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दिल्ली विधानसभा चुनाव-1998

शर्मनाक हार के साथ भाजपा सत्ता से बेदखल, शीला युग शुरू
अनिल जैन - 2020-02-07 15:32
दिल्ली विधानसभा का तीसरा चुनाव नवंबर 1998 में हुआ। उस समय तक राष्ट्रीय राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका था। 1996 के आम चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारकर सत्ता से बाहर हो चुकी थी। देश गठबंधन राजनीति के युग में प्रवेश कर चुका था। गैर भाजपा विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चा की दो अल्पकालिक सरकारें देश देख चुका था और फरवरी 1998 में हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए की सरकार केंद्र में बन चुकी थी। उसी सरकार में मंत्री सुषमा स्वराज से इस्तीफा दिला कर भाजपा ने उन्हें दिल्ली विधानसभा चुनाव के ऐन पहले दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया था। दूसरी तरफ केंद्र की सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व भी पीवी नरसिंहराव के हाथ से निकलकर सीताराम केसरी के पास होता हुआ फिर से गांधी-नेहरू परिवार के हाथों में आ चुका था और सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बन चुकी थीं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव-1993

भाजपा की धमाकेदार जीत और पांच साल में तीन मुख्यमंत्री
अनिल जैन - 2020-02-06 09:50
देश की आजादी के बाद 1952 में गठित दिल्ली की पहली विधानसभा को उसके एक कार्यकाल यानी पांच साल के बाद ही खत्म कर दिल्ली को पूरी तरह केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। फिर 1966 से 1992 तक दिल्ली में महानगर परिषद रही। महानगर परिषद का चुनाव भी 1983 में आखिरी बार हुआ था, जिसमें कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया था। वर्ष 1991 में 69वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम, 1991 के तहत केंद्र शासित दिल्ली को औपचारिक रूप से एक राज्य के रूप में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित कर यहां विधानसभा, मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सीटों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान निर्धारित किए गए, जिनके मुताबिक 1993 में फिर विधानसभा चुनाव का सिलसिला शुरू हुआ।

हिन्दू राष्ट्र की ओर बढ़ रहे हैं मोदी सरकार के कदम

संघ का उद्देश्य संघीय व्यवस्था को समाप्त करना भी है
एल एस हरदेनिया - 2020-02-05 12:01
जब से भारतीय जनता पार्टी ने केन्द्र मेें बहुमत हासिल किया है तब से अत्यधिक धीमी गति से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेेंडे पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। वैसे तो संघ का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एजेंडा भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना है। परंतु यह काम एक झटके में नहीं किया जा सकता। अतः उसे अत्यधिक चतुराई से किया जा रहा है। सन् 2014 के आमचुनाव में भी भाजपा ने लोकसभा में बहुमत हासिल किया था परंतु 2014 से 2019 तक भाजपा ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे ऐसा लगा हो कि उसके कदम हिन्दू राष्ट्र की तरफ बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह था कि भाजपा नहीं चाहती थी वह कोई ऐसा काम करे जिससे उसे 2019 में बहुमत से हाथ धोना पड़े। जब भाजपा का नेतृत्व लालकृष्ण आडवाणी के हाथ में था तब वे कहा करते थे कि इस समय हमारे तीन प्रमुख लक्ष्य हैंः 1. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण; 2. समान नागरिक संहिता बनाना और 3. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना।

दिल्ली विधानसभा का पहला आम चुनाव

चौधरी ब्रह्म प्रकाश चुने गए थे दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री
अनिल जैन - 2020-02-04 16:41
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की नई विधानसभा चुनने के लिए आगामी आठ को होने जा रहे चुनाव को मीडिया के विभिन्न माध्यमों में दिल्ली विधानसभा का सातवां चुनाव बताया जा रहा है, लेकिन वस्तुतः यह आठवां चुनाव है। दिल्ली विधानसभा का पहला चुनाव देश आजाद होने के बाद अक्टूबर 1951 में हुए पहले आम चुनाव के साथ ही हुआ था, जिसका नतीजा मार्च 1952 में आया था।

फैज भारत और पाकिस्तान के बीच एक पुल थे

शायर की बेटी ने विवादित नज्म पर पैदा भ्रम को दूर किया
शंकर रे - 2020-02-03 11:06
प्रसिद्ध उर्दू कवि फैज अहमद फैज कभी भी भारत और पाकिस्तान के बीच एक पुल के रूप में कार्य करने का मार्ग प्रशस्त करना नहीं छोड़ा। अपनी मृत्यु के कई दशक के बाद भी वे अपना यह काम बतौर कर रहे हैं। हाल की घटनाओं ने केवल यह एक बार फिर साबित किया है। अनादोलु एजेंसी के साथ एक विशेष साक्षात्कार में लाहौर स्थित बड़ी बेटी सलीमा हाशमी ने कहा कि उनके शब्द दिन लगातार दिन बीतने के साथ अधिक से अधिक सार्थक होते जा रहे हैं। वे खुद एक प्रसिद्ध कलाकार, चित्रकार और शिक्षक के रूप में ख्यात हैं। वह ‘हम देखेंगे’ कविता के बारे में विवाद का जिक्र कर रही थीं, जो पिछले महीने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के कानपुर परिसर में गाया गया था।

चुनावी बांड स्कीम भाजपा को लाभ पहुंचा रही है

पारदर्शिता की कमी के कारण यह लोकतंत्र के लिए घातक है
के रवीन्द्रन - 2020-02-01 11:26
चुनाव आयोग को सौंपी गई 2018-19 के लिए पार्टी की ऑडिट रिपोर्ट में 2,410 करोड़ रुपये से अधिक की कुल आय दर्शाई गई। पिछले वर्ष की रिपोर्ट में दर्शाई गई उसकी 1,027 करोड़ रुपये की तुलना में यह 134 प्रतिशत की वृद्धि है।

मोदी को अपनी सरकार की विश्वसनीयता स्थापित करनी चाहिए

भाजपा नेताओं का एक वर्ग बेचैन है
अरुण श्रीवास्तव - 2020-01-31 10:31
अचानक एक सहज सवाल ने बिहार के राजनीतिक हलकों में चक्कर लगाना शुरू कर दिया है, जिससे भाजपा के खेमें में बेचैनी छा रही है। वह सवाल यह है कि भाजपा सरकार कौन चला रहा है? वह नरेंद्र मोदी हैं या अमित शाह?

तिकड़ी के खिलाफ प्रदर्शन जारी

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अहम
अमृतानंद चक्रवर्ती - 2020-01-30 11:30
भारत में सीएए-एनआरसी-एनपीआर की ड्रोनियन तिकड़ी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है, जबकि न्यायपालिका किसी भी सार्थक हस्तक्षेप करने से पहले हिंसा के रुकने का इंतजार कर रही है ’। इसके विपरीत, कई राज्य सरकारों ने इन कानूनों के पीछे के सिद्धांत और कार्यान्वयन पर अपनी मजबूत असहमति व्यक्त की है। इनमें से, केरल और पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों, पी विजयन और ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर काम रोकने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, और गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में केंद्र सरकार की फासीवादी नीतियों के कारण राज्य सरकारों का बढ़ता विरोध भारत के संघीय ढांचे और भारतीय संविधान पर गंभीर दबाव का स्पष्ट संकेत है। मुद्दा यह है कि क्या राज्य एक अंतर्निहित भेदभावपूर्ण कानून या संघीय ढांचे के कानून का उल्लंघन करने के लिए बाध्य हैं या क्या संविधान राज्य सरकारों को उनकी स्वायत्तता की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करता है?

राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स नेट बढ़ाना जरूरी

वेतन एचं पेंशन भोगियों पर टैक्स घटना चाहिए
नंतू बनर्जी - 2020-01-29 10:30
120 करोड़ से अधिक टेलीफोन ग्राहक, 25 करोड़ मोटर वाहन उपयोगकर्ता, लगभग पांच करोड़ विदेशी अवकाश पाने वाले, 17.10 करोड़ घरेलू हवाई यात्री, 38 करोड़ स्थायी (आयकर) खाता संख्या काड धारक, 12 लाख से अधिक सक्रिय पंजीकृत कंपनियां, 10 लाख से अधिक पंजीकृत डॉक्टर, करीब 20 लाख वकीलों (बार काउंसिल के अनुसार) के रूप में सेवारत तीन लाख चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), सभी प्रकार के सलाहकारों के लाखों, रियल एस्टेट से लेकर प्रबंधन सेवाओं, और करोड़ों व्यापारियों तक - किराणा की दुकानों से होम डिलीवरी प्रतिष्ठानों के लिए सड़क के किनारे फेरी लगाने वाले। ये 2019 में भारत के लिए प्रभावशाली आंकड़े हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप मजबूत स्थिति में

क्या भाजपा कर सकेगी वापसी?
सागरनील सिन्हा - 2020-01-28 10:32
राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी (आप) दिल्ली में दूसरा कार्यकाल हासिल करने में सक्षम हो सकती है - जो 8 फरवरी को चुनावों में दिखाई देगी। पिछली बार, आप ने शानदार जीत दर्ज की थी। 70 सीटों में से 67 उसी ने जीती थीऔर बाकी सीटें बीजेपी ने जीतीं। और, इस बार भी आम आदमी पार्टी अपने 2015 के शानदार प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद कर रही है।