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महान विभूतियों को याद नहीं करने के पीछे भी सरकार का भय

इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू को भुलाना कदापि उचित नहीं
एल एस हरदेनिया - 2022-11-18 10:32 UTC
गत 31 अक्तूबर को देश ने लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती मनायी। परंतु उस दिनका एक और महत्व है। भारत की तीसरी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उस दिन हत्या की गयी थी। उसके पूर्व पूरा देश उन्हें लौह महिला के रूप में स्वीकार कर चुका था। भारत सरकार ने उस दिन तो सरदार पटेल को याद करते हुए विज्ञापन निकाले। परंतु इंदिरा गांधी को पूरी तरह भुला दिया गया।

गुजरात विधानसभा चुनाव में हर तरह से नरेंद्र मोदी हैं भाजपा नहीं

प्रधानमंत्री ने दिसंबर चुनाव के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया
सुशील कुट्टी - 2022-11-17 16:23 UTC
यह एक छोटी सी दुनिया है, और ध्वनि दूर तक जाती है। नहीं तो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिध्वनि कैसे कर सकते थे? व्हाइट हाउस के लिए अपने2024 के दावे की घोषणा करते हुए, ट्रम्प ने कहा, "यह अभियान मेरा नहीं, हमारा होगा"। फिर टेलीविजन होस्ट सीन हैनिटी ने कहा, "महान लाइन, अगर वह अपना ध्यान इसी तरह रखते हैं, तो वह अपराजेय हैं।"

पश्चिम बंगाल के विभाजन के लिए अलगावदियों से मिले हैं भाजपा नेता

प्रदेश के वरिष्ट भाजपा नेता भी अनंत महाराज के बंटवारे की मांग के पीछे
तीर्थंकर मित्रा - 2022-11-16 11:00 UTC
पंचायत चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, उत्तर बंगाल गलत कारणों से चर्चा में है। उसे पश्चिम बंगाल से अलग एकराज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मांग फिर से उठ गयी है।

भारत को दुनिया का कारखाना बनने के लिए बड़े विदेशी निवेश की जरूरत

चिंता का विषय है अस्थिर नियामक परिदृश्य
नन्तु बनर्जी - 2022-11-15 11:11 UTC
वैश्विक निवेश बैंकर मॉर्गन स्टेनली ने चीन में आर्थिक विकास की गति धीमी होने के बाद भले ही वर्तमान दशक को भारत के दशक होने की भविष्यवाणी की हो, वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही है जितनी की उम्मीद की जा रही थी। बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भारत की अत्यधिक मूल्य संवेदनशील अर्थव्यवस्था से कतराते हुए प्रतीत होते हैं। अनिश्चित और अस्थिर नियामक परिदृश्य की जटिलताएं एक मुद्दा बनी हुई हैं। भारतके‘दुनिया का कारखाना’ बनने की संभावनाएं तो हैं, लेकिनकारोबार सुगमता को लेकर सरकार पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।

आरक्षण पर उभर रहा है यथार्थवाद का नया दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय ने खोला एक नया रास्ता
के रवींद्रन - 2022-11-14 09:57 UTC
आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सोच का पहला बड़ा संकेत 2021 के मराठा आरक्षण मामले में भारत के शीर्ष अदालत के फैसले में उपलब्ध था, हालांकि उस याचिका में उठाया गया मूल मुद्दा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के मामले में अदालत के नवीनतम रुख से अलग था।

पंडित नेहरू और शेख अब्दुल्ला के कारण ही कश्मीर बन सका भारत का हिस्सा

कश्मीर समस्या के लिए उन्हें दोष देना अनुचित
एल. एस. हरदेनिया - 2022-11-12 11:17 UTC
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत कई व्यक्ति व संगठन जवाहरलाल नेहरू को कश्मीर समस्या के लिए जिम्मेदार मानते हैं। परंतु इसके विपरीत पूरे विश्वास से यह दावा किया जा सकता है कि यदि जवाहरलाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला नहीं होते तो जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं बन पाता। भारत को आजादी देने के लिए ब्रिटिश संसद ने जो कानून बनाया था उसके अनुसार इंडिया को दो राष्ट्रों में विभाजित किया जाना था। भारत की सभी रियासतों को तीन विकल्प दिए गए थे। वे चाहेँ तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हों सकते थे या आजाद भी रह सकते थे। उन्हें यह फैसला दोनों राष्ट्रों के बनने के पहले लेना था। फैसला लेने का अधिकार संबंधित रियासत के राजा/नवाब को दिया गया था।

केंद्रीय कानून मंत्री के निशाने पर न्यायपालिका

जजों को सरकारी लाइन पर लाना चाहती है मोदी सरकार
अरुण श्रीवास्तव - 2022-11-12 11:13 UTC
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के कामकाज पर सवाल खड़ा किया और न्यायपालिका का चेहरा सार्वजनिक रूप से खराब किया। एक पखवाड़े से वह न्यायाधीशों और न्यायपालिका को निशाना बना रहे हैं और उन पर कार्यपालिका के क्षेत्र में अतिक्रमण करने का आरोप लगा रहे हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में इससे पहले कभी भी किसी कानून मंत्री ने न्यायपालिका के खिलाफ उस तरह से तीखा हमला नहीं किया जैसा रिजिजू करते रहे हैं।

केंद्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की परिभाषा बदले

आरक्षण का वास्तविक लाभ आर्थिक रूप से वंचित लोगों को मिले
प्रकाश कारत - 2022-11-11 11:14 UTC
सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने 3-2 के एक विभाजित बहुमत फैसले से 103 वें संवैधानिक संशोधन की वैधता को बरकरार रखा है, जो सामान्य वर्ग के भीतर से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण प्रदान करता है। सीपीआई (एम) ने जनवरी 2019 में संसद में इस संवैधानिक संशोधन का समर्थन किया था।

छह साल बाद भी भारत में विमुद्रीकरण का दुष्परिणाम जारी

कायम है काली अर्थव्यवस्था, अनौपचारिक क्षेत्र भुगत रहा है खामियाजा
अरुण कुमार - 2022-11-10 11:09 UTC
छह साल पहले 8 नवंबर को देश को नीति-प्रेरित विमुद्रीकरण का जोरदार झटका लगा था। अर्थव्यवस्था, जो एक बेहतर मार्ग पर चल रही थी अचानक ठप हो गयी।

भाजपा की झोली भरने के लिए चुनावी बांड योजना में बेशर्मी से संशोधन

जब मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में है लंबित तब केंद्र का फैसला बेमानी
नित्य चक्रवर्ती - 2022-11-09 11:05 UTC
नरेंद्र मोदी सरकार हिमाचल और गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों की पूर्व संध्या पर सत्तारूढ़ भाजपा को धन देने के लिए अपने निम्नतम स्तर तक गिर रही है। हिमाचल में चुनाव 12 नवंबर को होने हैं और गुजरात विधानसभा के चुनाव 1 और 5 दिसंबर को। केंद्र ने सोमवार को जल्दबाजी में चुनावी बॉन्ड योजना के नियमों में संशोधन किया ताकि इस चुनावी वर्ष के दौरान अतिरिक्त पंद्रह दिनों के लिए इसकी बिक्री की अनुमति मिल सके।