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जयललिता की सत्ता पर न्यायपालिका का अंकुश

शिक्षा के क्षेत्र में मनमानी नहीं कर पाई मुख्यमंत्री
एस सेतुरमण - 2011-07-27 09:03
चेन्नईः सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री जयललिता ने एक के बाद एक निर्णय लेने शुरू कर दिए। शुरुआती दो महीने तो ठीकठाक रहा, लेकिन उसके बाद न्यायपालिका ने उनके एक निर्णय पर ब्रेक लगाकर उन्हें अहसास दिला दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुख्यमंत्री जो चाहे, वह सभी काम नहीं कर सकता। उसे नियम कायदों और कानूनों के मुताबिक ही चलना होता है।

संसद में फिर होगा हंगामा

जाति जनगणना पर फिर छिड़ी बहस
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-07-27 09:00
नई दिल्लीः यदि केन्द्र सरकार की मानें तो देश में जाति जनगणना शुरू हो चुकी है। इसकी शुरुआत 29 जून को त्रिपुरा में हुई। केन्द्र सरकार ने संसद में यह आश्वासन दिया था कि जाति जनगणना जून महीने में शुरू हो जाएगी। यह आश्वासन उस समय दिया गया था, जब विपक्ष फरवरी महीने में हो रही जनगणना में ही जाति को गिनने की मांग कर रहे थे।

अकाली दल का जनाधार सिकुड़ रहा है

मनप्रीत का नया मोर्चा एक बड़ी चुनौती
बी के चम - 2011-07-27 08:57
चंडीगढ़ः पंजाब विधानसभा का चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है, शिरोमणि अकाली दल के नेताओं के चेहरे उड़ते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से लेकर नीचे स्तर तक के अकाली नेताओं के साथ ऐसा ही हो रहा है। उन्हें लग रहा है कि उनकी सरकार चुनाव के बाद रहना मुश्किल है।

ममता बनर्जी को सफलता मिलना शुरू

गोरखा समस्या समाधान की ओर
आशीष बिश्वास - 2011-07-27 08:49
कोलकाताः सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने मेहनत के साथ काम करना प्रारंभ कर दिया था और उनकी मेहनत अब काम आने लगी है। सत्ता संभालने के दूसरे महीने में राज्य की अनेक समस्याएं समाधान की ओर बढ़ रही हैं। गोरखा समस्या का समाधान तो साफ दिखाई पड़ रहा है।

भारत की तुलना पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक से

आक्रामकता की नीति कांग्रेस के काम नहीं आएगी
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-07-27 08:47
मुंबई में आतंकी हमले के बाद भुवनेश्वर में राहुल गांधी ने जो कहा वह निश्चय ही घोर आपत्तिजनक और निंदनीय है। इससे पता चलता है कि कांग्रेस अपनी विफलताओं का सामना करने के लिए आक्रामकता की नीति अपनाने पर तुली हुई है। यही नीति भ्रष्टाचार के मामलों पर दिखाई पड़ रही है और यही महंगाई के मसले पर भी। कांग्रेस और केन्द्र सरकार के पास इन ज्वलंत मसलों पर कहने को कुछ है नहीं, इसलिए वह इस तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रही हैं। पर सवाल उठता है कि इस तरह की प्रतिक्रिया कांग्रेस को कहां ले जाएगी?

मंत्रिमंडल में फेरबदल से योग्यता की कमी का आभास

छवि बेहतर करने का मौका प्रधानमंत्री ने गंवा दिया
कल्याणी शंकर - 2011-07-15 09:18
मंत्रिमंडल में फेरबदल के एक दिन पहले मैंने सरकार के एक उच्च सूत्र से पूछा कि इसमें देर क्यों हो रही है, तो उस सूत्र ने बताया कि देर होने का कारण यह है कि सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मंत्री बनने की योग्यता रखने वाले लोग ही नहीं मिल पा रहे हैं। उसने मुझसे पूछा कि आप दस ऐसे लोगों के नाम बताएं, जो मंत्री बनने की योग्यता रखते हों। मैंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को ऐसे लोग पार्टी के अंदर नहीं मिल रहे हैं, तो उन्हें बाजार में ऐसे लोगों को ढ़ूंढ़ना चाहिए।

मनमोहन मंत्रिमंडल में फेरबदल

सरकार की छवि और खराब हुई
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-07-15 09:10
मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में फेरबदल के पहले लग रहा था कि सरकार अपनी छवि को बेहतर करने की कोशिश करेगी और जिन मंत्रियों के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएगी, पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। अव्वल तो बड़े पैमाने पर कोई फेरबदल हुआ ही नहीं और जो थोड़े बहुत हुआ, उससे सरकार की साख और गिर गई है।

आर्थिक सुधार कार्यक्रमों में अडंगा लगाएगी भाजपा

मानसून सत्र के हंगामापूर्ण होने के आसार
नित्य चक्रवर्त्ती - 2011-07-15 09:05
नई दिल्लीः अगले मानसून सत्र में मनमोहन सिंह की सरकार भाजपा की टकराव की नीति का सामना करती दिखाई पड़ेगी। इस सत्र के दौरान केन्द्र सरकार आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के दूसरे दौर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण कानूनों को तैयार करना चाहेगी। लेकिन भाजपा केन्द्र सरकार को इस सत्र के दौरान चैन की सांस नहीं लेने देगी और वह दूसरे दौर के उसके कार्यक्रमों से संबंधित विधेयकों को पारित कराने में हर संभव अड़ंगा डालती रहेगी।

कश्मीरियों के नामांकन को रोक रही है भाजपा सरकार

मघ्य प्रदेश के कॉलेज में नीतियां विद्यार्थी परिषद के प्रभाव में
एल एस हरदेनिया - 2011-07-15 09:01
भोपालः मध्यप्रदेश के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में कश्मीरी छात्रों के प्रवेश का मसला विवादों में पड़ गया है। प्रदेश के शिक्षा संस्थानों में राज्य सरकार ने कश्मीरी छा़त्रों के नामांकन को लगभग असंभव बना दिया है। यह कदम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इशारे पर उठाया गया है। गौरतलब है कि परिषद भाजपा की विद्यार्थी शाखा है।

तेलंगना का संकट

राज्य पुनर्गठन की एक सुसंगत नीति पर विचार हो
अवधेश कुमार - 2011-07-15 08:56
आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। एक पृथक राज्य की मांग के पक्ष को सशक्त करने के लिए तेलंगना क्षेत्र के इतने विधायकों और सांसदों का इस्तीफा निश्चित रूप से अकल्पनीय घटना है। तेलंगना क्षेत्र के 119 विधायकों एवं विधान पार्षदों में ज्यादातर का इस्तीफा हो चुका है। इनमें कांग्रेस के साथ तेलुगू देशम एवं प्रजाराज्यम यानी सभी दलों के प्रतिनिधि हैं। इस इस्तीफे के पीछे की सोच बताने की आवश्यकता नहीं है। आंध्रप्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं मंत्री के. जनार्दन रेड्डी ने कहा कि उनका इस्तीफा कांग्रेस हाई कमान एवं केन्द्र को केवल तेलंगना क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं से अवगत कराने के लिए है। कांग्रेस पार्टी चाहे इस पर जो भी बयान दे, पर यह एक गंभीर राजनीतिक एवं संवैघानिक संकट का आगाज है।