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भारत के प्रधान न्यायाधीश

न्यायमूर्ति दीपक मिश्र के बाद रंजन गोगोई बैठेंगे इस पद पर
हरिहर स्वरुप - 2018-09-10 13:40
दो अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायामूर्ति दीपक मिश्र सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनका कार्यकाल विवादों में फंस गया था, लेकिन वह दृढ़ता से सभी बाधाओं के खिलाफ खड़े थे और अंत में उन्होंने अपने को खरा साबित किया। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने न्यायमूर्ति मिश्र के खिलाफ महाअभियोग लाने की कोशिश की, लेकिन राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया। नायडू ने पाया कि उस प्रस्ताव में पर्याप्त कारण नहीं थे। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार, शब्द या कार्रवाई से राज्य के किसी भी खंभे को हम कमजोर नहीं कर सकते।

पप्पू यादव का करूण विलाप

1990 का मंडल हीरो 2018 में क्यों रो रहा है?
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-08 18:53
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव कि बिहार में पिटाई हो गयी। पिटाई होना तो एक घटना है और राजनेताओं को कभी कभी इस तरह के हादसे का सामना करना पड़ता है। लेकिन उससे भी बड़ी घटना पप्पू यादव द्वारा मार खाकर फूट फूट कर रोना है। पप्पू कि छवि एक दबंग नेता की रही है। उनके खिलाफ हत्या तक के मामले चले हैं। निचली अदालत से उन्हें सजा भी मिली और ऊपरी अदालत ने उन्हें बरी भी किया। निचली अदालत से सजा पाने के पहले भी वे सांसद थे और दोषमुक्त होने के बाद भी वे सांसद हैं। वे अनेक बार सांसद रहे हैं। उसके पहले वे विधायक भी थे। वे किसी भी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीतने की क्षमता रखते हैं और अनेक बार तो निर्दलीय भी चुनाव जीत चुके हैं। जाहिर है, उनका अपना समर्थन आधार भी है और उनकी छवि एक बाहुबली नेता की है, जिसे चुनाव हराना आसान नहीं।

हरीश रावत स्टिंग मामला

दो साल बाद फिर गरमायी सियासत
योगेश कुमार गोयल - 2018-09-07 12:25
विधायकों की खरीद-फरोख्त संबंधी उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीब ढ़ाई साल पुराने स्टिंग का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकल आया है। उल्लेखनीय है कि 26 मार्च 2016 में प्रदेश में हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया था, जिसमें एक न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ के मालिक उमेश शर्मा और रावत को विधायकों की खरीद फरोख्त पर चर्चा करते दिखाया गया था। इसके दो माह बाद 8 मई 2016 में एक और स्टिंग सामने आया था, जिसमें वर्तमान और तत्कालीन कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह बिष्ट तथा द्वाराहाट के तत्कालीन विधायक मदन सिंह बिष्ट के बीच विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर बातचीत हो रही थी। फिलहाल इन स्टिंग की जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है लेकिन इन स्टिंग मामलों में अब एकाएक नया मोड़ आ गया है। एक जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य व केन्द्र सरकार को पक्षकार बनाते हुए कैबिनेट मंत्री हरक सिंह, मदन बिष्ट और पत्रकार उमेश शर्मा को नोटिस भेजा है और चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

अखिलेश ने शिवपाल की नई पार्टी के पीछे बीजेपी का हाथ बताया

एकमात्र उद्देश्य सेक्युलर गठबंधन को चोट पहुंचाना
प्रदीप कपूर - 2018-09-06 11:39
लखनऊः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को चाचा शिवपाल यादव से खतरे का सामना करना पड़ रहा है, जो अब 2019 के आम चुनावों से पहले यादव और मुस्लिम वोटों को विभाजित करने के लिए काम कर रहे हैं।

2019 लोकसभा चुनाव में विपक्ष बीजेपी से बेहतर स्थिति में

कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को एक होने के लिए अपने- अपने अहम त्यागने होंगे
नित्य चक्रवर्ती - 2018-09-05 12:54
तीन सितंबर को घोषित कर्नाटक में स्थानीय निकायों के चुनावों के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस राज्य के अर्ध शहरी इलाकों में बीजेपी के खिलाफ मजबूत स्थिति में है और लोकसभा चुनाव में वह जेडी (एस) गठबंधन के साथ भाजपा को करारी शिकस्त दे सकती है। कर्नाटक में भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनावों में 28 में से 17 सीटें मिलीं थीं। प्राप्त रुझानों और मिल रहे संकेतों के अनुसार कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में 27 में से कम से कम 20 सीटें पाने की स्थिति में है।

2021 की जनगणना में ओबीसी के आंकड़े

जरूरत पूर्ण जाति जनगणना की है
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-04 11:55
ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के बाद मोदी सरकार अब आगामी दस वर्षीय जनगणना में ओबीसी के आंकड़े जुटाने की बात कर रही है। यह जनगणना 2021 में होनी है और उसके पहले 2019 में लोकसभा के आमचुनाव होंगे, जो यह तय करेंगे कि मोदी सरकार आगे रह पाती है या नहीं। इसलिए ओबीसी के आंकड़े जुटाने की बात करना ओबीसी उत्थान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी की चुनाव जीतने की लालसा को दिखाता है।

भीमा-कोरेगांव की आड़ में गिरफ्तारी का मामला

यह शिगूफेबाजी भी कब तक चल पाएगी?
अनिल जैन - 2018-09-04 11:52
बहुचर्चित भीमा-कोरेगांव में कुछ महीनों पहले हुई भीषण जातीय हिंसा के मामले में देश के विभिन्न शहरों में छापेमारी कर पांच प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने और कुछ कार्यकर्ताओं के घरों की तलाशी लिए जाने के गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं। पुणे पुलिस की यह कार्रवाई न सिर्फ केंद्र और महाराष्ट्र की भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल खडे करती है, बल्कि इससे देश के भविष्य के लिए भी अशुभ संकेत मिलते हैं, जिसे देश की सर्वोच्च अदालत ने भी महसूस किया है।

दिल्ली में सरकारी सेवाओं की होम डेलिवरी

भ्रष्टाचार पर अबतक का सबसे बड़ा हमला
उपेन्द्र प्रसाद - 2018-09-01 10:06
दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सरकारी सेवाओं की होम डेलिवरी करने का फैसला किया है। इसके तहत अब दिल्लीवासियों को सरकारी सेवा लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहना तो दूर, उन्हें वहां जाना भी जरूरी नहीं होगा। बस 1072 नंबर के फोन को डायल करना होगा और काॅल सेंटर में फोन उठाने वाले कर्मी को यह बताना होगा कि उसे कौन सी सरकारी सेवा चाहिए। उसे सिर्फ यह बताना होगा कि उसे राशन कार्ड बनवाना है या जाति प्रमाण पत्र या आय प्रमाण पत्र।

यूपी में बिखर गया मुलायम का परिवारवाद

लोहिया के समाजवाद को डूबोता परिवारवाद
प्रभुनाथ शुक्ल - 2018-08-31 10:47
लोहिया के समाजवाद को मुलायम सिंह यादव संजो नहीं पाए। दो साल पूर्व सत्ता को लेकर परिवारवाद की जंग की वजह से सुलगता बारुद आखिर फट पड़ा और समाजवादी पार्टी शिवपाल सिंह यादव के बगावती तेवर के बाद दो फाड़ हो गयी। हलांकि जिस तरह पार्टी पर अधिकारवाद को लेकर लड़ाई चल रही थी उससे यह तस्वीर साफ थी कि विभाजन तो तय हैं। मुलायम सिंह यादव ताल ठोंक कर खदु को लोहिया के समाजवाद का असली उत्तराधिकारी मानते थे, लेकिन परिवारवाद की जंग में वह इस तरह झुलसे की खुद के अस्तित्व को नहीं बचा पाए।

बाढ़, तबाही और सबक

मानसून की दगाबाजी या पर्यावरण असंतुलन का दुष्परिणाम?
योगेश कुमार गोयल - 2018-08-30 09:57
बीते 28 अगस्त की सुबह दिल्ली में हुई चंद घंटों की बारिश ने ही दिल्ली में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। जगह-जगह सड़कें दरिया बन गई और घरों, दुकानों इत्यादि तक में इस कदर पानी भर गया कि हर तरफ बड़े-बड़े तालाबों जैसा नजारा दिखाई देने लगा। इन दृश्यों को देखकर हर किसी को यही डर सताने लगा कि अगर चंद घंटों की बारिश में ही दिल्ली का यह हाल हो सकता है तो अगर देश के कुछ अन्य राज्यों की भांति यहां भी तीन-चार दिन तक लगातार ऐसी ही बारिश हो जाए तो शायद दिल्ली भी बाढ़ की चपेट में आ जाए। भारी बारिश के कारण इस समय पहले से ही पहाड़ों से लेकर मैदानों तक केरल, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, असम, नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश इत्यादि देश के कई राज्य बाढ़ की भयानक विभीषिका से जूझ रहे हैं, जहां जान-माल की भारी क्षति के साथ-साथ जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।