Loading...
 
Skip to main content

View Articles

भारत में एक बार फिर गठबंधन युग की दस्तक

भाजपा 2014 की जीत को दुहरा नहीं पाएगी
हरिहर स्वरूप - 2019-01-22 09:51 UTC
भारत गठबंधन के युग में प्रवेश करने के लिए बिल्कुल तैयार है, क्योंकि एक दल का शासन समाप्त होता दिखाई दे रहा है। जैसा कि स्थिति है न तो भाजपा और न ही कांग्रेस अपने दम पर केंद्र या राज्यों में सरकार बनाने की स्थिति में है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को शायद आखिरी बार भारी बहुमत मिला था। इस साल के आम चुनावों में भगवा पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है और अगर उसे सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती है तो उसे गठबंधन बनाना होगा। यही हाल कांग्रेस का भी है। गठबंधन का मतलब अस्थिरता और अच्छे प्रशासन की कमी है। याद कीजिए जपमे अयाराम, गयाराम ”साठ के दशक और फिर प्रचलित अस्थिरता।

उभर रहे हैं नए राजनीतिक समीकरण

कोलकाता रैली से भाजपा विरोध को नई मजबूती मिली
अनिल सिन्हा - 2019-01-21 09:37 UTC
विपक्षी पार्टियों की कोलकाता रैली ने विपक्ष की एकता सिद्ध कर दी है। इसने २०१९ के चुनावों के संघर्ष की तस्वीर भी साफ कर दी। भारतीय जनता पार्टी इस उम्मीद में थी कि यह संभव नहीं हो पायेगा। लेकिन एकता सिर्फ जमीन पर ही नहीं उतरी है, बल्कि इससे जुड़े संकल्प भी दिखाई दे रहे हैं। लेकिन एकता रैली इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी बता रही है। यह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अकेला हो जाने की कहानी। देश के प्रधानमंत्री पद पर शायद ही ऐसा कोई आदमी पहले रहा हो जिसे अपना हर छोटा बड़ा बचाव खुद ही करना पड़ा हो। उन्होंने गुजरात के नजदीक सिलवासा में एक कार्यक्रम में कोलकाता रैली का जिस तरह मजाक बनाने की कोशिश की, उससे उनकी बेचारगी ही सामने आई। विपक्षी नेता उन पर जमकर हमले कर रहे हैं, लेकिन उनके बचाव में भारतीय जनता पार्टी के तय हमलावरों के अलावा कोई सामने नहीं आ रहा है। भाजपा में बहुत सारे लोग हैं जो इस तमाशे का खामोशी से आंनद भी ले रहे हैं। एनडीए का कोई दल उनके लिए खड़ा नहीं होता और शिव सेना जैसे सहयोगी तो विपक्ष के साथ ही खड़े हो जाते हैं। चुनाव के नजदीक आने पर हमले बढेंगे और प्रधानमंत्री का अकेलापन बढ़ेगा। उन्हें भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को याद करना चाहिए। ऐसे में उनके व्यवहार के कारण विरोधियों को भी उन पर हमला करने में संकोच होता था।

कमलनाथ की समय से होड़

लोकसभा चुनाव के पहले कुछ कर दिखाने की चुनौती
एल एस हरदेनिया - 2019-01-19 09:43 UTC
भोपालः मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने राज्य के प्रशासन और राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डालते हुए तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। तीन फैसलों में निजी व्यक्तियों को प्रशासन में शामिल करना, मीसा के पेंशनधारियों को मिल रहे पेंशन समाप्ति की घोषणा में सुधार करना और किसानों के लिए कर्जमाफी घोषणा की औपचारिक शुरुआत करना शामिल है।

दिल्ली कांग्रेस में शीला दीक्षित की ताजपोशी के निहितार्थ

लौटेगा दिल्ली में कांग्रेस का पुराना दौर?
योगेश कुमार गोयल - 2019-01-18 12:25 UTC
लोकसभा चुनाव से चंद माह पहले दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद से अजय माकन का इस्तीफा, उसके बाद 15 वर्षों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित की प्रदेशाध्यक्ष पद पर ‘शीला दीक्षित आई है, बदलाव की आंधी आई है’ नारों के साथ ताजपोशी और साथ ही तीन कार्यकारी अध्यक्षों हारून युसूफ, राजेश लिलोठिया तथा देवेन्द्र यादव की नियुक्ति, राजनीतिक हलकों में यह सब आम चुनाव के मद्देनजर पार्टी आलाकमान द्वारा जातीय और धार्मिक समीकरण साधने का प्रयास माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद अगले साल के शुरू में ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं, इस लिहाज से प्रदेश में पार्टी संगठन को पुनर्जीवित करने के जो प्रयास किए जा रहे हैं, उनके संकेत स्पष्ट हैं। अलग-अलग समुदायों से तीन कार्यकारी अध्यक्षों के जरिये पार्टी ने सभी जातियों और वर्गों के मतदाताओं को साधने का दांव खेला है।

भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन से निकले संकेत

प्रधान मंत्री का भाषण भी निराशा भरा था
अनिल जैन - 2019-01-17 10:27 UTC
दिल्ली के रामलीला मैदान में ठीक पांच साल पहले भी इसी जनवरी के महीने में भाजपा की राष्ट्रीय परिषद का अधिवेशन हुआ था। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज पर उनके सूर्योदय का दौर विधिवत प्रारंभ हो चुका था। उस अधिवेशन के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की हैसियत से अपना जो विजन देश के सामने रखा था, उसे सुनकर उनको प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध करने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था- ‘आज नरेंद्र भाई को सुनकर ऐसा लगा जैसे हम विवेकानंद को सुन रहे हैं।’ हालांकि आडवाणी की इस प्रतिक्रिया में वास्तविकता का कम और चापलूसी तथा परिस्थितियों के आगे समर्पण का भाव ही ज्यादा था। अब पांच साल बाद उसी रामलीला मैदान में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को सुनने के बाद उन्हें विवेकानंद की उपमा देने या उनके भाषण की अतिश्योक्तिपूर्ण तारीफ करने की स्थिति में कोई नहीं है।

उत्तर प्रदेश में माया-अखिलेश गठजोड़

नतीजों का फैसला करेंगी वंचित जातियां
उपेन्द्र प्रसाद - 2019-01-16 17:23 UTC
मायावती और अखिलेश यादव का गठजोड़ आखिर हो ही गया। 2017 के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद यह होना ही था। जिस तरह 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के पहले लालू यादव और नीतीश कुमार का गठजोड़ अपनी अपनी राजनीति बचाने के लिए हुआ था, उसी तरह उत्तर प्रदेश में मायावती और अखिलेश अपनी अपनी राजनीति बचाने के लिए एक हुए हैं। नीतीश और लालू का गठजोड़ सफल रहा। नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री एक बार और बने। राजनैतिक रूप से बिहार में अप्रासंगिक हो रहे लालू यादव ने अपने बेटे तेजस्वी को बिहार की राजनीति में नीतीश की सहायता से स्थापित कर दिया। सवाल उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश में भी माया और अखिलेश का यह गठजोड़ बिहार के लालू-नीतीश के गठजोड़ की तरह सफल हो पाएगा?

क्या कर्ज माफी से मिलेगी किसानों को राहत

किसानों को मुश्किल में डाल दे कर्ज माफी
राजु कुमार - 2019-01-16 17:19 UTC
किसानों के कर्ज माफी एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। पिछले साल संपन्न विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यह घोषणा की थी कि उसकी सरकार आने पर किसानों के कर्ज माफ किए जाएंगे। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से भाजपा को बेदखल करने में कांग्रेस की इस घोषणा का बड़ा हाथ रहा है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते ही कमलनाथ ने सबसे पहले कर्ज माफी की फाइल पर दस्तख्त किए। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि यदि 10 दिन में कर्जमाफी पर अमल नहीं हुआ, तो मुख्यमंत्री को बदल दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में ऐसी नौबत तो नहीं आई, लेकिन कर्ज में डूबे प्रदेश सरकार के लिए कर्ज माफी के लिए रकम जुटाना आसान नहीं है और यही वजह है कि इस योजना को स्वरूप देते-देते महीना भर का समय लग गया। अब मध्यप्रदेश सरकार ने ऋण माफी के लिए आवेदन पत्र जमा करना शुरू कर दिया है और मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि फरवरी के अंत तक पात्र किसानों के खाते में दो लाख रुपए तक की कर्ज माफी की रकम पहुंच जाएगी।

उत्तर प्रदेश में बुआ-बबुआ की जोड़ी

किस करवट बैठेगा ऊंट?
योगेश कुमार गोयल - 2019-01-15 16:42 UTC
लोकसभा को करीब 15 फीसदी सीटें देने वाले देश के बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में ‘बुआ-बबुआ’ का 38-38 सीटों पर गठबंधन हो जाने और देशभर में महागठबंधन बनाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस के इस सूबे में अलग-थलग पड़ जाने के बाद एक बार फिर यह बात आईने की तरह साफ हो गई है कि भारतीय राजनीति में न कोई किसी का स्थायी दुश्मन है और न दोस्त और न ही भारतीय राजनीति में नैतिकता और शुचिता नाम की कोई चीज शेष रह गई है। सपा-बसपा गठबंधन के बाद अब हर किसी की नजरें इसी राज्य की भावी राजनीति पर केन्द्रित हैं। दरअसल महागठबंधन बनाने के प्रयासों में जुटे विपक्षी दलों की यही कोशिश रही है कि किसी भी प्रकार भाजपा को सत्ता से बाहर किया जा सके और इस लिहाज हर किसी की नजरें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश पर ही टिकी थी क्योंकि कुल 545 सीटों वाली लोकसभा में 80 सीटें अकेले उत्तर प्रदेश से ही हैं, जिनमें 63 सामान्य और 17 आरक्षित सीटें हैं।

खसरा और रूबेला टीकाकरण से कोई भी बच्चा छूट न पाए

टीकाकरण की सफलता बच्चों को बीमारियों से रखेगी दूर
राजु कुमार - 2019-01-14 18:25 UTC
कल से मध्यप्रदेश में खसरा और रूबेला टीकाकरण अभियान का शुभारम्भ होने जा रहा है। अभियान अगले एक माह तक चलाया जाएगा। यह देशव्यापी मीजल्स और रूबेला टीकाकरण अभियान का हिस्सा है। अभियान के तहत 9 माह से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को टीका लगाया जाएगा। इसमें सरकारी एवं निजी शालाओं, अस्पताल एवं अन्य संस्थाओं को शामिल किया गया है, जिससे कि कोई बच्चा छूटने न पाए। मध्यप्रदेश आज भी देश के उन राज्यों में शुमार है, जहां कुपोषण, शिशु मृत्यु दर एवं बाल मृत्यु दर ज्यादा है। निमोनिया, डायरिया, खसरा जैसी बीमारियां भी बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। लेकिन पिछले दो-तीन सालों से बाल स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार दिखाई दे रहा है। इसका एक बड़ा कारण है टीकाकरण के प्रति लोगों में आई जागरूकता।

मध्यप्रदेश विधानसभा में परंपरा का उल्लंघन

अच्छा होता भाजपा ने अपना स्पीकर उम्मीदवार नहीं दिया होता
एल. एस. हरदेनिया - 2019-01-14 18:21 UTC
भोपालः "संविधान के अनुसार स्पीकर की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंतु परंपरा और व्यवहार के कारण स्पीकर की स्थिति संवैधानिक प्रावधानों से भी ऊँची और महत्वपूर्ण है"। ये शब्द हैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जो उन्होंने संसदीय प्रजातंत्र में स्पीकर की स्थिति का मूल्यांकन करते हुए कहे थे।