मनमोहन ने बर्बाद किए 10 साल
राजनैतिक नपुंसकता का एक दशक
-
2013-08-22 13:19 UTC
जब मनमोहन सिंह 15 अगस्त को लाल किले पर भाषण देने के लिए खड़े हुए थे, तो शायद उनके दिमाग में यह बात जरूर उनके आई होगी कि वह उस स्थान से अंतिम बार देश को संबोधित कर रहे हैं। शायद यह भी उनके दिमाग में आया होगा कि यदि उन्होंने पिछले 10 सालों में अपनी चाह के अनुरूप आर्थिक सुधार कार्यक्रमांे को आगे बढ़ाया होता तो आज देश में स्थिति कुछ और ही होती। अपने से अलग विचार रखने वाले पार्टी नेताओं के दबाव में आने का अफसोस भी उन्हें जरूर हुआ होगा।