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दिल्ली पुलिस ने डायर जैसी कार्रवाई क्यों की?

राजकिशोर - 2011-06-10 09:39
रामलीला मैदान की घटना की तुलना जलियावाला बाग गोलीकांड से करना अनुचित नहीं है। दोनों घटनाओं में बहुत साम्य है। कुछ महत्वपूर्ण फर्क भी हैं। जलियावाला बाग में लोग सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू को रिहा करने की मांग के समर्थन में सभा करने आए थे। इन दोनों गांधीवादी नेताओं को गिरफ्तार कर पंजाब पुलिस ने किसी अनजान जगह पर छिपा रखा था। जनसभा का आयोजन करने वाले किसी तरह की हिंसा करने नहीं आए थे। हत्याकांड के बाद उनके पास से एक भी हथियार बरामद नहीं हुआ। लेकिन ब्रिगेडियर डायर को लगा कि अगर इस जन सभा को होने दिया गया, तो देश भर में बगावत हो जाएगी। वह ऐसी किसी बगावत को कुचलना चाहता था।

केन्द्र ने रामदेव के मामले में घपलेबाजी की

विश्वास का सकट जारी है
कल्याणी शंकर - 2011-06-10 06:43
केन्द्र सरकार रामदेव संकट में फंसकर यह तय कर नहीं पा रही है कि वह इससे कैसे निकले। आज यदि केन्द्र सरकार की यह स्थिति है, तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है। उसनंे इस मसले पर एक के बाद एक घपलेबाजी की और दलदल में लगातार फंसती गई। उसे लगा कि वह रामदेव को अपने हिसााब से चला पाने में सक्षम है। उसे अपने आप पर जरूरत से ज्यादा भरोसा था। इसलिए जब उसे कड़ाई करनी चाहिए थी, तो वह बेहद विनम्रता से पेश आ रही थी। बाद में जब उसे मामले को मुलायमियत से संभालना था, तो वह एकाएक कठोर हो गई।

स्वामी रामदेव का उपयोग

बाघ और बकरी को एक साथ पानी नहीं पिला पाए बाबा
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-06-09 10:13
अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ठीकठाक चल रहा था। 4 दिनों के अनशन के दबाव में केन्द्र सरकार कठोर लोकपाल विधेयक लाने को तैयार हो गई थी और अन्ना सहित 4 अन्य लोगांे को विधेयक का मसौदा बनाने वाली समिति में शामिल भी कर लिया था। पर उसके बाद बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और मोर्चा खोल दिया। प्रभावी लोकपाल कानून बनाने के अन्ना के आंदोलन के दौरान बाबा रामदेव ने अपने आपको उपेक्षित पाया और उनकी प्रतिक्रियों में यह साफ देखा जा सकता था कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में अन्ना को मुख्य भूमिका में आते देख विचलित थे। इसके कारण ही उन्होंने भ्रष्टाचार के व्यापक पहलुओं पर अपनी तरफ से एक बड़ा सत्याग्रह करने की घोषणा कर दी।

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर राजनीति का साया

लोकपाल विधेयक हो सकता है इसका शिकार
अमूल्य गांगुली - 2011-06-08 10:47
फजीहत के बाद कांग्रेस को अब कुछ राहत मिल रही है। इसका कारण यह है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान अब राजनैतिक रंग ले रहा है। जब तक यह गैर राजनैतिक लोगों के हाथों में था, तो केन्द्र सरकार और कांग्रेस के लिए उससे निबटना कठिन हो रहा था। इसके सामने देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी अपने आपको लाचार पा रही थी। जब केन्द्र सरकार के 4 मंत्रियों ने एक योगी संन्यासी को हवाई अड्डे पर रिसीब किया, तो इस सरकार की प्रतिष्ठा काफी धूमिल हो चुकी थी और इससे उसकी लाचारी का पता चलता था। उस अशालीन कदम की अपनी मूर्खता को छिपाने के लिए केन्द्र सरकार ने रामदेव और उनके समर्थकांे को रामलीला मैदान से ही रातों रात खदेड़ दिया। भाग रहे रामदेव को पकड़कर हरिद्वार भेज दिया गया।

सुधर रही है कश्मीर की हालत

केन्द्र को और राजनैतिक कदम उठाने चाहिए
बी के चम - 2011-06-08 10:44
चंडीगढ़ः पिछले कुछ महीनों से कश्मीर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सवाल उठता है कि क्या यह स्थिति आगे भी कायम रहेगी और कबतक? पिछले 3 दशकों से पाक स्थित आतंकी ताकतें घाटी में अशांति फेला रही हैं। क्या उन ताकतों का प्रभाव आने वाले दिनों में कम हो पाएगा?

जुल्म के निहत्थे प्रतिवाद की एक नजीर

राजकिशोर - 2011-06-08 10:41
दूसरी महा लड़ाई के दौरान, जब लंदन और पेरिस पर बमों की बारिश हो रही थी और हिटलर के जुल्मों को रोकना बेहद मुश्किल लग रहा था, तब महात्मा गांधी ने एक असाधारण सलाह दी थी। इस सलाह के लिए देश-विदेश में गांधी जी की कठोर आलोचना हुई थी और उनकी बात को बिलकुल हवाई करार दिया गया था। जिस तरह के वातावरण में हमारा जन्म और परवरिश हुई है, उसमें गांधी जी की बहुत-सी बातें हवाई ही लगती हैं। लेकिन कोई बात हवाई है या उसमें कुछ दम है, इसका इम्तहान तो परीक्षण के दौरान ही हो सकता है। गांधी जी की सलाह पर अमल किया जाता, तो यह सामने आ सकता था कि प्रतिकार का एक अहिंसक रूप भी हो सकता है और इससे भी बड़ी बात यह कि वह सफल भी हो सकता है।

सत्याग्रहियों पर लाठीचार्ज

कांग्रेस ने अपनी मुश्किलें बढ़ा ली हैं
उपेन्द्र प्रसाद - 2011-06-06 09:37
काले धन के खिलाफ बाबा रामदेव के अभियान से निबटने की जो रणनीति कांग्रेस ने बनाई, वह शुरू से ही दोषपूर्ण थी। सरकार काले धन के खिलाफ अपनी गंभीरता दिखाकर ही बाबा के अभियान से सफलतापूर्वक निबट सकती थी, लेकिन उसने बाबा को अन्ना कैंप के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जो उसकी बहुत बड़ी भूल थी।

गोगोई की चुनौतियां

बोडोलैंड की मांग फिर जोर पकड़ेगी
बरुण दास गुप्ता - 2011-06-04 09:01
कभी कभी अप्रत्याशित सफलता कुछ अप्रत्याशित समस्याएं पैदा करती हैं। असम विधानसभा चुनाव के पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि इस बार किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। कांग्रेस की सीटें 53 से कम होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही थी और माना जा रहा था कि भाजपा और असम गण परिषद की सीटें बढ़ जाएंगी।

कांग्रेस की कमजोरी के पीछे क्या है?

पार्टी के फिर से उत्थान के लिए छिड़ी है बहस
कल्याणी शंकर - 2011-06-03 08:56
कांग्रेस का इतिहास लिखने वाले इतिहासकारों के एक समूह ने हिंदी क्षेत्र और खासकर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पतन के लिए इन्दिरा गांधी और उनके आपातकाल को जिम्मेदार बताया है। जब पतन के लिए इन्दिरा गाध्ंाी का नाम लिया गया, तो पार्टी के अंदर अनेक लोगों की भवें तन गईे। उसके बाद कांग्रेस ने अपने आपको उस किताब में लिखे गए इतिहास से अलग कर लिया।

समस्याओं के समाधान के लिए हनुमानजी की शरण में जाएं

सरकार की मध्यप्रदेश की जनता को सलाह
एल एस हरदेनिया - 2011-06-03 08:53
भोपालः मध्यप्रदेश सरकार ने अब औपचारिक रूप से राज्य की जनता से अपील की है कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए हनुमानजी की शरण में जाएं। सरकार का कहना है कि यदि राज्य के लोगों के सामने किसी प्रकार की समस्या आए, तो वे राज्य सरकार की ओर न ताकें, बल्कि हनुमानजी की शरण में जाएं। उनकी शरण में जाने के बाद उनकी सारी समस्याएं हल हो जाएंगी।