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अलगाव में डाले गए भारतीयों के मानसिक स्वास्थ का ध्यान रखें

बिना सामाजिक संपर्क के भावनात्मक चिंता बढ़ जाएगी
अरुण श्रीवास्तव - 2020-04-04 08:44
अज्ञात का डर सबसे अधिक भयानक होता है। यह अधिक तीव्र हो जाता है जब कोई निश्चित नहीं होता है कि आगे क्या है और यह समझने की स्थिति में नहीं है कि किसी परिणाम को देखने के लिए कितने तरीकों से प्रयास करना चाहिए। बीमारी के प्रसार का मुकाबला करने के लिए लॉकडाउन लगाए जाने के मद्देनजर भी यही स्थिति पैदा हुई है।

उत्तर प्रदेश में विपक्षी पार्टियां राहत कार्य में जुटीं

राहुल, प्रियंका और अखिलेश जरूरतमंदों के साथ हो गए हैं खड़े
प्रदीप कपूर - 2020-04-03 08:54
लखनऊः उत्तर प्रदेश भी देश के अन्य हिस्सों की तरह कोरोना संकट की चपेट में है। संकट के इस दौर में प्रदेश के विपक्षी दलों ने आम जनता की मदद के लिए अपने अपने स्तर पर और अपने अपने तरीके से कोशिशें शुरू कर दी हैं। सच तो यह है कि इस मसले पर विपक्षी दल एक साथ आ गए हैं।

महामारी से लडने के नाम पर पुलिस स्टेट में तब्दील होता देश

सरकारों के नाकारापन का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं
अनिल जैन - 2020-04-02 11:15
अगर कोई लोकतांत्रिक देश अचानक पुलिस स्टेट में बदल जाए तो क्या-क्या होता है, यह इन दिनों भारत में देखा जा सकता है। भारत में कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन यानी देशबंदी लागू है। सडकों पर या तो सिर्फ पुलिस दिख रही है या फिर पुलिस के हाथों बेदर्दी से पिट रहे गरीब लोग। पिटने वाले लोगों में महानगरों और बडे शहरों से अपने घर-गांव की ओर पलायन कर रहे मजदूर और उनके परिजन भी हैं और अपने परिवार की जरूरत का सामान खरीदने के लिए घरों से निकलने वाले लोग भी। यह सब तब हो रहा है जब न तो देश में किसी तरह का भी आपातकाल लागू नहीं है- न तो आंतरिक या बाहरी और न ही आर्थिक या मेडिकल। फिर भी देश के पुलिस स्टेट बनने जैसे नजारे देखने को मिल रहे हैं।

कोविड -19 और हम

सबकुछ बदल जाने वाला है
दीपा पुंजानी - 2020-04-01 09:02
कोविड -19 ने जो मानवीय संकट पैदा किया है, उसे कम करके नहीं आंका जा सकता। इसने भविष्य के लिए हमारी दुनिया बदल दी है और सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद भी इसकी गूँज गूंजती रहेगी।

कोराना संकट का मिलजुलकर ही हो सकता है सामना

पर भाजपा कर रही है गंदी राजनीति
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-03-31 08:42
भारत ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व कोरोना वायरस के कारण अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। इस तरह का संकट 1918-19 में भी एक एनफ्लूएंजा के कारण हुआ था और बीमारी का नाम स्पैनिश फ्लू कहा गया था। उस समय आज की तरह मेडिकल सुविधाएं नहीं थी, लेकिन आज की तरह उस समय भूमंडलीकृत दुनिया भी नहीं थी। दोनों के बीच तुलना न भी करें, तो यह तो मानना ही पड़ेगा कोविड 19 नाम वाले इस वायरस के कारण आज सबकुछ तहस नहस हो गया है। इससे मरने वालों की संख्या पहले की महामारियों से भले कम दिखाई दे रही है, लेकिन इसका असर इस बीमारी से मारे गए लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी विश्व अर्थव्यस्था इसके असर से चरमरा रही है। यह संकट जितना लंबा खींचेगा विश्व अर्थव्यवस्था और अलग अलग देशों की अर्थव्यवस्थाएं उतना ही ज्यादा ध्वस्त होती दिखेंगी और मानव जाति के सामने असली समस्या उसके ध्वस्त होने के बाद ही प्रकट होगी।

मिनी मुंबई में तेजी से बढ़ रहे कोरोना पाॅजिटिव मामले

अस्पताल से भागा कोरोना पाॅजिटिव 5 घंटे तक रहा बाहर
राजु कुमार - 2020-03-30 10:15
मध्यप्रदेश का इंदौर शहर कोरोना को लेकर हाई अलर्ट पर है। यहां तेजी से पाॅजिटिव केस बढ़ रहे हैं। इंदौर में कोरोना की रोकथाम में हुई लापरवाही ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। शनिवार-रविवार की रात एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई, जब एम.आर. टी.बी. अस्पताल से एक कोरोना पाॅजिटिव मरीज और दो कोरोना संदिग्ध मरीज अस्पताल से भाग गए। इससे इंदौर में सामुदायिक स्तर पर कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इस मरीज का 5 घंटे तक खुले में बाहर रहने के कारण प्रशासन से लेकर आम जन तक चिंतित हैं। उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान करना भी एक चुनौती है। यद्यपि वह जिन-जिन इलाकों से गुजरा है, उन इलाकों को इंदौर नगर निगम ने सैनेटाइज कर दिया और प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए इंदौर को तीन दिन के लिए पूरी तरह लाॅक डाउन कर दिया। इस दरम्यान जरूरी सेवाओं के लिए भी लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना हैं। जरूरी सेवाओं घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

पौष्टिक आहार के बिना हम कोरोना से जंग जीत नहीं सकते

थाली और घंटियां बजाने में ऊर्जा बर्बाद नहीं करें
डॉ अरुण मित्रा - 2020-03-30 09:40
दुनिया के कई हिस्सों की तरह हमारा देश भी तीसरे चरण में कोविद -19 के प्रसार को रोकने के लिए जूझ रहा है। यह एक अनिश्चित स्थिति है जिसमें प्रत्येक कदम सावधानी के साथ बहुत सावधानी बरतने के लिए होता है। मेडिकल, पैरामेडिकल स्टाफ और सफारी कर्मचारी अधिक जोखिम में हैं। कई डॉक्टरों और नर्सों ने पहले ही चीन, इटली, ईरान और स्पेन में अपनी जान गंवा दी है, जब उन्होंने बीमारों की देखभाल करते हुए संक्रमण को पकड़ लिया।

कोरोना संकट के लिए जिम्मेदार कौन

केन्द्र सरकार ने दोष राज्य सरकारों पर मढ़ा
उपेन्द्र प्रसाद - 2020-03-28 10:19
देश कोरोना वायरस कोविड 19 के मारक संकट के दौर से गुजर रहा है। देश के सभी लोगों को अपने अपने घरों में कैद रहने के लिए कहा गया है और उन्होंने अपने को कैद कर भी लिया है। पता नहीं यह संकट आगे कौन सा रूप लेता है और इस संकट के दौर में सबको मिलजुल कर इसका सामना करना चाहिए। पर आश्चर्यजनक रूप से केन्द्र सरकार ने इस मामले पर दोषारोपन करना शुरू कर दिया है। यह सरकारों की जिम्मेदारी थी कि वे समय रहते उचित कदम उठाते, जिससे इस अभूतपूर्व घरबंदी की जरूरत ही नहीं पड़ती, लेकिन उन्होंने अपना फर्ज नहीं निभाया। सबसे पहले अंगुली तो केन्द्र सरकार पर ही उठनी चाहिए, लेकिन केन्द्र सरकार पर कोई अंगुली उठाए, उसके पहले ही केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों पर अंगुली उठा दी है और कहा है कि 18 जनवरी से 18 मार्च तक विदेश से आए 15 लाख लोगों की सही तरीके से जांच प्रदेश सरकारों ने नहीं कराई, इसलिए यह संकट खड़ा हो गया।

कोरोनावायरस का घरबंदी संकट

सरकार ने विस्थापित मजदूरों की अनदेखी कर दी
बिनॉय विस्वम - 2020-03-27 10:35
ये किसी भी देश के लिए असामान्य दुख के दिन हैं। कोरोनवायरस के प्रकोप और प्रसार ने देश को बंद कर दिया है। यूरोप से गुजरते हुए चीन से उत्पन्न महामारी भारत में आई है। हालांकि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा पर्याप्त चेतावनी दी गई थी, लेकिन सरकार ने इसे हल्के में ले लिया। अब जब तबाही मची है, तो पूरा देश महामारी की चपेट में है। लेकिन एक देश और लोगों के रूप में हमें वास्तविकता का सामना करना होगा और इसे दूर करना होगा।

मुख्यमंत्री पद पर शिवराज सिंह की वापसी

कमलनाथ की नियुक्तियों को वे तेजी से कर रहे हैं रद्द
एल एस हरदेनिया - 2020-03-26 10:57
भोपालः विश्वास मत जीतने और चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ द्वारा इस्तीफा देने से कई घंटे पहले लिए गए कई फैसलों को रद्द कर दिया है। नाथ ने कई महत्वपूर्ण कांग्रेस नेताओं को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया था। अधिकांश नियुक्तियां ऐसी थीं जो स्वभाव से अर्ध-न्यायिक थीं।