों प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनावों के संदेश स्पष्ट हैं।

बिहार चुनाव के नतीजे: जाति फैक्टर की उपेक्षा भाजपा को पड़ी भारी

उपेन्द्र प्रसाद - 2015-11-10 02:43 UTC
बिहार चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के लिए सिर्फ और सिर्फ जाति फैक्टर जिम्मेदार है, जिसकी उपक्षा भारतीय जनता पार्टी ने वहां पूरी तौर पर कर दी। 1990 के मंडल आयोग की कुछ सिफारिशें लागू करने की घोषणा वीपी सिंह ने की थी, उस समय भारतीय जनता पार्टी ने उसका विरोध किया था। उसके कारण उसकी छवि पिछड़ा और दलित विरोधी बन गई थी। यही कारण है कि उसे लालू को सत्ता से बाहर करने के लिए मंडल आंदोलन के समर्थक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री उम्मीदवार पेश कर चुनाव लड़ना पड़ा था और उसमें वह सफल भी हुई।

असहिष्णुता पर बहस: जातीय असहिष्णुता पर कोई सम्मान क्यों नहीं लौटाता?

उपेन्द्र प्रसाद - 2015-11-07 10:36 UTC
आजकल सम्मानों और पुरस्कारों को लौटाने की होड़ लगी हुई है। लौटाने वाले लोग कह रहे हैं कि देश में सहिष्णुता समाप्त हो गई है या हो रही है और इस प्रवृति का विरोध करते हुए वे अपने सम्मान और पुरस्कार लौटा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या हमारा समाज वाकई बहुत सहिष्णु रहा है? जिस असहिष्णुता के विरोध में सम्मान वापस लौटाए जा रहे हैं, क्या वह समाज में अभी अभी आई है? आखिर पिछले दिनों कुछ ऐसा क्या नया हुआ, जिसने कुछ सहिष्णु लोगों को हिलाकर रख दिया है?

प्रधानमंत्री मोदी को बिहार से आगे देखना चाहिए

निवेशकों की चिंता को उन्हें दूर करना चाहिए
कल्याणी शंकर - 2015-11-06 10:46 UTC
बिहार चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी को आगे देखते हुए अपने सुधार कार्यक्रमों को पूरा करने में लग जाना होगा। अगर उन्होंने वैसा नहीं किया, तो विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए उनके द्वारा किए जा रहे सारे प्रयास व्यर्थ चले जाएंगे। इसमें कोई शक नहीं है कि चुनाव जीतना नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी के लिए बेहद जरूरी है। दिल्ली चुनाव में हार का स्वाद चखने के बाद तो बिहार का चुनाव जीतना नरेन्द्र मोदी के लिए बहुत जरूरी हो जाता है, ताकि वे साबित कर सकें कि उनके नाम का जादू अभी समाप्त नहीं हुआ है। यही कारण है कि उन्होंने बिहार में दो दर्जन से भी ज्यादा चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इससे पता चलता है कि वे बिहार चुनाव को कितना महत्व दे रहे थे। मीडिया द्वारा बिहार चुनाव को इतना उछाला गया कि इसने दुनिया भर के ध्यान को आकर्षित कर रखा था। नरेन्द्र मोदी के लिए बिहार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके द्वारा उनकी पार्टी राज्यसभा में अपनी सदस्य-संख्या बढ़ा सकती है।

मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा क्यों नहीं?

पश्चिमी उड़ीसा में कोसली पढ़ाई की उपेक्षा
साकेत श्रीभूषण साहू - 2015-11-06 10:44 UTC
शिक्षा के माध्यम का मतलब वह भाषा होती है, जिसे कक्षा में पढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि कोई छात्र उस भाषा से परिचित नहीं है, जिस भाषा में उसे कक्षा में पढ़ाया जाना है, तो निश्चय ही वह भाषा उसके लिए एक विदेशी भाषा है। यही कारण है कि यदि वह छात्र पढ़ाई को समझ नहीं पाता है, तो वह स्वाभाविक ही है। किसी विदेशी भाषा में किसी बच्चे को पढ़ाने का मतलब है कि उसे बिना तैराकी सिखाए गहरे पानी में उतार देना।

भारत को रुपया रूबल व्यापार का प्रस्ताव मान लेना चाहिए

मोदी और पुतिन की बातचीत में सुरक्षा और व्यापार पर होगा जोर
नन्तू बनर्जी - 2015-11-05 10:27 UTC
रूस ने भारत को वस्तु विनिमय व्यापार को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इस वस्तु विनिमय व्यापार को रूपया- रूबल व्यापार भी कहा जाता रहा है। रूस जब सोवियत संघ का हिस्सा था, तो उसके साथ इस तरह के व्यापार का समझौता था। लेकिन बाद में वह समाप्त हो गया। उस व्यापार को शुरू करने का एक नया प्रस्ताव बहुत ही सही समय पर आया है। भारत को इसे स्वीकार कर लेना चाहिए।