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भाजपा की झोली भरने के लिए चुनावी बांड योजना में बेशर्मी से संशोधन

जब मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में है लंबित तब केंद्र का फैसला बेमानी
नित्य चक्रवर्ती - 2022-11-09 11:05 UTC
नरेंद्र मोदी सरकार हिमाचल और गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों की पूर्व संध्या पर सत्तारूढ़ भाजपा को धन देने के लिए अपने निम्नतम स्तर तक गिर रही है। हिमाचल में चुनाव 12 नवंबर को होने हैं और गुजरात विधानसभा के चुनाव 1 और 5 दिसंबर को। केंद्र ने सोमवार को जल्दबाजी में चुनावी बॉन्ड योजना के नियमों में संशोधन किया ताकि इस चुनावी वर्ष के दौरान अतिरिक्त पंद्रह दिनों के लिए इसकी बिक्री की अनुमति मिल सके।

हरित ऊर्जा कारगर हो सकती है मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता विरुद्ध

जीवाश्म ईंधन पर नियंत्रण विश्व में प्रमुख युद्धों का कारण
नीलांजन बानिक और गुइडो कोज़ी - 2022-11-08 09:59 UTC
इस सदी के अंत तक पृथ्वी एक रहने योग्य स्थान नहीं रहेगी यदि वर्तमान औसत तापमान2.5 सेल्सियस बढ़ा, जैसा की अभी रूझान है। नवीनतम प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के बदतर होने के साथ, दुनिया जो पहले से ही घातक गर्मी की लहरों, बाढ़ और सूखे, तूफान के एक नियमित दौर का सामना कर रही है, को संभावित अपरिवर्तनीय प्राकृतिक आपदाओं से जूझना पड़ सकता है, जिससे कम से कम 3.3 बिलियन लोगों का जीवन दुष्प्रप्रभावित हो सकता है।इन सभी का संबंध जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और परिणामी ग्रीनहाउस उत्सर्जन से है। वास्तव में, एक और गहरा पक्ष है। जीवाश्म ईंधन पर नियंत्रण प्रमुख युद्धों का एक कारण है, जिसका अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

भारतीय रोजगार बाजार ने अक्टूबर में खतरनाक मोड़ लिया

बेरोजगारी तेजी से बढ़ी, मजदूरों की भागीदारी घटी
डॉ ज्ञान पाठक - 2022-11-07 16:14 UTC
इस साल अक्टूबर का महीना, जिसमें दो महान भारतीय त्यौहार - दशहरा और दिवाली –आये, भारत के आम लोगों के लिए अपेक्षित खुशियाँ लाने में विफल रहा।इसने भारत के नौकरी बाजार को केवल एक महीने पहले सितंबर की तुलना में और अधिक खतरनाक बना दिया। बेरोजगारी सितंबर के6.43 प्रतिशत से बढ़कर अक्तूबर में 7.77 प्रतिशत हो गयी, जबकि श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) इस अवधि के दौरान 39.3 प्रतिशत से गिरकर 39 प्रतिशत हो गयी।

जीएम सरसों की खेती को भारत सरकार की मंजूरी कहर ढायेगा

जन-पर्यावरण को गंभीर खतरा, गहरे संकट में होंगे किसान, मालामाल होंगी व्यावसायिक कंपनियां
डॉ. सोमा मारला - 2022-11-05 12:18 UTC
आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति, भारत सरकार (जीईएसी) ने 18 अक्टूबर को आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सरसों के पर्यावरण रिलीज की अनुमति दी है। पहली खाद्य फसल होने के नाते, विशेषज्ञों द्वारा किये गये अध्ययन पर्यावरण और जैव सुरक्षा के साथ-साथ जल्दबाजी में सरकार की मंजूरी से जुड़े मानव स्वास्थ्य जोखिमों पर सवाल उठाते हैं। जीएम कपास का भयानक अनुभव, जिसके परिणामस्वरूप पिछले डेढ़ दशक के दौरान कपास के खेतों में तबाही हुई और किसानों ने आत्महत्या की, बताता है कि उसके केवल मोनसेंटो और अन्य कृषि व्यवसाय करने वाले बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा हुआ।

पश्चिम बंगाल भाजपा में गुटबाजी और अनुशासनहीनता चरम पर

दुर्गापुर सांसद एसएस अहलूवालिया पर खफा हैं पार्टी कार्यकर्ता
तीर्थंकर मित्रा - 2022-11-04 12:13 UTC
ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य भाजपा में अनुशासनहीनता व्याप्त है, चाहे वह नेतृत्व स्तर पर हो कार्यकर्ताओं के बीच। दुर्गापुर-आसनसोल के सांसद सुरिंदर सिंह अहलूवालिया के अपने निर्वाचन क्षेत्र में लगे पोस्टर जिसमें पूछा गया हैं कि वह कहां हैं, महज एक उदाहरण है।

चुनाव की पूर्व संध्या पर त्रिपुरा भाजपा में घोर अन्तर्कलह

सीपीआई (एम), तृणमूल, और कांग्रेस में कोई एकता नहीं
आशीष विश्वास - 2022-11-03 10:58 UTC
दिल्ली के केन्द्रीय भाजपा नेताओं के प्रयासों के बावजूद त्रिपुरा मेंसत्तारूढ़ भाजपा गुटबाजी और संगठनात्मक समस्याओं से जूझ रही है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियां 2023 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही हैं परन्तु जो स्थिति है उसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता महेश सिंह, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में पार्टी की चुनावी जीत को गढ़ने में प्रमुख भूमिका निभायी, को उम्मीद है कि भाजपा आरामदायक बहुमत से जीतेगी।

'एक राष्ट्र, एक वर्दी' के पीछे खतरनाक इरादे

भारत के संघीय ढांचे के नष्ट करने पर तुला है भाजपा-संघ नेतृत्व
अरुण श्रीवास्तव - 2022-11-02 10:43 UTC
जुमले ठोंकने और अपने "मन की बात" सुनाने में माहिर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भावों में स्पष्टता के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि उनकी बातों के बाहरी परत के नीचे कुछ इरादे छिपे रहते हैं, जिन्हें देश के लोगों तक पहुंचाने से वे बचते हैं। जब भी वह बोलते हैं तो उनके भाषणों में सिफर और कसक भरी होती है।

वैश्विक मुद्रा बनाने के लिए भारतीय रुपये को स्थिर करने का समय

सट्टा विनिमय जोखिम लेने योग्य है वर्तमान चरण
नन्तू बनर्जी - 2022-11-01 11:03 UTC
भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर का यह कहना बिल्कुल सही है कि घरेलू मौद्रिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण का कोई विकल्प नहीं है। सीमा पार लेनदेन में रुपये के उपयोग से भारतीय व्यापार के लिए मुद्रा जोखिम कम होने की उम्मीद है। यह बड़े विदेशी मुद्रा भंडार रखने की आवश्यकता को कम करेगा। साथ ही, विश्व स्तर पर विनिमय योग्य रुपया भारत को बाहरी व्यापार और वित्तीय झटकों के प्रति कम संवेदनशील बना देगा, जबकि यह भारतीय व्यवसायों की सौदेबाजी की शक्ति को बढ़ायेगा। "रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण मौद्रिक नीति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देगा, लेकिन विकास पर समझौता करना कोई इष्टतम विकल्प नहीं है,"रवि शंकर ने कहा है।

तेजी से बढ़ता भारतीय बाजार डिजिटल भुगतान दिग्गजों के लिए अनूठा आकर्षण

दंडित गूगल ने भारतीय उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स के प्रति प्रतिबद्धता दोहरायी
के रवींद्रन - 2022-10-31 17:52 UTC
नियमों का उल्लंघन और उनके लिए प्रायश्चित गूगल और उसके मालिक अल्फाबेटके डीएनए में है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के दो आदेशों के तहत गूगल को एक सप्ताह के भीतर 2,274 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ा। ये आदेश गूगल प्ले स्टोर के संबंध में अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग करने और अनुचित व्यावसायिक तौर तरीकों में गूगल के संलग्न होने के लिए जारी किये गये था। हालाँकि, टेक्नोलॉजी दिग्गज कम से कम क्षमाप्रार्थी थे, तथाइस बात पर बल दिया कि कम्पनी ने भारत के डिजिटल परिवर्तन को शक्ति दी, करोड़ों भारतीयों के लिए उसतक पहुंच को विस्तारित किया, तथा उसने भारतीय उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की कसम खायी।
मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस 1 नवम्बर पर विशेष

चुनौतियों से भरी थी मध्यप्रदेश की स्थापना, और अब विकास का मार्ग भी

तेज गति विकास के लिए नीतियों में आवश्यक बदलाव एक मात्र रास्ता
एल. एस. हरदेनिया - 2022-10-29 11:22 UTC
भाषा के आधार पर राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर 1 नवम्बर 1956 को मध्यप्रदेश का गठन हुआ जिसमें महाकौशल, छत्तीसगढ़, ग्वालियर, इंदौर, रीवा एवं भोपाल आदि क्षेत्रों को शामिल किया गया। ग्वालियर इंदौर, रीवा और भोपाल मुख्य रूप से राजशाही क्षेत्र थे। इस तरह नया मध्यप्रदेश पूरी तरह से हिन्दी भाषी राज्य बना। इसके पहले यह द्विभाषी राज्य था जिसे सेंट्रर प्रॉविंस एंड बरार कहा जाता था। बरार सेंट्रल प्राविन्स का मराठी भाषी हिस्सा था और नागपुर उसकी राजधानी थी।