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राम मंदिर निर्माण में चंपत घोटाला

उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतना भाजपा के लिए और हुआ दुष्कर
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-06-14 11:08 UTC
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने दिल्ली फतह तो कर ली। उन्हें मोदी- शाह मुख्यमंत्री पद से हटा नहीं सके, लेकिन क्या वे उत्तर प्रदेश भी फतह कर पाएंगे- इन सवालों पर राजनैतिक पंडित माथापच्ची कर ही रहे थे कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण करवा रहे ट्रस्ट द्वारा घोटाले की एक ऐसी खबर आ गई है, जिसे झुठलाना असंभव है। आगामी चुनाव में योगी आदित्यनाथ निश्चय ही राममंदिर के निर्माण को मुद्दा बनाएंगे, लेकिन यह मुद्दा उनके खिलाफ भी जा सकता है, क्योंकि रामजन्म मंदिर निर्माण से घोटाला भी जुड़ गए है। राममंदिर सुनते ही लोगों के जेहन में घोटाला भी गूंजने लगेगा और भाजपा को यह मुद्दा फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचाएगा।

प्रधानमंत्री पर क्यों भारी पड़े योगी

मोदी के इर्दगिर्द बुना तिलिस्म समाप्त
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-06-12 10:18 UTC
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी दिल्ली आए। केन्द्रीय नेताओं से मिले। फिर लखनऊ वापस चले गए। इसके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से उनके हटाए जाने की अफवाहों पर विराम लग गया। योगी की दिल्ली यात्रा उनकी विजयी यात्रा रही। पहली बार मोदी- शाह की जोड़ी को यह अहसास हुआ कि अपनी इच्छा के अनुसार वे पार्टी में सबकुछ नहीं कर सकते। योगी उन दोनों पर भारी पड़े और उन्हें हटाने का विचार उन्हें त्यागना पड़ा। कहने को तो कहा जा सकता है कि बंगाल के चुनाव नतीजों ने मोदी को कमजोर कर दिया है, लेकिन सच्चाई यह है कि मोदी उसके पहले से ही कमजोर पड़ रहे हैं। विधानसभा चुनावों में भाजपा को जीत दिलाने की उनकी क्षमता 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी जीत के पहले से ही संदिग्ध हो चुकी थी। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में उनकी पार्टी हारी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तो भाजपा विधानसभा चुनावों में अधिकतर हार का ही सामना करती रही है। असम एक मात्र अपवाद है, जहां मोदी ने भाजपा को जीत दिलाई।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मंत्रिपरिषद को भी महत्वहीन बना दिया है

यही कारण है कि प्रधानमंत्री को मंत्रिपरिषद विस्तार की हड़बड़ी नहीं
अनिल जैन - 2021-06-11 11:08 UTC
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर चुके हैं लेकिन इन दो सालों में वे अपने मंत्रिपरिषद को भी पूरी तरह आकार नहीं दे पाए हैं। उनकी सरकार का तीसरा साल शुरू हो चुका है लेकिन अभी भी आधी-अधूरी मंत्रिपरिषद से ही काम चल रहा है। इसी वजह से कई कैबिनेट और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री ऐसे हैं जिनके पास दो और तीन से ज्यादा मंत्रालयों का दायित्व है। यह स्थिति बताती है कि प्रधानमंत्री अपनी मंत्रिपरिषद को कितना महत्व देते हैं और क्यों अधिकांश महत्वपूर्ण फैसले मंत्रिमंडल यानी कैबिनेट में चर्चा के बगैर प्रधानमंत्री अपने स्तर पर ही ले लिया करते हैं।

उत्तर प्रदेश में विपक्ष 2022 में भाजपा को चुनौती देने की तैयारी में

समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव सबसे आगे
प्रदीप कपूर - 2021-06-10 17:01 UTC
लखनऊ: 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए विपक्षी दल सीएम योगी आदित्यनाथ को बीजेपी का मुख्य चेहरा बनाने के लिए कमर कस रहे हैं। चूंकि बीजेपी और संघ परिवार हिंदुत्व के एजेंडे पर यूपी चुनाव लड़ेंगे, इसलिए उनके पास भगवाधारी योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री और राज्य चुनावों में पार्टी का मुख्य चेहरा बनाए रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले चार वर्षों के दौरान देश में हुए सभी चुनावों में पीएम मोदी के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भाजपा के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण प्रचारक थे।

योगी आदित्यनाथ से कैसे निपटें

संघ और भाजपा के नेता असमंजस में
अरुण श्रीवास्तव - 2021-06-09 15:57 UTC
बंगाल की ऐतिहासिक लड़ाई हारने और कोलकाता की सड़कों पर नरेंद्र मोदी की पूरी तरह बिखरी अजेयता की छवि के बाद उत्तर प्रदेश के राजपूत योद्धा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवा ब्रिगेड के दो कमांडरों नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर तीखा हमला बोला है. यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो मोदी और अमित शाह को योगी 2022 में उत्तर प्रदेश में आने वाली लड़ाई में धूल चटा सकते हैं।

भारत के संघीय लोकतंत्र पर फिर हमला

अलपन बंदोपाध्याय का मामला
नंतू बनर्जी - 2021-06-08 09:41 UTC
देश की नाजुक संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक बार फिर हमला हो रहा है। इस बार, केंद्र, राज्यों पर अपने वर्चस्व के बारे में अतिसंवेदनशील, लगता है कि पश्चिम बंगाल सरकार और उसके मुख्यमंत्री को राजनीतिक तौर-तरीकों पर दोष दिया गया है क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री को चक्रवात प्रभाव की समीक्षा के लिए इंतजार करवाया था। यह उनको खराब लगा। लेकिन मुख्य सचिव को वापस बुलाने और उन्हें ‘रिपोर्ट करने के लिए’ कहने की दंडात्मक कार्रवाई को सही ठहराते हैं। मानो मुख्य सचिव राजनीतिक गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार थे।

बंगाल ट्रैप में फंस चुके हैं मोदी

जितनी उछलकूद करेंगे, उतना ही निकलना मुश्किल होता जाएगा
उपेन्द्र प्रसाद - 2021-06-07 09:51 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने आप को इस कदर बंगाल में उलझा दिया है कि उससे बाहर निकलना उनके लिए कठिन साबित होता जा रहा है। जब देश भीषण आर्थिक बदहाली का सामना कर रहा था और कोरोना की दूसरी लहर के दौर से गुजर रहा था, तो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की जगह उन्होंने अपने आपको और अपनी सरकार को पूरी तरह पश्चिम बंगाल के चुनाव में झोंक दिया था और उसे लगभग जीवन और मरण का सवाल बना दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में 42 में 18 सीटें जीतने के बाद विधानसभा चुनाव भी जीत लेने की आकांक्षा कोई गलत आकांक्षा नहीं थी, लेकिन उसके लिए अपने आपको दांव पर लगा देने का उनका फैसला निश्चय ही गलत था।

वैक्सीन पर राजनीति

देश के नागरिक और राज्य सरकारें संकट में
अनिल जैन - 2021-06-05 11:52 UTC
दुनिया के तमाम देशों में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसकी सरकार ने कोरोना की वैश्विक महामारी से निबटने के सिलसिले में हर फैसला अपने राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर और अपनी छवि चमकाने के मकसद से किया है। यही वजह है कि इस समय देश में चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है। अस्पतालों में बिस्तरों की कमी, दवाओं को लेकर सरकारी विशेषज्ञों की तरफ से बनी भ्रम की स्थिति जरूरी दवाओं और ऑक्सीजन के अभाव में तो बड़ी संख्या में लोग मरे ही हैं और अभी भी मर रहे हैं। इसके साथ ही कोरोना वैक्सीनेशन का अभियान भी बुरी तरह लड़खड़ा गया है।

राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं लक्षद्वीप के लोग

देश में सभी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को उनके साथ खड़ा होना होगा
बिनॉय विश्वम - 2021-06-04 10:07 UTC
लक्षद्वीप, केरल तट के दक्षिण पश्चिम तट की ओर अरब सागर में स्थित छोटे द्वीपों का समूह भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है। उसके 36 द्वीपों में से केवल 11 बसे हुए हैं और कुल जनसंख्या लगभग 75,000 के आसपास अनुमानित है। लक्षद्वीप अपनी सुंदरता और शांति के लिए जाना जाता है। भूमि और उसके लोग शेष भारत के ध्यान में कभी नहीं आए क्योंकि उन्होंने स्वयं एक विनम्र और संतुष्ट जीवन का निर्माण किया। यह भारत का सबसे शांतिपूर्ण हिस्सा है जहां अपराध दर शून्य के करीब है।

मोदी की इच्छा के पंख होते तो बात अलग होती

कागज पर सब कुछ अच्छा है, लेकिन जमीन पर बड़ा शून्य
के रवींद्रन - 2021-06-03 13:28 UTC
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में कोविड मामलों के उपचार और प्रबंधन की स्थिति को केवल ‘राम भरोसे’ माना जा सकता है। सरकार ने इस अवलोकन के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों को अव्यावहारिक आदेश जारी करने से रोकने के लिए एक आदेश जारी कर दिया। खैर, अदालत ने केवल तकनीकी अंतर किया, न कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा जो कुछ भी मतलब था उसके खिलाफ कुछ कहा। आपत्ति केवल आदेश जारी करने को लेकर थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टिप्पणियों को केवल ‘सलाह’ के रूप में लिया जाना चाहिए, न कि आदेश के रूप में।