भारत
ज्योति बसु के खोने से अनाथ सीपीएम
पश्चिम बंगाल की राजनीति में होगा बदलाव
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2010-01-20 12:45 UTC
अब जब ज्योति बसु नहीे रहे, तो उसका असर प्रदेश की राजनीति पर पड़ना लाजिमी है। पर उसका असर क्या होगा, इसके बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) पर उनके न होने का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि अपने गठन काल 1964 से ही यह पार्टी श्री बसु के छाये में थी। प्रमोद दासगुप्ता और ज्योति बसु इसके गठन के बाद इसके दो सबसे बड़े नेता था। दासगुप्ता के निधन के बाद श्री बसु इसके एकमात्र सबसे बड़े नेता रह गए थे। पार्टी का कोई और नेता उनकी लोकप्रियता और उनके करिश्मे की बराबरी करने की स्थिति में कभी भी नहीं रहा।