Loading...
 
Skip to main content

View Articles

नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन से मुलाकात एक फ्लॉप रही

अमेरिकियों को वही मिला जो वे भारतीय सरकार से चाहते थे
बिनॉय विश्वम - 2021-10-01 10:26
कॉरपोरेट घरानों के निहित स्वार्थों द्वारा नियंत्रित भारतीय मीडिया के बड़े वर्ग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की अमेरिका यात्रा का जश्न मनाया गया। उनमें से कुछ ने तो यहां तक दावा भी कर दिया कि इस 6वीं यात्रा में भी प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की कल्पना को जीत लिया है! अतिशयोक्ति की इस तरह की भव्य भागीदारी उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिपरक संतुष्टि को पूरा कर सकती है लेकिन सच्चाई के साथ न्याय नहीं करेगी।

जब गांधी ने 125 वर्ष तक जीने की इच्छा त्याग दी थी

उनकी हत्या की कोशिश 1934 से ही शुरू हो गई थी
अनिल जैन - 2021-09-30 10:40
इस समय जब पूरी दुनिया महात्मा गांधी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है और उनके विचारों की प्रासंगिकता पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है, तब भारत में सत्ताधारी जमात से जुड़ा वर्ग गांधी को नकारने में लगा हुआ है। इस समय देश में सांप्रदायिक और जातीय विद्वेष का माहौल भी लगभग उसी तरह का बना दिया गया है, जैसा कि देश की आजादी के समय और उसके बाद के कुछ वर्षों तक बना हुआ था। उसी माहौल से दुखी होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपनी मृत्यु की कामना करते हुए कहा था कि वे अब और जीना नहीं चाहते। उसी माहौल के चलते उनकी हत्या हुई थी।

मंत्रालय विस्तार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के मंडल कार्ड का एक हिस्सा है

अखिलेश यादव अपने समानांतर सब की साथ कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ रहे हैं
प्रदीप कपूर - 2021-09-29 11:14
लखनऊः योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति, एक अनुसूचित जनजाति के साथ भाजपा ने आक्रामक मंडल कार्ड खेला है। एक ब्राह्मण को भी मंत्री बनाया गया।

कौन बनाता है मुख्यमंत्री?

कम ही मामलों में विधायक अपना नेता चुनते हैं
एल. एस. हरदेनिया - 2021-09-28 17:17
तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने एक बार कहा था कि पंडित नेहरू के समय मुख्यमंत्री नामजद नहीं होते थे। उनकी इस टिप्पणी के कुछ दिन बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भोपाल आई थीं। उनकी पत्रकार वार्ता आयोजित थी। पत्रकार वार्ता में मैंने पूछा कि अभी हाल में राष्ट्रपति महोदय ने यह टिप्पणी की थी कि नेहरूजी के जमाने में मुख्यमंत्री नामांकित नहीं होते थे। उत्तर देते हुए उन्होंने कहा क्या नेहरूजी को मुझसे ज्यादा कोई जानता था। स्पष्ट है कि उनका कहना था कि नेहरूजी के जमाने में भी मुख्यमंत्री नामांकित होते थे। इससे साफ है कि जब से देश में संसदीय प्रजातंत्र की शुरूआत हुई है तभी से मुख्यमंत्रियों का नामांकन ही होता आया है।

सुप्रीम कोर्ट के फूटर से मोदीजी के फोटो हटाने के आदेश

उसी तर्क से वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट से भी मोदीजी का फोटो हटना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-09-27 10:23
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर कोर्ट के ईमेल फूटर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर हटाने को कहा है। गौरतलब हो कि एनआईसी, जो कि भारत सरकार की एक संस्था है, वह अन्य सरकारी संगठनों और संस्थाओं के लिए ईमेल को डोमेन तैयार करती है। ईमेल के साथ जो मैसेज जाता है, उसके नीचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के ईमेल धारियों की ओर से जा रही है, जिसके साथ लिखा होता था, ‘‘सबका साथ, सबका विकास’’। जब सुप्रीम कोर्ट के जजों को इसका अहसास हुआ, तो इस पर आपत्ति जताई गई और आदेश जारी किया गया है कि उस तस्वीर और उसके साथ जो स्लोगन है, उसे तुरंत हटाया जाय। यदि इस तरह का फूटर जाना ही था, तो वह सुप्रीम कोर्ट के भवन का हो सकता है, प्रधानमंत्री का तो हरगिज नहीं।

कांग्रेस में शुरू हो चुका है राहुल-प्रियंका का समय

सोनिया अब अपने पुराने सहयोगियों को सिर्फ 'आई एम सॉरी’ बोलने की जिम्मेदारी ही निभाएंगी
अनिल जैन - 2021-09-25 08:57
पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की मुख्यमंत्री पद से विदाई को अगर संकेत माना जाए तो साफ है कि कांग्रेस में अब करीब तीन दशक पुराने उस दौर की फिर शुरुआत हो गई है, जब कोई क्षत्रप आलाकमान को आंख दिखाने की हिम्मत नहीं करता था। हालांकि पार्टी की कमान अभी औपचारिक तौर पर सोनिया गांधी के हाथों में ही है, लेकिन पंजाब का घटनाक्रम बताता है कि कांग्रेस में अब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का समय शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों वे कुछ और सख्त फैसले लेंगे। कैप्टन को हटा कर राहुल गांधी ने वह काम किया है जो वे पार्टी अध्यक्ष रहते हुए भी नहीं कर पाए थे। खुद सोनिया गांधी ने भी पार्टी की कमान संभालने के बाद कभी इस तरह की राजनीति नही की, जैसी कैप्टन के मामले में राहुल और प्रियंका ने की है।

बुनियादी परिवर्तनों के दौर में

ध्वंस के दिन आ गए हैं
कृष्णा झा - 2021-09-24 09:48
आज हम बुनियादी परिवर्तनों के दौर से गुजर रहे हैं। जब बुनियाद बदल जाती है तो ऊपरी ढांचे को भी बदलना पड़ता है। पूंजीवादी समाज टिका होता है मालिक और मजदूर के कंधों पर और वही उत्पादन का भी दायित्व निभाते हैं। उनमें से एक उत्पादन को व्यवस्थित करता है, जिसके लिये निवेश का होना अनिवार्य है, और इस निवेश को ही वैज्ञानिक शब्दों में पूंजी कहते हैं। यह पूंजी निकलती है जब उत्पादन अधिक होता है और अतिरिक्त मुनाफे के साथ अधेशेष मूल्य मिलता है। इस सत्य की खोज मार्क्स ने की थी जब वह अपने राजनैतिक अर्थशास्त्र की रचना कर रहे थे। अधिशेष तभी होता है जब मजदूर अपने मुआवजे के अतिरिक्त काम करता है। यह अतिरिक्त श्रम ही अधिशेष का स्रोत है और पूंजी की भूमिका भी निभाता है। समाज के विकास के साथ ही पूंजी भी विकसित होती है और इस सबकी चरम परिणति होती है वित्त पूंजी में। औद्योगिक पूंजी और बैंक का परस्पर में मिल जाना होता है और निवेश में भारी कमी आ जाती है।

महंत नरेन्द्र गिरि की मौत

सबूत चीख चीख कर कह रहे हैं वह आत्महत्या का मामला है
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-09-24 09:44
प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर के महंत नरेन्द्र गिरि की मौत हो गई। वे फांसी से झूलते हुए पाए गए और पुलिस ने प्राथमिक तौर पर पाया की महंत ने आत्महत्या कर ली है। वह आत्महत्या का मामला पुलिस को इसलिए लगा कि जिस कमरे में महंत फांसी पर झूलते हुए पाए गए थे, वह कमरा अंदर से बंद था और आश्रम के लोग उस कमरे के दरवाजे को तोड़कर ही अंदर पहुंचे थे। जैसे ही उस मौत की खबर कमरे से बाहर निकली, कुछ कथित और तथाकथित संतों ने एक सिद्धांत जारी कर दिया कि संत आत्महत्या नहीं कर सकते और उसी सिद्धांत को सत्य साबित करने के लिए कथित संतों का एक बहुत बड़ा हुजूम तैयार हो गया, जो चीख चीख कर कह रहे हैं कि नरेन्द्र गिरि महंत हैं, तो फिर वे आत्महत्या नहीं कर सकते, वह पूरी तरह से हत्या का मामला है।

उच्च जोखिम वाले ट्रांसजेंडरों और यौनकर्मियों को टीका लगाने के लिए विशेष अभियान

कुशाल जीना - 2021-09-23 11:13
नई दिल्ली: शहर के सुल्तानपुर इलाके के एक केंद्र में एक सप्ताह तक चले समर्पित टीकाकरण अभियान में बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और यौनकर्मियों का टीकाकरण किया गया। यह अभियान स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों के मंत्रालय द्वारा उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को टीका लगाने के लिए शुरू की गई एक पहल का हिस्सा था। एलजीबीटी और यौनकर्मियों सहित हाशिए के समुदायों के लिए समर्पित केंद्र स्थापित करने के लिए सरकार ने गैर सरकारी संगठनों को शामिल किया है।

तालिबानी कानूनों के खिलाफ अफगान महिलाओं के मजबूत विरोध का पाकिस्तान पर असर

पाकिस्तान की महिलाएं भी प्रतिरोघ में उठ खड़ी होंगी
शंकर राय - 2021-09-23 09:33
तालिबान की वापसी के बाद अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के गंभीर हनन के खिलाफ 72 वर्षीय अखिल पाकिस्तान महिला संघ की चुप्पी कोई मोहक नहीं है क्योंकि एपीडब्ल्यूए हमेशा से व्यवस्थावादी रहा है। लेकिन सशक्तिकरण के लिए तरस रही महिलाओं की घर में निर्वासित नई पीढ़ी की चुप्पी चौंकाने वाली है, विशेष रूप से कामकाजी महिलाएं जो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनजीर भुट्टो के पाकिस्तान के प्रधान मंत्री बनने के बाद से ’धर्मनिरपेक्ष नारीवादी सक्रियता’ के लिए जानी जाती हैं।