हिंसा की संक्रामक प्रक्रिया को रोकने में हो सकती है डाक्टरों की भूमिका
सामाजिक विकृतियां ही हैं उनकी जड़ें, उनपर सामूहिक कुठाराघात आवश्यक
-
2023-08-10 12:49 UTC
देश के कई हिस्सों में हाल की घटनाओं ने भारतीय समाज के समझदार तत्वों की चेतना को झकझोर कर रख दिया है। आज़ादी के समय शिक्षा का स्तर बहुत निम्न था, गरीबी चरम पर थी, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) मात्र 2.7 लाख करोड़ था वह भी 34 करोड़ की आबादी के लिए, जो दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 3% ही था। उस समय भी भारत के लोगों ने धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र पर आधारित संविधान को अपनाने का विकल्प चुना। यह इसके बावजूद था कि विभाजन के समय बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे और दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा जनसंख्या विस्थापन हुआ था।