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लालू नीतीश में गठबंधन का खेल

बिहार की जमीनी हकीकत बाधा बन रही है
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-06-08 17:29 UTC
एक बार फिर लालू और नीतीश की तरफ से गठबंधन का संकल्प व्यक्त किया गया है और इस संकल्प के इजहार का जिम्मा समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव को दिया गया। बीच बीच में ऐसा करते रहना पड़ता है, क्योंकि नीतीश और लालू के समर्थक और खुद दोनों नेता भी कभी कभी ऐसे ऐसे बयान दे डालते हैं जिससे लगता है कि गठबंधन शुरू होने के पहले ही समाप्त हो गया। जैसे लालू यादव के दल के दूसरे नंबर के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपने दल के लिए 145 सीटों पर दावा ठोंक दिया, तो नीतीश कुमार ने कह दिया कि चुनाव लड़ने के लिए आपके पास 243 सीटें उपलब्ध हैं। यानी उन्होंने राजद को सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की सलाह या चुनौती दे डाली।
भारत

राहुल गांधी की महू सभा: मध्यप्रदेश भाजपा नेता परेशान

एल एस हरदेनिया - 2015-06-07 01:26 UTC
भोपालः महू में राहुल गांधी की सभा में कांग्रेस के लगभग सभी बडे नेता मौजूद थे। दो जून को वह सभा हुई थी। महू सेना का एक छोटा मुख्यालय है। उसका महत्व इसलिए है कि वह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जन्मस्थान है। वहां रैली कर राहुल गांधी अपने आपको दलित हितों का चैंपियन साबित करना चाहते थे। ऐसा वे कर पाए हैं या नहीं, इसका पता तो बाद में चलेगा, लेकिन उनकी रैली के कारण भाजपा खेमे में बेचैनी जरूर पैदा हो गई है।
भारत: दिल्ली

केजरीवाल भ्रष्टाचार के मसले पर आरपार के मूड में

अरविंद के जाल में फंस रही है केन्द्र सरकार
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-06-05 01:11 UTC
नई दिल्लीः अरविंद केजरीवाल सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो के लिए दूसरे राज्यों से सुरक्षा बल मंगाने का एक ऐसा फैसला किया है, जिससे केन्द्र सरकार एक बार फिर तिलमिला गई है। केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले उपराज्यपाल नजीब जंग ने घोषणा कर डाली कि दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो यानी एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के मुखिया वे हैं और उनसे दिल्ली से बाहर से सुरक्षा बल मंगाने की इजाजत केन्द्र सरकार ने नहीं मांगी है।
भारत

उत्तर प्रदेश अभी भी अखिलेश के नियंत्रण में

नेतृत्वहीन भाजपा और कांग्रेस टक्कर देने की स्थिति में नहीं
प्रदीप कपूर - 2015-06-04 01:18 UTC
लखनऊः उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव 2017 में होने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस वहां समाजवादी पार्टी को टक्कर देने की कोशिश कर रही है। लेकिन दोनों में से किसी के भी पास प्रदेश स्तरीय नेता नहीं है। इसके कारण समाजवादी पार्टी को टक्कर दे पाना उन दोनों के लिए कठिन हो रहा है।
भारत

नालंदा विश्वविद्यालय: दो संकायों में शिक्षण कार्य प्रारंभ

एम.वाई. सिद्दीकी - 2015-06-02 15:33 UTC
भविष्य में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में अपनी जगह बनाने वाले नालंदा विश्वविद्यालय, जिसका गठन विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 के तहत हुआ था, अब कार्य करने लगा है। राजगीर (बिहार) में स्थित इस विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र और पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र में शिक्षण कार्य में प्रारंभ हो गया है। इसके साथ ही हमारे देश में एक ऐसे नए मील का पत्थर सुशोभित हो गया है जो देश को ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय संचालित करने का गौरव प्रदान करता है। यह हमारे लिए वैश्विक स्तर पर अकादमिक क्षेत्र में नई उपलब्धि का सूचक है।
भारत

मोदी के विरोध में राहुल की कसरत

वह बिना किसी तैयारी के लुढ़क हैं
अमूल्य गांगुली - 2015-06-02 15:30 UTC
अमेरिका में एंबुलेंस चेजर एक पद है। एंबुलेंस चेजर बीमा के उन एजेंटों को कहा जाता है, जो बीमार लोगों को बीमा का लाभ दिलाने का वायदा करते हैं और उनके मेडिकल बिल का भुगतान कराने का जिम्मा लेते हैं। लगता है कि राहुल गांधी ने भी अपने ऊपर इसी तरह की कुछ जिम्मेदारी ले रखी है।
भारत

नरेन्द्र मोदी और जाति का सवाल

केन्द्र सरकार का पहला साल
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-06-01 15:26 UTC
नरेन्द्र मोदी की सरकार के एक साल पूरे होने के बाद इस सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा करने के क्रम में इस सवाल का जवाब ढूंढ़ना लाजिमी हो जाता है कि समाज की जाति व्यवस्था को इस सरकार ने किस तरह प्रभावित किया है। जाति भारत की हकीकत है। इस पर सार्वजनिक चर्चा करने में भले बौद्धिक वर्ग के अधिकांश लोग परहेज रखते हों, लेकिन जाति सिर्फ शादी विवाह के लिए रिश्ते ढूंढ़ने का सबसे बड़ा मंच ही नहीं है, बल्कि राजनीति को प्रभावित करने वाली शायद आज की सबसे बड़ी संस्था है। जाति व्यवस्था इतनी मजबूत होकर उभरी है कि इसके सामने हमारे देश की दलीय व्यवस्था भी अपना सिर झुका देती है और उम्मीदवारों के चयन से लेकर मंत्री के मनोनयन तक में इसका ध्यान रखा जाता है।
भारत

मोदी सरकार का आर्थिक राजनय

एक बड़ी ताकत के रूप में उभर रहा है भारत
उपेन्द्र प्रसाद - 2015-05-30 15:18 UTC
यदि नरेन्द्र मोदी सरकार किसी मोर्चे पर सबसे ज्यादा सफल रही है, तो वह आर्थिक राजनय का ही मोर्चा है। सोवियत संघ के पतन के बाद साम्यवादी सोवियत और पूंजीवादी देशों के बीच चल रहा शीतयुद्ध एकाएक समाप्त हो गया और उसी के साथ गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने भी दल तोड़ दिया। गुटनिरपेक्ष आंदोलन के नेता के रूप में भारत की दुनिया में एक विशेष पहचान थी, शीतयुद्ध की समाप्ति के साथ उसकी वह पहचान भी समाप्त हो गई थी। जाहिर है भारत अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी भूमिका को सिकुड़ता हुआ देख रहा था, लेकिन आर्थिक विकास दर की वृद्धि और एक बड़े आधुनिक बाजार के रूप में उभरने के साथ साथ भारत अपनी एक नई पहचान पाने के लिए इंतजार कर रहा था।
भारत: दिल्ली

केजरीवाल के सामने बड़ी चुनौतियां

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुश्किल
कल्याणी शंकर - 2015-05-29 16:28 UTC
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच क्या समानता है? अपने इर्द गिर्द व्यक्तिवादी कल्ट विकसित कर दोनों एक से एक सुनहरे वायदे कर सत्ता में आए हैं। दोनों का अपने अपने दलों पर पूर्ण नियंत्रण है। अब दोनों अपने अपने वायदों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दोनों सत्ता को अपने हाथों में केन्द्रित रखने के लिए मशहूर हैं। मोदी ’’अच्छे दिन’’ और केजरीवाल ’’ पांच साल केजरीवाल’’ का नारा लगाकर सत्ता में आए। मोदी सरकार के साल की तुलना केजरीवाल सरकार के 100 दिन से करना उचित नहीं। इसका कारण यह है कि दोनों 5 सालों के लिए चुने गए हैं। इसके बावजूद सच्चाई यह है कि दोनों के बीच तुलनाएं जारी हैं।

केरल प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी तेज

मणि के प्रति चांडी के नरम रुख पर चेनिंथाला गुट नाराज
पी श्रीकुमारन - 2015-05-28 15:35 UTC
तिरुअनंतपुरमः केरल प्रदेश कांग्रेस में गुटों के बीच तनाव तेज हो गया है। इसका कारण मुख्यमंत्री चांडी को वित्तमंत्री के एम मणि के प्रति अपनाया जा रहा नरम रवैया है।
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