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गीता पर गुजरात सरकार का फैसला असंवैधानिक है

हिंदुत्व पर एक वैकल्पिक दृष्टि के लिए वाम और लोकतांत्रिक ताकतों को लड़ना होगा
प्रकाश कारत - 2022-03-25 12:00
गुजरात के शिक्षा मंत्री द्वारा घोषणा कि शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से कक्षा 6 से कक्षा 12 के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में भागवत गीता को स्कूलों में पढ़ाया जाएगा, राज्य के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत का उल्लंघन है।

अरविंद केजरीवाल युवा हैं, उनके पास समय है, उन्हें 2029 के लिए काम करना चाहिए

गुजरात और हिमाचल में आप की नींव से कांग्रेस के चिंतित होने के कारण
कल्याणी शंकर - 2022-03-24 15:29
क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस पार्टी या दोनों के लिए चुनौती बनकर उभरेंगे? इसमें कोई शक नहीं कि पंजाब जीतने से उन्हें अपनी आम आदमी पार्टी के पंख दूसरे राज्यों में फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन क्या वह अपनी महत्वाकांक्षा हासिल कर सकते हैं? यह मुश्किल हो सकता है क्योंकि अन्य क्षेत्रीय क्षत्रपों की अपनी जागीर पर उसकी वृद्धि को रोकने के लिए एक मजबूत पकड़ है।

गणेश शंकर विद्यार्थी की शहादत

दंगा रुकवाने के लिए उन्होंने मृत्यु का वरण कर लिया
एल. एस. हरदेनिया - 2022-03-23 09:42
कौन भूल सकता है कानपुर के उस भीषण नर-संहारकारी हिन्दू मुस्लिम दंगे को? बीसियों मंदिर और मस्जिदें तोड़ी और जलाई गइंर्, हजारों मकान और दुकानें लुटीं और भस्मीभूत हुईं। लगभग 75 लाख की सम्पत्ति स्वाहा हो गई, करीब 500 से भी ऊपर आदमी मरे और हजारों घायल हुए। कितनी माताओं के लाल, काल के गाल में समा गए, कितनी युवतियों की माँग का सिन्दूर धुल गया, हाथ की चूड़ियाँ फूट गईं, कितने फूल से कोमल और गुलाब से आकर्षक नवजात शिशु और बच्चे मूली-गाजर की तरह काट डाले गये और कितने मातृ-पितृहीन होकर निराश्रित और निःसहाय बन गए। कितने लखपति, भिखारी बन गये। ऐसा भंयकर, ऐसा सर्वनाशकारी, ऐसा आतंकपूर्ण था कानपुर का वह दंगा! परंतु यह सब होते हुए भी इसका नाम चिरस्थायी न होता, यदि गणेशशंकर विद्यार्थी आत्माहुति देकर, हिन्दू-मुसलमानों के लिए एक महान और सर्वथा अनुकरणीय आदर्श उपस्थित न कर जाते।

चिकित्सा नैतिकता को वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर अद्यतन किया जाना चाहिए

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने बड़ी जल्दबाजी में लिया चरक पर फैसला
डॉ अरुण मित्रा - 2022-03-22 11:18
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (यूजीएमईबी) ने 17 फरवरी 2022 को आयोजित अपनी वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग में डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज करते समय चिकित्सा नैतिकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए हिप्पोक्रेटिक शपथ को बदलने का फैसला किया है। इसकी जगह चरक शपथ लेगी। चरक हमारे देश के चिकित्सा के इतिहास में एक महान व्यक्ति हैं। प्राचीन भारत के चिकित्सा के इतिहास को याद करते हुए दो नाम हैं जिन्हें श्रद्धा के साथ लिया जाता है। चरक 300 ईसा पूर्व में एक चिकित्सक थे और सुश्रुत 600 ईस्वी में एक सर्जन थे।

वाम दलों को राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजों से उचित सबक लेना होगा

धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक विकल्प बनाने का सही समय
बिनय विश्वम - 2022-03-21 11:20
केंद्र में दक्षिणपंथी सरकार का नेतृत्व करने वाली पार्टी हाल ही में हुए चुनावों में पांच में से चार राज्यों में विजयी हुई है। वह पार्टी अपनी निर्विवाद फासीवादी विशेषताओं के साथ अपने युद्धाभ्यास कौशल के लिए भी जानी जाती है। उन्होंने विभिन्न माध्यमों से चुनाव मशीनरी के प्रबंधन में विशेषज्ञता साबित की है। चुनावों में कॉरपोरेट्स द्वारा भारी मात्रा में संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विजय प्राप्त करने के लिए सत्ताधारी दल द्वारा इसका चालाकी से उपयोग किया गया। चुनाव अधिक से अधिक एक बड़े धन का मामला बनता जा रहा है, जहां काला और सफेद दोनों धन बहते हैं।

हिटलर से प्रेरित है ‘कश्मीर फाइल्स’ की सरकारी मार्केटिंग

नाजी सरकार की ओर से ऐसी फिल्मों को पुरस्कृत भी किया जाता था
अनिल जैन - 2022-03-19 09:42
देश बदल नहीं रहा है बल्कि बहुत कुछ बदल चुका है! एक वह समय था जब भारत के प्रधानमंत्री अपने समय के फिल्मकारों को ‘हकीकत’, ‘प्यासा’, ‘नया दौर’ जैसी फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे और आज वह समय आ गया है जब मौजूदा प्रधानमंत्री एक यौन कुंठित और तीसरे दर्जे के फिल्मकार की अधूरा सच और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर बनाई गई बदअमनी फैलाने वाली फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ की मार्केटिंग कर रहे हैं। यह विडंबना तब के और अब के प्रधानमंत्री के बीच उनकी औपचारिक पढ़ाई-लिखाई के फर्क के साथ ही उनके बौद्धिक स्तर और उनके इरादों के फर्क को भी रेखांकित करती है।

पांच राज्यों में कांग्रेस की शर्मनाक पराजय

अब तो गांधी परिवार को नेतृत्व छोड़ ही देना चाहिए
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-03-17 11:21
कांग्रेस की हालत आज जैसी है, वैसी इसके इतिहास में कभी नहीं थी। पिछले दिनों पांच राज्यों की विधानसभा के चुनावों में इसकी हुई दुर्गति अभूतपूर्व है। उत्तर प्रदेश, जो कभी कांग्रेस का गढ़ था, देश की पुरानी पार्टी के लिए अजनबी या यूं कहिए कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले इस प्रदेश के लिए कांग्रेस अजनबी बन गई है। वहां कांग्रेस के मात्र दो विधायक जीतकर आए। वोटों का प्रतिशत इतना कम कि उतने पर निर्वाचन आयोग किसी नई पार्टी को प्रदेश स्तरीय पार्टी की मान्यता तक नहीं देता। यानी कांग्रेस अब उत्तर प्रदेश में एक क्षेत्रीय पार्टी की मान्यता पाने लायक भी नहीं रह गई है।

पांच राज्यों में हार के बाद कांग्रेस आलाकमान के पास मुंह छुपाने के लिए कुछ भी नहीं

पार्टी को बचाने के लिए वे जिम्मेदारी लें, जिनके ऊपर जिम्मेदारी है
अरुण श्रीवास्तव - 2022-03-16 09:44
सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी के साथ पीछे हटने की पेशकश की। यह गांधी परिवार को कांग्रेस के दायित्व के आरोप से बचाने के लिए सोनिया का एक रणनीतिक कदम था यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनका बेटा पार्टी को निर्देशित करना जारी रखे। कागज पर कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो भाजपा का मुकाबला कर सकती है, लेकिन हकीकत यह है कि यह काफी कमजोर हो गई है और बिना मस्तूल के एक बड़े जहाज में बदल गई है।

हिजाब विवाद के कारण ही भाजपा जीती

अनिर्णित मतदाताओं ने इसके असर से अपने मत भाजपा को दे डाले
उपेन्द्र प्रसाद - 2022-03-15 09:55
पंजाब के अलावा अन्य राज्यों में भाजपा की जीत को मोदी के कारण हुई जीत बताई जा रही है। चूंकि मोदी के चेहरे पर यह चुनाव भाजपा लड़ रही थी, इसलिए इसे गलत भी नहीं कहा जा सकता, लेकिन जीत में यदि किसी ने सबसे ज्यादा भूमिका निभाई तो वह भूमिका हिजाब विवाद की थी। यह विवाद कर्नाटक में शुरू हुआ, जहां चुनाव नहीं था, लेकिन वहां भाजपा की सरकार थी। यह विवाद सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय आयाम प्राप्त कर लिया। वैसे मीडिया के कारण एक छोटे से स्थानीय विवाद के राष्ट्रीय स्वरूप में आ जाना अब बहुत कठिन नहीं है, लेकिन यहां तो चुनाव हो रहे थे और इसमें भारतीय जनता पार्टी को फायदा होना था, तो इसे राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण करने में देर नहीं लगी। हिजाब समर्थकों ने भी अति उत्साह दिखाया और उन्होंने तो इसका अंतरराष्ट्रीयकरण तक कर दिया। और इसका राजनैतिक फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ।

मणिपुर में बीजेपी की जीत का पूर्वोत्तर क्षेत्र पर पड़ेगा बड़ा असर

केवल 16.83 प्रतिशत वोट शेयर के साथ कांग्रेस का भविष्य खराब
सागरनील सिन्हा - 2022-03-14 10:31
हर बार जब प्रमुख बुद्धिजीवियों, प्रतिष्ठित पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह प्रचार करने की कोशिश करता है कि भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व एक अतीत है, तो भगवा पार्टी भारी जनादेश के साथ राज्यों को जीतकर जवाब देती है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों में भगवा पार्टी के इतिहास को राष्ट्रीय मीडिया द्वारा बार-बार कहा गया है। यह निस्संदेह सच है। लेकिन राष्ट्रीय मीडिया में जिस बात को ज्यादातर नजरअंदाज किया गया, वह यह है कि भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक और इतिहास रच दिया है।