दिल्ली पुलिस ने डायर जैसी कार्रवाई क्यों की?
2011-06-10 09:39 -रामलीला मैदान की घटना की तुलना जलियावाला बाग गोलीकांड से करना अनुचित नहीं है। दोनों घटनाओं में बहुत साम्य है। कुछ महत्वपूर्ण फर्क भी हैं। जलियावाला बाग में लोग सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू को रिहा करने की मांग के समर्थन में सभा करने आए थे। इन दोनों गांधीवादी नेताओं को गिरफ्तार कर पंजाब पुलिस ने किसी अनजान जगह पर छिपा रखा था। जनसभा का आयोजन करने वाले किसी तरह की हिंसा करने नहीं आए थे। हत्याकांड के बाद उनके पास से एक भी हथियार बरामद नहीं हुआ। लेकिन ब्रिगेडियर डायर को लगा कि अगर इस जन सभा को होने दिया गया, तो देश भर में बगावत हो जाएगी। वह ऐसी किसी बगावत को कुचलना चाहता था।