भारत
अब दिल्ली में आमचुनाव
आम आदमी पार्टी को एक और मौका
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2014-11-04 10:41 UTC
भारतीय जनता पार्टी द्वारा सरकार गठित करने से इनकार करने के बाद अब दिल्ली के मतदाताओं के सामने एक बार फिर अपनी सरकार चुनने की चुनौती खड़ी हो गई है। पिछले साल हुए चुनाव में दिल्ली के लोगों ने किसी पार्टी को सरकार चलाने का जनादेश नहीं दिया था और कांग्रेस के समर्थन से अरविंद केजरीवाल की अल्पमत सरकार बनी थी। केजरीवाल सरकार के इस्तीफे के बाद ही यह साफ हो गया था कि बिना चुनाव के अथवा बिना गंदी राजनीति के नई सरकार नहीं बन सकती और आमचुनाव ही एकमात्र रास्ता बच गया था। बेहतर तो यही होता कि अरविंद केजरीवाल सरकार की सिफारिश मानते हुए उसी समय दिल्ली की विधानसभा भंग कर दी जाती और लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी करवा दिए जाते। पर न तो उस उपराज्यपाल नजीब जंग ने और न ही उस समय की कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने विधानसभा भंग कर चुनाव करवाने को कोई फैसला लिया। शायद कांग्रेस को लग रहा था कि आम आदमी पार्टी और उसके नेता को दिल्ली से मुक्त रखकर देशभर में चुनाव लड़ने और प्रचार करने का मौका दिया जाय, जिससे कांग्रेस विरोधी मतों का विभाजन हो और फिर उससे कांग्रेस का फायदा हो। इसके अलावा कांग्रेस नेताओं को यह भी लग रहा होगा कि दिल्ली में फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार को समर्थन देकर वह आम आदमी पार्टी के विजयी सांासदों का समर्थन लेकर केन्द्र में सरकार बना सकती है।