एक देश और एक संविधान
फिर सभी के लिये भी कानून भी एक हो!
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2017-08-26 11:51 UTC
देश आजाद तो हो गया पर सामाजिक समरसता के मामले में हम आज भी परतंत्र है। जिसका ताजा उदाहरण मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक का मामला अभी भी मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड के गिरफ्त में है। इस समुदाय में इस नियम के खिलाफ आवाज उठती रही , प्रभावित महिलाओं की चीख पुकार गूंजती रही पर कोई सुनने वाला नहीं था। पीड़ित महिला को तुच्छ मुवावजा देकर इस समुदाय में धर्म की आड़ में पुरुष वर्ग की मनमानी चलती रही। जबकि इसी समुदाय में भारत को छोड़ विदेश के अधिकांश देश तीन तलाक के बंधन से मुक्त है। पूर्व में हिन्दू धर्म की महिलाएं भी सती प्रथा से पीड़ित रही । भारतीय संविधान में सती प्रथा बंद करने के कानून बने और आज इस वर्ग की महिलाएं इस प्रथा से मुक्त है। इसी तरह मुस्लिम समुदाय में वर्षो से धर्म की आड़ में चल रहे तीन तलाक बंद करने के कानून शीघ्र से शीघ्र से भारतीय संविधान में आना चाहिए जिससे मुस्लिम वर्ग की पीडित महिलाओं को इस असमाजिक बंधन से मुक्ति मिल सके । जब हमारा देश एक है, संविधान एक है सभी धर्मो के लिये एक कानून क्यों नहीं ? इस पर मंथन होना चाहिए ।