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विश्व हिन्दू परिषद की अयोध्या यात्रा

भाजपा को इससे शायद ही फायदा हो
कल्याणी शंकर - 2013-08-30 17:27 UTC
पिछले दिनों विफल 84 कोसी परिक्रमा के दौरान भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिन्दू परिषद के बीच हुई रस्साकशी में किसने क्या खोया और किसने क्या पाया? यदि परिषद ने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मन्दिर बनाने के लिए फिर से अभियान चलाया और इसके कारण प्रदेश का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ, तो जाहिरा तौर पर इसका फायदा भाजपा और समाजवादी पार्टी को हो सकता है।

अज्ञात बलात्कारियों की गिरफ्तारी और आसाराम से नरमी

कानून दो तरह से काम क्यों कर रहा है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-29 17:36 UTC
भारतीय संविधान का आर्टिकिल 14 कहता है कि कानून की नजर में सब बराबर है। हमारे लोकतंत्र की बुनियाद समता पर टिकी हुई है। पर पिछले दिनों बलात्कार की दो घटनाओं पर कानून का अलग अलग ढंग से काम करना यह साबित करता है कि समता का वह सिद्धांत अभी भी संविधान के पन्नों तक ही सीमित है। 15 अगस्त को हम आजादी का दिवस मनाते हैं। और उसी दिन जोधपुर के एक आश्रम में एक नाबालिग लड़की के साथ उसके कथित धर्मगुरू द्वारा कथित बलात्कार की घटना होने की बात सामने आई। 5 दिनों के बाद मामला दर्ज भी किया गया।

हरियाणा की राजनीति में उथल पुथल

कांग्रेस को अपने अंदर से ही मिल रही है चुनौती
बी के चम - 2013-08-28 05:43 UTC
चंडीगढ़ः हरियाणा का राजनैतिक परिदृश्य बदलने जा रहा है। किस तरह के बदलाव वहां होने वाले हैं, वे पिछले कुछ दिनों की घटनाओं के आधार पर अभी से समझा जा सकता है।

केरल यूडीएफ में घमसान

युवा कांग्रेस ने मुख्य सचेतक का पुतला जलाया
पी श्रीकुमारन - 2013-08-26 12:42 UTC
तिरुअनंतपुरमः सोलर पैनल घोटाले के कारण केरल की चांडी सरकार पहले से ही समस्या का सामना कर रही है। विपक्ष चांडी का इस्तीफा मांग रहा है और आंदोलन कर रहा है। विपक्षी हमले के बीच यूडीएफ के अंदर चल रहा घमासान भी चांडी सरकार के लिए महंगा साबित हो रहा है।

वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है भारत

दोमुही बातों से बात नहीं बनेगी
नन्तू बनर्जी - 2013-08-24 10:34 UTC
अर्थशास्त्री कौशिक बसु के विचार अब वह नहीं रहे, जो पिछले साल थे। पिछले साल अप्रैल महीने में उन्होने जो कहा था, अब अगस्त 2013 में वे अलग सुर अलाप रहे हैं। इसका एक कारण तो शायद यह है कि वे अब उस पद पर नहीं हैं, जिस पद पर वे अप्रैल 2012 में थे। उस समय वे तत्कालीन वित्त मंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। उस समय वित्त मंत्री थे प्रणब मुखर्जी, जो आज देश के राष्ट्रपति हैं। उनके राष्ट्रपति बनने के पहले ही श्री बसु ने अपनी प्रोन्नति करवा ली थी और अब वे विश्व बैंक के उपाध्यक्ष व मुख्य अर्थशास्त्री हैं।

देश की अर्थव्यवस्था भारी संकट में

मितव्ययता के उपाय से स्थिति कुछ हद तक संभल सकती है
कल्याणी शंकर - 2013-08-24 08:19 UTC
आगामी लोकसभा चुनाव के एक साल भी नहीं रह गए हैं। कुछ विधानसभाओं के चुनाव तो सिर पर ही हैं। ऐसे माहौल में क्या अर्थव्यवस्था की पस्त अवस्था इन चुनावों के दौरान महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। 1992 में जब बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे, तो उन्होंने नारा दिया था, ’’बेवकूफ अर्थव्यवस्था’’। क्या भारत के राजनेता भी अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति से सीख लेंगे?

निवेश कीजिए नागरिकता लीजिए

सेंट किट्स की इस नीति का लाभ भारत के नागरिक भी उठा सकते हैं
देव बाथ - 2013-08-22 13:22 UTC
भूमंडलीकरण के इस युग में व्यवसायी अब राष्ट्र की सीमा को लांघ रहे हैं और वे एक से ज्यादा देश की नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं। उन्हें पता है कि ज्यादा देशों की नागरिकता रखने के क्या क्या फायदे हैं।

मनमोहन ने बर्बाद किए 10 साल

राजनैतिक नपुंसकता का एक दशक
अमूल्य गांगुली - 2013-08-22 13:19 UTC
जब मनमोहन सिंह 15 अगस्त को लाल किले पर भाषण देने के लिए खड़े हुए थे, तो शायद उनके दिमाग में यह बात जरूर उनके आई होगी कि वह उस स्थान से अंतिम बार देश को संबोधित कर रहे हैं। शायद यह भी उनके दिमाग में आया होगा कि यदि उन्होंने पिछले 10 सालों में अपनी चाह के अनुरूप आर्थिक सुधार कार्यक्रमांे को आगे बढ़ाया होता तो आज देश में स्थिति कुछ और ही होती। अपने से अलग विचार रखने वाले पार्टी नेताओं के दबाव में आने का अफसोस भी उन्हें जरूर हुआ होगा।

आर्थिक विनाश की ओर बढ़ रहा है भारत

कब चेतेंगे हमारे नीति निर्माता
उपेन्द्र प्रसाद - 2013-08-21 08:04 UTC
देश की अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रही है। आजादी के बाद इस तरह की भयावह तस्वीर आज तक कभी नहीं दिखी थी। मुद्रास्फीति की दर और तेज हो रही है और खासकर खाने की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में और भी तेजी आ रही है। इसके साथ अर्थ व्यवस्था की विकास दर गिरती जा रही है। यानी देश के सामने चौतरफा आर्थिक संकट है। हम किसी भी दिशा में अपने आपको संकट से मुक्त नहीं पा रहे हैं। यदि अनाज के रिकार्ड उत्पादन की बात को मान भी लें, तो उस रिकार्ड उत्पादन का लाभ न तो उत्पादक किसानों को मिल रहा है और न उपभोक्ताओं को। यानी कृषि क्षेत्र की विकास दर का फायदा भी आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

मध्यप्रदेश में चुनावी जंग तेज

चुनावी रैलियों मे शिवराज ने स्थापित की बढ़त
एल एस हरदेनिया - 2013-08-21 08:00 UTC
भोपालः मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा जन आशीर्वाद यात्रा के साथ विधानसभा का चुनावी जंग तेज हो गया है। इसके पहले कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी और उस यात्रा के बाद शंखनाद रैली करने का फैसला किया था।
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